अरशद मदनी बोले- मुसलमान आतंकवादी नहीं, नफरत फैलाने वाले असल आतंकवादी
मुस्लिम नाउ ब्यूरो, नई दिल्ली
मदरसों को लेकर हालिया विवाद के बीच जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा है कि मुसलमानों को आतंकवादी बताना और सांप्रदायिक नफरत फैलाना गलत है। अपने एक वीडियो संदेश में उन्होंने सांप्रदायिक हिंसा और नफरत फैलाने वाली ताकतों को ही आतंकवाद की वास्तविक मानसिकता से जोड़ते हुए निशाना साधा।
मौलाना अरशद मदनी ने कहा, “मुसलमान आतंकवादी नहीं हैं, बल्कि मुसलमानों को आतंकवादी कहने और नफरत फैलाने वाले फिरकावाराना लोग ही असल आतंकवादी हैं।” उन्होंने यह टिप्पणी स्वतंत्रता दिवस के 80वें वर्ष के अवसर पर दारुल उलूम देवबंद में आयोजित कार्यक्रम के संदर्भ में की।
उन्होंने कहा कि देश की धर्मनिरपेक्ष पहचान को बदलने की कोशिश करने वाली सांप्रदायिक ताकतों को सफल नहीं होने दिया जाएगा। मदनी के मुताबिक, भारत की विविधता और उसके सेक्युलर चरित्र की रक्षा करना सभी की जिम्मेदारी है।
मदरसों को लेकर बयान पर पहले भी जताई थी नाराजगी
मौलाना अरशद मदनी इससे पहले भी मदरसों को लेकर दिए गए विवादित बयानों पर प्रतिक्रिया दे चुके हैं। उन्होंने जमीयत उलेमा-ए-हिंद समेत देश के विभिन्न मौलानाओं, मदरसों और मुस्लिम धार्मिक संस्थानों के स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान का उल्लेख करते हुए मदरसों को आतंकवाद से जोड़ने वाले बयानों की आलोचना की थी।
उनकी नाराजगी खास तौर पर लेखिका तस्लीमा नसरीन और उत्तर प्रदेश के एक मंत्री की उस टिप्पणी को लेकर सामने आई, जिसमें मदरसों को आतंकवाद से जोड़ने का आरोप लगाया गया था। मदनी ने ऐसे बयानों को न केवल आपत्तिजनक बताया, बल्कि देश के इतिहास और स्वतंत्रता आंदोलन में मदरसों की भूमिका को भी याद किया।
"मुसलमान आतंकवादी नहीं हैं, बल्कि मुसलमानों को आतंकवादी कहने और नफ़रत फैलाने वाले फ़िरक़ावाराना (सांप्रदायिक) लोग ही असल आतंकवादी हैं। आज़ादी के 80वें जश्न के मौक़े पर दारुल उलूम देवबंद के इस प्रोग्राम में मैं यह साफ़ कर देना चाहता हूँ कि ये फ़िरक़ावाराना ताक़तें हमारे मुल्क के… pic.twitter.com/EuZPfiuew3
— Arshad Madani (@ArshadMadani007) August 18, 2026
तस्लीमा नसरीन के बयान पर विवाद
मदरसों को लेकर तस्लीमा नसरीन की टिप्पणी के बाद मुस्लिम समुदाय के एक वर्ग में नाराजगी देखी गई। उनके बयान को लेकर सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर भी बहस हुई।
तस्लीमा नसरीन लंबे समय से विवादों में रही हैं और भारत में भी उनके प्रवेश तथा सार्वजनिक गतिविधियों को लेकर पहले राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस होती रही है। पश्चिम बंगाल में उनके प्रवेश को लेकर भी अलग-अलग समय में विवाद सामने आते रहे हैं।
हालिया बयान के बाद मौलाना अरशद मदनी ने अपने वीडियो संदेशों के माध्यम से मदरसों और मुस्लिम धार्मिक संस्थानों की भूमिका का बचाव किया। उन्होंने कहा कि किसी समुदाय या उसके धार्मिक-शैक्षणिक संस्थानों को आतंकवाद से जोड़कर देखना उचित नहीं है।
सांप्रदायिकता के खिलाफ दिया संदेश
मदनी ने अपने ताजा बयान में किसी राजनीतिक दल या संगठन का सीधे तौर पर नाम नहीं लिया। हालांकि, उनके बयान का संदर्भ हाल में मदरसों और मुसलमानों को लेकर सामने आए विवादित बयानों से जुड़ा हुआ है।
उन्होंने सांप्रदायिक नफरत के खिलाफ आवाज उठाते हुए कहा कि भारत की धर्मनिरपेक्ष पहचान को कमजोर करने की किसी भी कोशिश को स्वीकार नहीं किया जा सकता।
मदनी का यह बयान ऐसे समय आया है जब स्वतंत्रता दिवस के 80वें वर्ष के अवसर पर देश में स्वतंत्रता आंदोलन, सामाजिक एकता, धर्मनिरपेक्षता और संविधान के मूल्यों को लेकर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। मदनी ने अपने संदेश में इसी संदर्भ में सांप्रदायिक सद्भाव और देश की साझा विरासत को बनाए रखने पर जोर दिया।

