मदनी परिवार के खिलाफ साजिश या गलती? ओवैस सुलतान खान के जुड़ाव से खड़े हुए सवाल
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मुस्लिम नाउ ब्यूरो विशेष
देश के सबसे बड़े और सबसे पुराने मुस्लिम संगठन जमीयत उलेमा-ए-हिंद, और इसके प्रमुख मौलाना महमूद मदनी और मौलाना अरशद मदनी, हाल के दिनों में कुछ विवादों और घटनाओं के कारण सुर्खियों में हैं. एक ओर, मौलाना महमूद मदनी के एक राष्ट्रवादी पत्रकार के साथ इंटरव्यू , तो दूसरी ओर सीएए विरोधी आंदोलन से जुड़े मुस्लिम युवाओं के खिलाफ अदालत में दिए गए बयान ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं.
इन दोनों घटनाओं से मुस्लिम समुदाय के भीतर गहरा आक्रोश है. खासकर सोशल मीडिया पर. इस बीच, ओवैस सुलतान खान नामक व्यक्ति को जमीयत से जोड़ने का फैसला भी विवाद का बड़ा कारण बन गया है.
मुस्लिम समुदाय के एक वर्ग का मानना है कि मौलाना महमूद मदनी और उनके सहयोगियों के खिलाफ कोई गहरी साजिश रची जा रही है. मौलाना महमूद मदनी ने हाल में एक प्रमुख टीवी चैनल पर एक इंटरव्यू दिया था, जिसमें उन्होंने कुछ ऐसे बयान दिए, जो मुस्लिम समुदाय के एक हिस्से को नागवार गुजरे. उनके द्वारा दिए गए बयान से यह संदेश गया कि वह सरकार और एनआरसी के समर्थन में हैं, जो मुस्लिम समुदाय के हितों के खिलाफ माना जाता है.
इस इंटरव्यू के बाद से मुस्लिम समुदाय के कई लोग उनसे नाराज हो गए हैं और सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ आक्रोश व्यक्त कर रहे हैं.इंटरव्यू के तुरंत बाद एक और विवाद सामने आया, जब सीएए विरोधी आंदोलन में शामिल मुस्लिम युवाओं के खिलाफ अदालत में दिए गए बयान के बाद ओवैस सुलतान खान का नाम उछला.
ओवैस सुलतान खान, जिन्हें मौलाना महमूद मदनी ने अपना सलाहकार नियुक्त किया है, पर आरोप है कि उन्होंने सीएए विरोधी आंदोलन के दौरान कई मुस्लिम युवाओं के खिलाफ झूठी गवाही दी और उन्हें जेल भिजवाने में भूमिका निभाई.

ओवैस सुलतान खान कौन हैं?
ओवैस सुलतान खान एक मानवाधिकार कार्यकर्ता और नीति सलाहकार हैं, जिनका नाम हाल ही में जमीयत उलेमा-ए-हिंद से जोड़ा गया है. उन्हें मौलाना महमूद मदनी का सलाहकार नियुक्त किया गया है. ओवैस ने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कई महत्वपूर्ण संस्थानों और थिंक टैंकों के साथ काम किया है.
उन्होंने दक्षिण एशिया, नॉर्डिक और उत्तरी अफ्रीका के प्रमुख नीति निर्माताओं, राजनेताओं और शिक्षाविदों के साथ भी काम किया है. ओवैस ने दिल्ली विश्वविद्यालय से सामाजिक कार्य में स्नातक और स्नातकोत्तर किया है. मानवाधिकार व अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के क्षेत्र में भी अपनी सेवाएं दी हैं.
हालांकि, ओवैस पर आरोप है कि उन्होंने सीएए विरोधी आंदोलन के दौरान कई मुस्लिम युवाओं के खिलाफ झूठी गवाही दी, जिससे कई निर्दोष मुस्लिम कार्यकर्ताओं और छात्रों को जेल में बंद कर दिया गया. इनमें उमर खालिद, खालिद सैफी, इशरत जहां और गुलअफ्शा जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं.
सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं में आरोप लगाया गया है कि ओवैस सुलतान खान ने सरकारी गवाह के रूप में काम किया और मुस्लिम समुदाय के खिलाफ जासूसी की.
सोशल मीडिया पर आक्रोश
ओवेस सुलतान खान, इस नाम और चेहरे को हर मुसलमान को पहचानना चाहिए। ये वही गद्दार है जिसके झूठी गवाही के कारण कई बेगुनाह नौजवान आज जेलों में कैद हैं। इसने सरकारी गवाह बनकर अपने ही लोगों को बस के नीचे फेंका है। इसके फेसबुक पेज पर देखिए, दूसरों की जिंदगी बर्बाद करके खुद की जिंदगी मजे… pic.twitter.com/NFUnZvlcNP
— ❁ مفاسا🇵🇸 (@Mufasa1O1) October 16, 2024
मौलाना महमूद मदनी और ओवैस सुलतान खान के खिलाफ सोशल मीडिया पर मुस्लिम समुदाय का एक बड़ा वर्ग नाराजगी जाहिर कर रहा है. कुछ लोग मौलाना महमूद मदनी को “सरकारी मौलाना” और “दलाल” कह रहे हैं, तो कुछ लोग उन्हें आरएसएस का समर्थक बता रहे हैं.
🔴 The Real Face of Mahmood Madani and His Advisor Exposed
— Mohd Shadab Khan (@VoxShadabKhan) October 16, 2024
1. Why is there such an uproar against Mahmood Madani, a staunch supporter of nationwide NRC and the so-called ‘government-appointed Maulana’?
🔹People are outright calling him a government agent and broker.
🔹Why has… pic.twitter.com/uGAOC417iq
ट्विटर और एक्स जैसे प्लेटफार्मों पर इन दोनों को लेकर तीखी आलोचना हो रही है. एक यूजर ने लिखा, “ओवैस सुलतान खान, इस नाम और चेहरे को हर मुसलमान को पहचानना चाहिए. ये वही गद्दार है जिसने सरकारी गवाह बनकर अपने ही समुदाय के नौजवानों को जेल में भिजवाया है.”
This guy has been fully trained by American State Departments now, already has track record of giving witness against Caa/Nrc Muslim activists
— An-Nahda (@InternofRevival) October 16, 2024
Working closely with Mahmood Madani & Jamiat Ulema E Hind casts shadows on these organisations and muslim community leaders. https://t.co/olNimoKutY pic.twitter.com/Akcfs5Ub0X
एक अन्य पोस्ट में लिखा गया, “महमूद मदनी और उनके सलाहकार ओवैस सुलतान खान ने मुस्लिम युवाओं के साथ धोखा किया है. ये दोनों सरकार के एजेंट हैं, जो मुस्लिम समुदाय के हितों के खिलाफ काम कर रहे हैं.”
क्या मदनी परिवार के खिलाफ साजिश है?
इन घटनाओं को देखते हुए सवाल उठ रहे हैं कि क्या वास्तव में मौलाना महमूद मदनी और उनके परिवार के खिलाफ कोई साजिश रची जा रही है? क्या मौलाना महमूद मदनी जानबूझकर ऐसे कदम उठा रहे हैं जो मुस्लिम समुदाय के हितों के खिलाफ हों, या फिर उन्हें मजबूर किया जा रहा है?
सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं में यह बात सामने आ रही है कि संभवतः मदनी परिवार और जमीयत उलेमा-ए-हिंद को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है, ताकि उनकी लोकप्रियता और मुस्लिम समुदाय में उनका प्रभाव कम किया जा सके.
नतीजा और संभावनाएं
इस पूरे मामले का नतीजा यह है कि देश के मुसलमानों के एक बड़े वर्ग में मौलाना महमूद मदनी और उनके सहयोगियों के खिलाफ गुस्सा बढ़ता जा रहा है. खासकर ओवैस सुलतान खान के जमीयत से जुड़े होने के कारण मुस्लिम समुदाय के भीतर गहरा आक्रोश है.
यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में मौलाना महमूद मदनी और जमीयत उलेमा-ए-हिंद इस विवाद को कैसे संभालते हैं और अपने ऊपर लगे आरोपों का क्या जवाब देते हैं.यह भी सवाल उठता है कि क्या यह केवल एक संयोग है, या फिर इसके पीछे कोई गहरी साजिश है? क्या मदनी परिवार के खिलाफ यह विवाद उनकी राजनीतिक और धार्मिक शक्ति को कमजोर करने का एक प्रयास है?
फिलहाल, मुस्लिम समुदाय में इस मामले को लेकर गंभीर चिंता और आक्रोश है, और यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जमीयत और उसके नेता इस विवाद से कैसे निपटते हैं.