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हामिद अंसारी से पद्म श्री वापस मांगने वालों पर सवाल

मुस्लिम नाउ ब्यूरो, नई दिल्ली

पूर्व उपराष्ट्रपति मोहम्मद हामिद अंसारी द्वारा पंडित जवाहरलाल नेहरू के विचारों का हवाला देने के बाद देश का राजनीतिक पारा चढ़ गया है। दक्षिणपंथी संगठन हिंदू सेना ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर उनसे पद्म श्री सम्मान वापस लेने की मांग की है। वहीं दूसरी ओर, प्रबुद्ध वर्ग और संविधानविदों का मानना है कि ऐतिहासिक विचारों को सामने रखने पर नागरिक सम्मान वापस मांगने की परिपाटी पूरी तरह गलत और राजनीतिक विद्वेष से प्रेरित है।

पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के बयान पर छिड़ा नया विवाद

पूर्व उपराष्ट्रपति मोहम्मद हामिद अंसारी ने नई दिल्ली के इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेंटर में कानूनविद एजी नूरानी की स्मृति में आयोजित एक कार्यक्रम में भाषण दिया था। अपने संबोधन में उन्होंने देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के एक ऐतिहासिक वक्तव्य को साझा किया।

हामिद अंसारी ने बताया कि पंडित नेहरू ने विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के साथ बातचीत में कहा था कि भारत के लिए असली चुनौती बाहरी ताकतें नहीं बल्कि देश के भीतर की बहुसंख्यक सांप्रदायिकता है। इस बात का उल्लेख पूर्व विदेश सचिव जगत सिंह गुंडेविया और संविधान विशेषज्ञ एजी नूरानी ने भी अपनी किताबों में किया है। इस ऐतिहासिक संदर्भ को सामने रखते ही दक्षिणपंथी संगठनों और नेताओं में नाराजगी फैल गई।

हिंदू सेना की गृह मंत्रालय से मांग और लगाए गए आरोप

इस बयान के सामने आते ही हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता ने 21 सितंबर 2026 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को एक पत्र लिखा। पत्र में उन्होंने पूर्व उपराष्ट्रपति के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उनका पद्म श्री सम्मान तुरंत वापस लेने का आग्रह किया।

हिंदू सेना द्वारा लगाए गए मुख्य आरोप इस प्रकार हैं:

  • हामिद अंसारी के हालिया बयान देश की अखंडता और सामाजिक सौहार्द के खिलाफ हैं।
  • उन्होंने बहुसंख्यक हिंदू समुदाय और राष्ट्रवादी विचारधारा को निशाना बनाया है।
  • उनके बयानों से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की छवि को नुकसान पहुंचता है।
  • उनके पिछले प्रशासनिक और कूटनीतिक कार्यकाल की उच्चस्तरीय जांच कराई जानी चाहिए।

पद्म सम्मान की गरिमा और आलोचकों की संकीर्ण मानसिकता

नागरिक सम्मान किसी भी व्यक्ति को दशकों की उत्कृष्ट सेवा, बौद्धिक योगदान और राष्ट्र निर्माण में निभाई गई भूमिका के लिए दिए जाते हैं। हामिद अंसारी ने भारतीय प्रशासनिक सेवा और कूटनीति के क्षेत्र में वर्षों तक अपनी सेवाएं दी हैं। वे लंबे समय तक देश के उपराष्ट्रपति पद पर भी रहे हैं।

ऐसे प्रतिष्ठित व्यक्ति द्वारा इतिहास के तथ्यों को दोहराने पर सम्मान वापस मांगने की होड़ पूरी तरह अनुचित है। यदि किसी विचार से असहमति होने मात्र पर पुरस्कार वापस लिए जाने लगे, तो लोकतांत्रिक मर्यादाएं कमजोर होंगी। आलोचक अक्सर अपने राजनीतिक लाभ के लिए संवैधानिक पदों पर रहे व्यक्तियों के सम्मान को निशाना बनाते हैं। लोकतंत्र में स्वतंत्र विचार और इतिहास की समीक्षा करने का अधिकार हर नागरिक को प्राप्त है।

राजनीतिक बयानबाजी और सार्वजनिक विमर्श

सत्तारूढ़ दल भारतीय जनता पार्टी ने भी हामिद अंसारी की टिप्पणियों की आलोचना की है। पार्टी प्रवक्ताओं ने इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित बयान करार दिया। वहीं दूसरी ओर, कई स्वतंत्र पत्रकारों, विचारकों और धर्मनिरपेक्ष हलकों ने पूर्व उपराष्ट्रपति के वक्तव्य का समर्थन किया है। उनका कहना है कि नेहरूवादी विचारों और भारत के नागरिक राष्ट्रवाद पर चर्चा करना किसी भी तरह से देशद्रोह या भड़काऊ कृत्य नहीं है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

प्रश्न 1: पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी से कौन सा सम्मान वापस मांगने की चर्चा है? उत्तर: हिंदू सेना ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को पत्र भेजकर पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी को मिले नागरिक सम्मान ‘पद्म श्री’ को वापस लेने की मांग की है।

प्रश्न 2: हामिद अंसारी ने किस कार्यक्रम में और क्या बयान दिया था? उत्तर: उन्होंने इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेंटर में पंडित जवाहरलाल नेहरू के उस पुराने बयान का जिक्र किया था जिसमें बहुसंख्यक सांप्रदायिकता को देश के लिए चुनौती बताया गया था।

प्रश्न 3: क्या किसी के विचारों से असहमति पर पद्म पुरस्कार वापस लिया जा सकता है? उत्तर: पद्म पुरस्कार किसी व्यक्ति के लंबे और उल्लेखनीय राष्ट्रीय योगदान के लिए दिए जाते हैं। केवल वैचारिक मतभेद या ऐतिहासिक बयानों का हवाला देने पर सम्मान वापस लेने का कोई वैधानिक आधार नहीं होता है।

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