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गाजा से अत्याचार के वायरल तस्वीर का सच और यूएन में घिरा इजरायल

मुस्लिम नाउ ब्यूरो, वाशिंगटन

गाजा में फिलिस्तीनियों की दुर्दशा और इजरायली सैन्य कार्रवाई को लेकर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल उठ रहे हैं। सोशल मीडिया पर एक तस्वीर साझा की जा रही है। इसमें कई फिलिस्तीनी जमीन पर पड़े दिखाई देते हैं। उनके हाथ पैर बंधे होने, आंखों पर पट्टियां होने और शरीर पर चोट के निशान होने का दावा किया जा रहा है। तस्वीर को लेकर सोशल मीडिया पर लोगों ने गंभीर चिंता जताई है। हालांकि, इस तस्वीर की स्वतंत्र पुष्टि और इसमें दिख रहे लोगों की पहचान की पुष्टि उपलब्ध जानकारी के आधार पर नहीं हो सकी है।

इसी बीच संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में फिलिस्तीन के उप प्रतिनिधि माजेद बाम्या ने फिलिस्तीनी जनता के हालात पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि फिलिस्तीनियों को लगातार हिंसा, विस्थापन और कब्जे का सामना करना पड़ रहा है। इसके बावजूद उनसे बार बार शांति के प्रति अपनी प्रतिबद्धता साबित करने की अपेक्षा की जाती है।

बाम्या ने सुरक्षा परिषद की बैठक में कहा कि फिलिस्तीनियों ने सुरक्षा और न्याय की मांग की है, न कि बदले की। उन्होंने गाजा में बड़े पैमाने पर हुई तबाही, परिवारों के खत्म होने और पश्चिमी तट में बढ़ती हिंसा का जिक्र किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि स्थायी शांति के लिए कब्जे का अंत जरूरी है। <Link url=”https://www.aa.com.tr/en/middle-east/palestine-s-deputy-un-envoy-says-israeli-demands-amount-to-permanent-subjugation/4090317” title=”बैठक पर प्रकाशित रिपोर्ट यहां पढ़ें”/>।

सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीर से उठे सवाल

सोशल मीडिया पर प्रसारित तस्वीर को लेकर दुनिया के अलग अलग हिस्सों में लोगों ने सवाल उठाए हैं। तस्वीर साझा करने वाले कुछ लोगों का कहना है कि यदि इसमें दिखाए गए लोगों को हिरासत में लिया गया था, तो उनके साथ किए गए कथित व्यवहार की जांच होनी चाहिए। मानवाधिकार के नजरिए से भी हिरासत में लिए गए लोगों की सुरक्षा, सम्मान और उनके साथ उचित व्यवहार सुनिश्चित करना जरूरी है।

हालांकि, किसी तस्वीर को देखकर ही यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि उसमें दिखाई देने वाले लोगों की हत्या कर दी गई या उन्हें किसने और किन परिस्थितियों में चोट पहुंचाई। इसके लिए तस्वीर के मूल स्रोत, समय, स्थान और संबंधित घटनाक्रम की पुष्टि जरूरी है।

फिलिस्तीन से जुड़ी खबरों और सोशल मीडिया पोस्ट के बीच यह अंतर समझना महत्वपूर्ण है। गाजा में नागरिकों की मौत, बड़े पैमाने पर विस्थापन और बुनियादी सुविधाओं के विनाश की रिपोर्टें संयुक्त राष्ट्र सहित विभिन्न संस्थाओं ने जारी की हैं। लेकिन किसी खास तस्वीर की प्रामाणिकता की जांच अलग से की जानी चाहिए।

माजेद बाम्या ने सुरक्षा परिषद में क्या कहा?

फिलिस्तीन के उप संयुक्त राष्ट्र प्रतिनिधि माजेद बाम्या ने सुरक्षा परिषद की बैठक में 7 अक्टूबर 2023 के हमलों के बाद पैदा हुए हालात का उल्लेख किया। उन्होंने याद दिलाया कि उन हमलों की निंदा की गई थी और बंधकों की रिहाई की मांग उठी थी। उस समय कई देशों ने इजरायल के आत्मरक्षा के अधिकार की भी बात कही थी।

बाम्या ने सवाल किया कि क्या कभी किसी बड़े नरसंहार के बाद फिलिस्तीनियों को भी यह कहा गया कि उन्हें अपनी सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं हुआ।

उन्होंने गाजा में मारे गए फिलिस्तीनियों की संख्या का जिक्र करते हुए कहा कि मौतों का आंकड़ा 10 हजार से बढ़कर 20 हजार, 50 हजार और फिर 70 हजार तक पहुंचने के बावजूद फिलिस्तीनियों से शांति के प्रति प्रतिबद्धता साबित करने की अपेक्षा जारी रही।

बाम्या ने कहा कि फिलिस्तीनियों ने आने वाले खतरे, बड़े पैमाने पर हत्याओं और जबरन विस्थापन के बारे में चेतावनी दी थी। उन्होंने हिंसा को उचित ठहराने के बजाय कूटनीति का रास्ता अपनाया और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से सुरक्षा तथा न्याय की मांग की।

उनके शब्दों में, फिलिस्तीनियों ने हिंसा को सही ठहराने वाली दलीलें नहीं मांगीं। उन्होंने सुरक्षा और न्याय की मांग की थी, बदले की नहीं। इसके बावजूद उन्हीं से शांति के प्रति अपनी प्रतिबद्धता साबित करने के लिए कहा जा रहा है।

गाजा में 92 प्रतिशत घर नष्ट या क्षतिग्रस्त होने का दावा

माजेद बाम्या ने गाजा में आवासीय इमारतों को हुए नुकसान का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां लगभग 92 प्रतिशत घर पूरी तरह नष्ट हो चुके हैं या क्षतिग्रस्त हुए हैं। उन्होंने बताया कि कई परिवारों की कई पीढ़ियां इस संघर्ष में खत्म हो गईं। जो लोग बच गए हैं, वे अपनी जान बचाने के लिए लगातार सुरक्षित स्थान की तलाश में भाग रहे हैं।

युद्ध और विस्थापन का असर केवल मकानों तक सीमित नहीं है। लोगों को भोजन, साफ पानी, स्वास्थ्य सेवाओं और सुरक्षित आश्रय की जरूरत है। बार बार जगह बदलने की मजबूरी के कारण परिवारों के लिए सामान्य जीवन जीना भी मुश्किल हो गया है।

गाजा में नागरिक बुनियादी ढांचे को पहुंचे नुकसान और विस्थापित लोगों की जरूरतों पर संयुक्त राष्ट्र की विभिन्न एजेंसियां लगातार चिंता जता रही हैं। अक्टूबर 2026 में रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में भी संयुक्त राष्ट्र की अंतरराष्ट्रीय प्रवासन एजेंसी के हवाले से बताया गया कि सर्दियों से पहले गाजा की बड़ी आबादी को तत्काल आश्रय सहायता की जरूरत है। रिपोर्ट में कहा गया कि लगभग 18 लाख लोग विस्थापन स्थलों पर रह रहे हैं और इनमें से कई स्थानों पर बारिश तथा बाढ़ का खतरा है। <Link url=”https://www.reuters.com/business/environment/almost-all-gaza-residents-need-shelter-el-nio-threatens-flooding-un-agency-says-2026-10-09/” title=”रॉयटर्स की रिपोर्ट पढ़ें”/>।

पश्चिमी तट और पूर्वी यरुशलम में भी हिंसा का आरोप

बाम्या ने अपने संबोधन में गाजा के अलावा कब्जे वाले पश्चिमी तट और पूर्वी यरुशलम की स्थिति पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पिछले तीन वर्षों में इन क्षेत्रों में एक हजार से अधिक फिलिस्तीनियों पर हमले हुए हैं।

उनके अनुसार, 2026 की शुरुआत से अब तक इजरायली बस्तियों में रहने वाले लोगों, जिन्हें सेटलर कहा जाता है, की ओर से लगभग छह हजार हमले किए गए हैं। उन्होंने इन घटनाओं को फिलिस्तीनी समुदाय की सुरक्षा और स्थिरता के लिए गंभीर खतरा बताया।

पश्चिमी तट में बस्तियों के विस्तार और फिलिस्तीनी परिवारों के विस्थापन का मुद्दा संयुक्त राष्ट्र में लंबे समय से उठता रहा है। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव की जून 2026 की रिपोर्ट में भी बस्ती संबंधी हिंसा में वृद्धि, संपत्ति को नुकसान और फिलिस्तीनी समुदायों के विस्थापन का उल्लेख किया गया था। <Link url=”https://www.un.org/unispal/document/sg-report-24jun26/” title=”संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट देखें”/>।

फिलिस्तीन का कहना है कि गाजा और पश्चिमी तट में सुरक्षा के साथ राजनीतिक अधिकारों की रक्षा भी जरूरी है। केवल सैन्य कार्रवाई या सुरक्षा संबंधी दलीलों से इस संघर्ष का स्थायी समाधान नहीं निकल सकता।

युद्धविराम और फिलिस्तीनी प्राधिकरण का सवाल

बाम्या ने कहा कि फिलिस्तीनियों ने युद्धविराम योजना और उसका समर्थन करने वाले सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव का स्वागत किया था। उनके अनुसार, इस पहल में खूनखराबा रोकने, कब्जे को समाप्त करने और जबरन विस्थापन से बचाने जैसे सिद्धांत शामिल थे।

उन्होंने आरोप लगाया कि इजरायल इन उद्देश्यों के रास्ते में बाधा डाल रहा है। उन्होंने फिलिस्तीनी प्राधिकरण की कमजोर होती स्थिति का भी उल्लेख किया। बाम्या के अनुसार, प्राधिकरण के अधिकांश कर्मचारियों को पिछले 15 महीनों से वेतन नहीं मिला है।

उन्होंने सुरक्षा परिषद के सदस्यों से सवाल किया कि यदि किसी देश की सरकार के अधिकांश कर्मचारियों को इतने लंबे समय तक वेतन न मिले, तो वहां सरकारी व्यवस्था कितने समय तक सामान्य रूप से काम कर पाएगी।

बाम्या ने यह भी आरोप लगाया कि इजरायल फिलिस्तीनी प्राधिकरण से सुधारों की मांग करता है, लेकिन उन्हीं सुधारों में बाधा डालता है। उन्होंने कहा कि एक ओर निरस्त्रीकरण की बात की जाती है, दूसरी ओर सैन्य कब्जे और बस्तियों में रहने वाले लोगों को हथियार दिए जाने पर सवाल बने हुए हैं।

उन्होंने इन परिस्थितियों को शांति के बजाय स्थायी अधीनता की स्थिति बताया।

कब्जे को सुरक्षा के नाम पर सही नहीं ठहराया जा सकता

फिलिस्तीनी प्रतिनिधि ने कहा कि सुरक्षा की जरूरत का हवाला देकर किसी क्षेत्र पर कब्जे को सही नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने फिलिस्तीन, लेबनान और सीरिया का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि सुरक्षा के नाम पर क्षेत्रीय कब्जे को स्वीकार कर लिया गया, तो अंतरराष्ट्रीय सीमाओं और संप्रभुता के सिद्धांत कमजोर पड़ जाएंगे। इससे संघर्ष लंबे समय तक जारी रहने का खतरा रहेगा।

बाम्या ने कहा कि स्थायी समाधान के लिए ऐसी व्यवस्था जरूरी है, जिसमें संप्रभु देशों के रूप में समान अधिकारों और कर्तव्यों के साथ सुरक्षा तथा समृद्धि साझा की जा सके। उनके अनुसार, विकल्प यही है कि क्षेत्र के देश बराबरी के आधार पर शांति से रहें या लगातार संघर्ष की स्थिति बनी रहे।

फिलिस्तीन और इजरायल के बीच विवाद का समाधान संयुक्त राष्ट्र में लंबे समय से चर्चा का विषय है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने भी सितंबर 2026 में दो राष्ट्र समाधान का समर्थन करते हुए कहा था कि स्वतंत्र और संप्रभु फिलिस्तीनी राष्ट्र तथा इजरायल को मान्यता प्राप्त सीमाओं के भीतर शांति और सुरक्षा के साथ रहने का अवसर मिलना चाहिए। <Link url=”https://www.un.org/unispal/document/sg-statement-22sep26/” title=”संयुक्त राष्ट्र महासचिव का बयान पढ़ें”/>।

गाजा में कथित हिरासत अत्याचारों की वायरल तस्वीर से लेकर सुरक्षा परिषद में उठे सवालों तक, फिलिस्तीन का मुद्दा केवल युद्धविराम तक सीमित नहीं है। इसमें नागरिकों की सुरक्षा, विस्थापित परिवारों की वापसी, पुनर्निर्माण, मानवाधिकार और स्वतंत्र फिलिस्तीनी राष्ट्र का सवाल भी शामिल है। स्थायी शांति के लिए इन सभी मुद्दों पर ठोस कदम उठाना जरूरी होगा।

बाम्या ने अपने संबोधन में स्पष्ट कहा कि फिलिस्तीनियों को हमेशा संघर्ष की स्थिति में रखने के बजाय उन्हें समान अधिकारों और सुरक्षा के साथ संप्रभु देश के रूप में रहने का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने दोहराया कि कब्जे का अंत ही स्थायी शांति की दिशा में जरूरी कदम है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1. माजेद बाम्या ने संयुक्त राष्ट्र में क्या कहा?

उन्होंने कहा कि फिलिस्तीनियों से शांति के प्रति प्रतिबद्धता साबित करने की अपेक्षा की जाती है, जबकि वे हिंसा, विस्थापन और कब्जे का सामना कर रहे हैं। उन्होंने न्याय, सुरक्षा और कब्जे के अंत की मांग की।

2. गाजा में कितने घर नष्ट या क्षतिग्रस्त हुए हैं?

माजेद बाम्या ने सुरक्षा परिषद में लगभग 92 प्रतिशत घरों के नष्ट या क्षतिग्रस्त होने का दावा किया। यह आंकड़ा उनके संबोधन के हवाले से दिया गया है।

3. क्या वायरल तस्वीर में दिख रहे फिलिस्तीनियों की पहचान की पुष्टि हुई है?

उपलब्ध जानकारी के आधार पर तस्वीर में दिख रहे लोगों की पहचान, तस्वीर का मूल स्रोत और घटना की परिस्थितियां स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हो सकी हैं।

4. फिलिस्तीन के स्थायी समाधान की मांग क्या है?

फिलिस्तीनी पक्ष कब्जे के अंत, नागरिकों की सुरक्षा, स्वतंत्रता और संप्रभुता की मांग करता है। संयुक्त राष्ट्र दो राष्ट्र समाधान का समर्थन करता है, जिसके तहत इजरायल और फिलिस्तीन दोनों शांति तथा सुरक्षा के साथ रह सकें।

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