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जमीयत उलमा-ए-हिंद ने छह महीने में खोले 5,352 नए मक्तब

मुस्लिम नाउ ब्यूरो, नई दिल्ली

जमीयत उलमा-ए-हिंद ने अगले छह महीनों में दीनी शिक्षा, सामाजिक सुधार और जनसेवा के कामों को और व्यापक बनाने का लक्ष्य तय किया है। राजस्थान के जैसलमेर जिले के पोकरण स्थित दारुल उलूम इस्लामिया में आयोजित संगठन के नौवें केंद्रीय छमाही मशविरे में युवाओं को जिम्मेदारी सौंपने, नए मक्तब खोलने और गांवों तक सामाजिक विकास की गतिविधियां पहुंचाने पर जोर दिया गया। जमीयत के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने देशभर से आए पदाधिकारियों से कहा कि संगठन की प्राथमिकता व्यक्तिगत प्रतिष्ठा नहीं, बल्कि मिल्लत और देश की सेवा होनी चाहिए।

15 अक्टूबर 2026 को सामने आई जानकारी के अनुसार, तीन दिवसीय सम्मेलन में जमीयत की प्रांतीय और क्षेत्रीय इकाइयों के अध्यक्षों, महासचिवों तथा नाजिमों ने हिस्सा लिया। बैठक में अप्रैल से अक्टूबर 2026 तक के छह महीनों की गतिविधियों की समीक्षा की गई। साथ ही, आगामी छह महीनों के लिए विभिन्न विभागों के लक्ष्य निर्धारित किए गए।

जमीयत की ओर से प्रस्तुत रिपोर्ट के मुताबिक, इस अवधि में देशभर में 5,352 नए दीनी मक्तब स्थापित किए गए। कुरआन और हदीस की शिक्षा के लिए 14,708 नए स्थानों पर दर्स शुरू हुआ। संगठन के विभाग-ए-रफीक से 9,400 युवाओं को जोड़ा गया। इसके अलावा, जन विकास सेवा के लिए 484 गांवों का चयन किया गया।

ये आंकड़े जमीयत की शैक्षिक और सामाजिक गतिविधियों के विस्तार को दर्शाते हैं। सम्मेलन में इस बात पर भी चर्चा हुई कि इन प्रयासों को अधिक व्यवस्थित बनाकर समाज के जरूरतमंद तबकों तक कैसे पहुंचाया जाए।

छह महीने में 5,352 नए मक्तब स्थापित

जमीयत उलमा-ए-हिंद की बैठक में दीनी शिक्षा के विस्तार को प्रमुख विषयों में शामिल किया गया। प्रस्तुत रिपोर्ट के अनुसार, पिछले छह महीनों में 5,352 नए मक्तब खोले गए। संगठन के माध्यम से पहले से 63 हजार से अधिक मक्तब संचालित होने की जानकारी भी दी गई।

आगामी छह महीनों में 5,332 और मक्तब स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। इस योजना के तहत बुनियादी धार्मिक शिक्षा के दायरे को बढ़ाने और अधिक बच्चों तक शिक्षा पहुंचाने पर ध्यान दिया जाएगा।

कुरआन और हदीस के अध्ययन से जुड़ी गतिविधियों में भी विस्तार दर्ज किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, 5,860 नए स्थानों पर दर्स-ए-कुरआन और 8,848 स्थानों पर दर्स-ए-हदीस शुरू किया गया। इस तरह दोनों श्रेणियों को मिलाकर 14,708 नए स्थानों पर धार्मिक अध्ययन की व्यवस्था शुरू होने की जानकारी दी गई।

सम्मेलन के दौरान दीनी तालीमी बोर्ड और मक्तबों के कामकाज पर भी चर्चा हुई। जमीयत उलमा, उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती सैयद मुहम्मद अफ्फान मंसूरपुरी ने इस विषय पर प्रस्तुति दी और सुझाव रखे।

उन्होंने बुनियादी दीनी शिक्षा के विस्तार, नए मक्तबों की स्थापना, शिक्षकों के प्रशिक्षण और शैक्षणिक गतिविधियों की निगरानी को महत्वपूर्ण बताया। इस दौरान प्रांतीय इकाइयों की जिम्मेदारियों और आगामी कार्ययोजना पर भी विचार किया गया।

युवाओं को संगठन से जोड़ने पर जोर

मौलाना महमूद मदनी ने अपने संबोधन में युवाओं को आगे बढ़ाने और उन्हें संगठनात्मक जिम्मेदारियां सौंपने की जरूरत पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को काम करने के अवसर मिलने चाहिए। उन्हें ऐसी जिम्मेदारियां दी जानी चाहिए, जिनसे वे अनुभव हासिल कर सकें और भविष्य में नेतृत्व की भूमिका निभाने के लिए तैयार हों।

उन्होंने कहा कि युवाओं को तैयार करने से जमीयत उलमा-ए-हिंद के संदेश और उसकी सामाजिक गतिविधियों को देश के अधिक से अधिक हिस्सों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। उनका जोर इस बात पर था कि संगठन के मौजूदा पदाधिकारी नई पीढ़ी को आगे बढ़ने का अवसर दें और उन्हें जिम्मेदारियां निभाने के लिए तैयार करें।

रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले छह महीनों में विभाग-ए-रफीक से 9,400 युवाओं को जोड़ा गया। आगामी छह महीनों में 9,753 और युवाओं को इस विभाग से जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

मौलाना मदनी ने कहा कि मिल्लत के साझा उद्देश्यों की पूर्ति के लिए समान विचार रखने वाले लोगों को साथ लेकर चलना जरूरी है। उन्होंने संगठन के पदाधिकारियों से काम में अधिक मेहनत, ईमानदारी और दृढ़ संकल्प के साथ जुटने की अपील की।

उनके मुताबिक, पिछले छह महीनों में कई विभागों ने प्रगति की है, लेकिन समाज की जरूरतों और मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए अभी बहुत काम किया जाना बाकी है। इसलिए संगठन के सभी स्तरों पर सक्रियता बढ़ाने की आवश्यकता है।

मिल्लत और देश की सेवा को पहली प्राथमिकता

जमीयत अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि संगठन के लिए देश और मिल्लत की सेवा सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने पदाधिकारियों से अपने भीतर सेवा का ऐसा जज्बा पैदा करने को कहा, जिसमें व्यक्तिगत पहचान और प्रतिष्ठा के बजाय सामूहिक हित को महत्व दिया जाए।

उन्होंने संगठन के पूर्वजों के संघर्ष और बलिदानों का उल्लेख करते हुए कहा कि सीमित संसाधनों और प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने दृढ़ता के साथ काम किया। मौलाना मदनी ने कहा कि मौजूदा पीढ़ी की जिम्मेदारी है कि वह उनके सेवा भाव और जिम्मेदारी की भावना को अपने व्यावहारिक जीवन में अपनाए।

जमीयत उलमा-ए-हिंद के उपाध्यक्ष मौलाना मुहम्मद सलमान बिजनौरी ने भी अपने संबोधन में काम के पीछे की नीयत को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि जब लोग व्यक्तिगत प्रसिद्धि, दिखावे और निजी स्वार्थ से ऊपर उठकर अल्लाह की प्रसन्नता के लिए काम करते हैं, तो छोटे से छोटे प्रयास का भी महत्व होता है। इसके विपरीत, केवल पद और प्रतिष्ठा पर आधारित पहचान स्थायी नहीं रहती।

समाज सुधार और सद्भावना कार्यक्रमों के लक्ष्य बढ़े

केंद्रीय मशविरे में सामाजिक सुधार और आपसी सद्भाव को बढ़ावा देने वाली गतिविधियों की भी समीक्षा की गई।

जमीयत की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले छह महीनों में इस्लाह-ए-मुआशरा यानी समाज सुधार के तहत 7,351 कार्यक्रम आयोजित किए गए। इनका उद्देश्य नैतिक प्रशिक्षण, सामाजिक सुधार और फिजूलखर्ची जैसी समस्याओं के प्रति जागरूकता बढ़ाना था। आगामी छह महीनों में 8,383 कार्यक्रम आयोजित करने का लक्ष्य रखा गया है।

सद्भावना मंच के तहत राष्ट्रीय एकता, आपसी सहयोग और सांप्रदायिक सौहार्द को बढ़ावा देने के लिए 356 कार्यक्रम आयोजित किए गए। अगले चरण में 1,091 कार्यक्रम करने की योजना बनाई गई है।

जन विकास सेवा के अंतर्गत सामाजिक और शैक्षिक विकास संबंधी गतिविधियों के लिए 484 गांवों का चयन किया गया। आगामी छह महीनों में 748 और गांवों को इस अभियान से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।

इन योजनाओं के जरिए संगठन ने सामाजिक गतिविधियों का दायरा बढ़ाने और स्थानीय स्तर पर लोगों की जरूरतों से जुड़े कामों को आगे ले जाने की योजना पेश की।

आदर्श मस्जिदों और प्रशिक्षण पर भी योजना

सम्मेलन में मस्जिदों को धार्मिक मार्गदर्शन के साथ सामाजिक सेवा के केंद्र के रूप में विकसित करने पर भी चर्चा हुई। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले छह महीनों में 1,806 आदर्श मस्जिदें स्थापित की गईं। आगामी छह महीनों में इनकी संख्या बढ़ाकर 2,556 करने का लक्ष्य तय किया गया है।

संगठनात्मक प्रशिक्षण भी बैठक के प्रमुख विषयों में शामिल रहा। कार्यकर्ताओं की क्षमता बढ़ाने और संगठन को मजबूत करने के लिए 115 कार्यशालाएं आयोजित की गईं। अगले छह महीनों में 386 कार्यशालाएं आयोजित करने की योजना बनाई गई है। इसके अलावा, पांच हजार से अधिक संगठनात्मक बैठकें होने की जानकारी दी गई।

बैठक में आदर्श मस्जिदों के विकास, प्रत्येक इकाई में इस्लाह-ए-मुआशरा समिति के गठन और आदर्श जिलों में फैमिली काउंसलिंग सेंटर स्थापित करने के प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई। इन पहलों का उद्देश्य धार्मिक और सामाजिक मार्गदर्शन के साथ पारिवारिक समस्याओं के समाधान में सहायता उपलब्ध कराना है।

जमीयत के विभिन्न विभागों ने अपनी रिपोर्ट और प्रस्तुतियां भी पेश कीं। इनमें ओवैस सुल्तान खान ने जेईएम, मुफ्ती महदी हसन ऐनी ने सद्भावना मंच, डॉ. शब्बीर मुश्ताक मीर ने खैर ऐप और प्रशिक्षण, मौलाना मुहम्मद अखलाक ने रफीक तथा मौलाना मुहम्मद उमर कासमी ने इस्लाह-ए-मुआशरा, आदर्श मस्जिदों और ऐप से जुड़ी जानकारी दी। संगठन के सचिव मौलाना नियाज अहमद फारूकी ने पैरा लीगल प्रशिक्षण के बारे में बताया।

पोकरण में तीन दिवसीय सम्मेलन का समापन

जमीयत उलमा-ए-हिंद का नौवां केंद्रीय छमाही मशविरा राजस्थान के पोकरण स्थित दारुल उलूम इस्लामिया में आयोजित किया गया। कार्यक्रम के मेजबान जमीयत के उपाध्यक्ष मौलाना कारी मुहम्मद अमीन थे, जो संस्थान के मुहतमिम भी हैं। मदरसे के शिक्षक मुफ्ती फजलुद्दीन कासमी ने स्वागत भाषण दिया।

सम्मेलन के अलग-अलग सत्रों की अध्यक्षता जमीयत के उपाध्यक्ष मौलाना मुहम्मद सलमान बिजनौरी, मौलाना कारी मुहम्मद अमीन, मजलिस-ए-कायमा के अध्यक्ष मुफ्ती रहमतुल्लाह मीर कश्मीरी, जमीयत उलमा कर्नाटक के अध्यक्ष मुफ्ती इफ्तिखार अहमद कासमी और जमीयत उलमा असम के उपाध्यक्ष मौलाना अब्दुल कादिर ने की।

बैठकों की शुरुआत कुरआन की तिलावत से हुई। उत्तर प्रदेश जमीयत के अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती सैयद मुहम्मद अफ्फान मंसूरपुरी ने तिलावत की, जबकि दारुल उलूम इस्लामिया के विद्यार्थियों ने नात-ए-पाक प्रस्तुत की।

तीन दिवसीय बैठक में संगठन की शैक्षिक, सामाजिक और संगठनात्मक गतिविधियों की समीक्षा के साथ आगामी छह महीनों की कार्ययोजना पर चर्चा हुई। मौलाना महमूद मदनी के संदेश का मुख्य जोर सेवा को प्राथमिकता देने, युवाओं को नेतृत्व के अवसर उपलब्ध कराने और संगठन के काम को गांवों तथा बस्तियों तक पहुंचाने पर रहा।

सम्मेलन में तय किए गए लक्ष्यों की सफलता अब इस बात पर निर्भर करेगी कि प्रांतीय और क्षेत्रीय इकाइयां इन योजनाओं को स्थानीय स्तर पर किस तरह लागू करती हैं और निर्धारित अवधि में कितनी प्रगति दर्ज करती हैं।

सवाल-जवाब

प्रश्न: जमीयत उलमा-ए-हिंद ने छह महीने में कितने नए मक्तब स्थापित किए?

उत्तर: संगठन की प्रस्तुत रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल से अक्टूबर 2026 के दौरान 5,352 नए मक्तब स्थापित किए गए।

प्रश्न: मौलाना महमूद मदनी ने सम्मेलन में क्या संदेश दिया?

उत्तर: उन्होंने देश और समाज की सेवा को प्राथमिकता देने, युवाओं को जिम्मेदारियां सौंपने और नई नेतृत्व पीढ़ी तैयार करने पर जोर दिया।

प्रश्न: जमीयत ने युवाओं और गांवों के लिए क्या लक्ष्य तय किए?

उत्तर: अगले छह महीनों में 9,753 युवाओं को विभाग-ए-रफीक से जोड़ने और 748 अतिरिक्त गांवों को जन विकास सेवा से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया।

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