नेपाल बाढ़: रसुवा, धादिङ और नुवाकोट में कितने मुसलमान प्रभावित?
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नौशाद अख्तर, काठमांडू
नेपाल में 26 अगस्त को भोटेकोशी नदी में आई अचानक बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। रसुवा से शुरू हुई इस प्राकृतिक आपदा का असर नुवाकोट, धादिङ, गोरखा और आसपास के कई इलाकों तक पहुंचा है। घर बह गए हैं। सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त हुए हैं। बिजली परियोजनाओं को नुकसान पहुंचा है। बड़ी संख्या में लोग लापता हैं।
ऐसे समय में सबसे बड़ा सवाल जान बचाने और राहत पहुंचाने का है। आपदा का कोई धर्म नहीं होता। बाढ़ जब आती है तो वह यह देखकर रास्ता नहीं बदलती कि सामने रहने वाला हिंदू है, बौद्ध है, मुस्लिम है या किसी दूसरे धर्म को मानता है।
फिर भी नेपाल की इस भीषण बाढ़ को लेकर एक सवाल उठना स्वाभाविक है। प्रभावित इलाकों में मुस्लिम आबादी कितनी है और क्या मुसलमानों की भी जान और संपत्ति का नुकसान हुआ है?
इस सवाल का अभी कोई आधिकारिक धार्मिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। नेपाल सरकार और सुरक्षा एजेंसियां फिलहाल मृतकों, लापता लोगों और संपत्ति के नुकसान का आकलन कर रही हैं। जारी आधिकारिक बाढ़ अपडेट में पीड़ितों की धार्मिक पहचान अलग से नहीं बताई गई है। सरकार ने भी कहा है कि मानवीय और भौतिक नुकसान का विस्तृत विवरण जुटाने का काम जारी है।
इसलिए अभी यह कहना संभव नहीं है कि बाढ़ में कितने मुसलमान मारे गए या मुस्लिम परिवारों की कितनी संपत्ति नष्ट हुई।

रसुवा में मुस्लिम आबादी बेहद कम
इस पूरे घटनाक्रम को समझने के लिए नेपाल की 2021 की राष्ट्रीय जनगणना के आंकड़े महत्वपूर्ण हैं।
रसुवा इस बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में शामिल है। सरकारी राहत अपील के मुताबिक 26 अगस्त की सुबह करीब 8:40 बजे भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ ने रसुवा में बड़े पैमाने पर जान और माल का नुकसान किया। इसके बाद नुवाकोट, धादिङ और गोरखा के नदी किनारे वाले इलाके भी प्रभावित हुए।
नेपाल की 2021 की जनगणना के अनुसार रसुवा की कुल आबादी 44,731 थी। इनमें मुस्लिम आबादी केवल 3 थी। यानी जिले की कुल आबादी में मुस्लिम समुदाय की हिस्सेदारी बेहद मामूली है। इसके मुकाबले रसुवा में 29,327 बौद्ध और 14,805 हिंदू दर्ज किए गए थे।
यह आंकड़ा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पता चलता है कि रसुवा में मुस्लिम समुदाय की मौजूदगी बहुत सीमित है। ऐसे में पूरे जिले में हुई बाढ़ की तबाही को देखते हुए भी मुस्लिम पीड़ितों की संख्या स्वाभाविक रूप से बहुत कम होने की संभावना बनती है। लेकिन यह केवल जनसांख्यिकीय अनुमान है। इसे मुस्लिम मृतकों या प्रभावित परिवारों का वास्तविक आंकड़ा नहीं माना जा सकता।
❗Major Floods Hit Northern Nepal, Rescue Ops Underway
— RT_India (@RT_India_news) August 26, 2026
Flash floods have swept through Timure and Syabrubesi in Rasuwa district, with terrifying visuals emerging from the affected areas.
Nepal PM Balendra Shah said the Army, Armed Police and police have been deployed for rescue… pic.twitter.com/Asd1qmTFKK
धादिङ में स्थिति थोड़ी अलग
धादिङ भी बाढ़ से प्रभावित प्रमुख जिलों में है। 2021 की जनगणना के अनुसार धादिङ की कुल आबादी 3,38,658 थी। इनमें 625 लोग इस्लाम धर्म को मानने वाले दर्ज किए गए। जिले में हिंदू आबादी 2,50,247 और बौद्ध आबादी 76,129 थी।
इस लिहाज से धादिङ में मुस्लिम आबादी रसुवा की तुलना में काफी ज्यादा है। फिर भी कुल आबादी के अनुपात में यह संख्या छोटी है।
यही वजह है कि धादिङ में बाढ़ से प्रभावित मुस्लिम परिवारों की मौजूदगी से इनकार नहीं किया जा सकता। लेकिन उनके जान माल के नुकसान का सही आंकड़ा सामने आने के लिए स्थानीय प्रशासन की विस्तृत रिपोर्ट का इंतजार करना होगा।
नेपाल पुलिस की एक आधिकारिक रिपोर्ट में बाढ़ के बाद धादिङ में बड़ी संख्या में लोगों के मारे जाने की जानकारी दी गई थी। बाद के अपडेट में मृतकों की संख्या लगातार बढ़ती रही। इससे भी साफ है कि बचाव और शवों की पहचान का काम कई स्तरों पर चल रहा था।
नुवाकोट में 384 मुसलमान
नुवाकोट भी इस आपदा से प्रभावित जिलों में शामिल है। यहां की स्थिति रसुवा से अलग है।
2021 की जनगणना के अनुसार नुवाकोट की कुल आबादी 2,88,478 थी। इनमें 384 मुस्लिम दर्ज किए गए। जिले में हिंदू आबादी 1,76,880 और बौद्ध आबादी 1,09,412 थी।
इसका मतलब यह है कि नुवाकोट में मुस्लिम आबादी बहुत बड़ी नहीं है, लेकिन रसुवा के मुकाबले यहां मुस्लिम समुदाय की संख्या काफी अधिक है। इसलिए बाढ़ के बाद नुवाकोट में मुस्लिम परिवारों की स्थिति पर अलग से जानकारी जुटाना जरूरी है।
खासकर नदी किनारे बसे गांवों और बाढ़ प्रभावित बस्तियों में रहने वाले परिवारों की स्थिति जानना राहत एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।
2,000 people now missing in Nepal as death toll from floods hits 579.
— 𓂀 𝕋𝔼𝔸ℍ 𓂀 (@TeahCartel) August 28, 2026
Nepali authorities say they’re monitoring two lakes upstream from the main flood zone, one of which has begun overflowing. pic.twitter.com/4cyByjJ1Yx
सरकारी आंकड़ों में धर्म का उल्लेख नहीं
नेपाल सरकार की ओर से जारी बाढ़ संबंधी सूचनाओं में मुख्य ध्यान बचाव, राहत, लापता लोगों और बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान पर है।
विदेश मंत्रालय ने 27 अगस्त को बताया था कि भोटेकोशी नदी क्षेत्र में आई बाढ़ से बड़ी संख्या में लोगों की जान गई है। घरों, सड़कों, पुलों और जलविद्युत परियोजनाओं को भी भारी नुकसान पहुंचा है। उस समय 359 शव मिलने और 33 देशों के 596 लोगों के लापता होने की जानकारी दी गई थी।
नेपाल पुलिस के बाद के आंकड़े में मृतकों की संख्या और बढ़ी हुई बताई गई। शुक्रवार दोपहर तक 489 लोगों की मौत की जानकारी दी गई थी। इनमें रसुवा में 13, नुवाकोट में 37 और धादिङ में 40 लोगों के शव मिलने की बात कही गई।
लेकिन इन आंकड़ों में धर्म के आधार पर कोई अलग श्रेणी नहीं बनाई गई है।
यही कारण है कि अभी मुस्लिम मृतकों की संख्या बताना सही नहीं होगा।
मुस्लिम आबादी नेपाल में कहां अधिक है?
नेपाल की मुस्लिम आबादी पूरे देश में समान रूप से नहीं फैली है। 2021 की जनगणना में देश में कुल मुस्लिम आबादी 9,54,023 दर्ज की गई थी।
मुस्लिम आबादी मुख्य रूप से तराई और मधेश क्षेत्र के जिलों में अधिक है। रौतहट, बारा, पर्सा, कपिलवस्तु, रुपन्देही, बांके और आसपास के इलाकों में मुस्लिम समुदाय की संख्या पहाड़ी जिलों की तुलना में काफी अधिक है।
इसके विपरीत रसुवा, नुवाकोट और धादिङ जैसे पहाड़ी जिलों में मुस्लिम आबादी अपेक्षाकृत कम है।
इस भौगोलिक अंतर को नेपाल की बाढ़ के संदर्भ में समझना जरूरी है। सबसे ज्यादा प्रभावित जिन इलाकों का अभी उल्लेख हो रहा है, उनमें मुस्लिम आबादी राष्ट्रीय स्तर पर मुस्लिम बहुल तराई जिलों जैसी नहीं है।
सवाल सिर्फ मुस्लिमों का नहीं, हर पीड़ित का है
बाढ़ के बाद किसी खास समुदाय के नुकसान का आंकड़ा जानना इसलिए जरूरी है ताकि राहत से कोई परिवार छूट न जाए। लेकिन इसे किसी धार्मिक प्रतिस्पर्धा के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
जरूरत इस बात की है कि प्रशासन यह बताए कि कितने परिवार बेघर हुए। कितने लोगों की मौत हुई। कितने लोग अब भी लापता हैं। कितने घर पूरी तरह नष्ट हुए। कितने लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया।
इसके बाद यदि धार्मिक या सामाजिक समूह के आधार पर विस्तृत आंकड़े उपलब्ध हों तो उन्हें भी सार्वजनिक किया जा सकता है।
नेपाल सरकार ने प्रभावित लोगों के पुनर्वास और दीर्घकालीन पुनर्स्थापन की जरूरत पर भी जोर दिया है। राहत के साथ अब चुनौती उन लोगों को फिर से बसाने की है जिनके घर और रोजी रोटी दोनों बाढ़ में बह गए हैं।
AEO के लिए सीधे जवाब
नेपाल बाढ़ में कितने मुसलमान मारे गए?
अभी इसका आधिकारिक आंकड़ा जारी नहीं हुआ है। सरकारी रिपोर्टों में मृतकों की धार्मिक पहचान अलग से नहीं बताई गई है।
रसुवा में कितने मुसलमान रहते हैं?
2021 की नेपाल जनगणना के अनुसार रसुवा में केवल 3 मुस्लिम रहते थे।
धादिङ में मुस्लिम आबादी कितनी है?
2021 की जनगणना के अनुसार धादिङ में 625 मुस्लिम दर्ज किए गए थे।
नुवाकोट में कितने मुसलमान हैं?
2021 की जनगणना में नुवाकोट में 384 मुस्लिम दर्ज किए गए थे।
क्या नेपाल सरकार ने मुस्लिमों के नुकसान का अलग आंकड़ा जारी किया है?
नहीं। उपलब्ध सरकारी बाढ़ रिपोर्टों में मृतकों और लापता लोगों का धार्मिक आधार पर अलग आंकड़ा नहीं दिया गया है। राहत और नुकसान का विस्तृत आकलन अभी जारी है।
फिलहाल सबसे अहम बात यही है कि नेपाल में बाढ़ से प्रभावित हर व्यक्ति तक राहत पहुंचे। धर्म और समुदाय की पहचान से पहले इंसान की जान बचाना जरूरी है। मुस्लिम परिवार भी इस मानवीय राहत व्यवस्था का हिस्सा हैं। उनके बारे में अलग आंकड़े तभी सामने आएंगे जब स्थानीय स्तर पर पीड़ितों की पहचान और नुकसान का विस्तृत सर्वे पूरा होगा।

