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अमेरिका के युद्धपोतों पर ईरान का मिसाइल हमला, बढ़ा तनाव

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मुस्लिम नाउ ब्यूरो, तेहरान, दुबई

पश्चिम एशिया में जारी छह महीने के सैन्य संघर्ष के बीच एक बेहद खतरनाक मोड़ सामने आया है। ईरान अब केवल व्यापारिक जहाजों को रोकने तक सीमित नहीं है। उसने सीधे अमेरिकी नौसेना के सबसे बड़े युद्धपोतों और विमान वाहक जहाजों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। पिछले एक हफ्ते में कम से कम तीन बार ईरानी बलों ने अमेरिकी युद्धपोतों पर आधुनिक मिसाइलें दागी हैं। इन हमलों में मिसाइलें अमेरिकी जहाजों के बेहद करीब से गुजरी हैं। अमेरिका की सेन्ट्रल कमान ने दावा किया है कि उसके युद्धपोतों ने इन हमलों को हवा में ही नाकाम कर दिया। इसके बावजूद वाशिंगटन के रक्षा विशेषज्ञों की चिंता तेजी से बढ़ रही है। अमेरिका को डर है कि समुद्र में चलते हुए जहाजों को ट्रैक करने और उन्हें सटीक निशाना बनाने की ईरान की क्षमता पहले से काफी बेहतर हो चुकी है।

त्वरित सारांश और मुख्य बिंदु

  1. पिछले एक सप्ताह में ईरान ने अमेरिकी युद्धपोतों पर तीन से अधिक मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं।
  2. हालिया हमलों में ईरान ने हवा में अपनी दिशा बदलने में सक्षम वारहेड वाली मिसाइलों का प्रयोग किया है।
  3. ईरान ने कासिम बसीर नामक नई बैलिस्टिक मिसाइल को सामने रखा है जो चलते हुए जहाजों पर सटीक वार कर सकती है।
  4. अमेरिकी अधिकारी जांच कर रहे हैं कि क्या ईरान को जहाजों की लाइव लोकेशन के लिए किसी बाहरी देश से सैटेलाइट मदद मिल रही है।
  5. अमेरिकी नौसेना की आर्थिक नाकाबंदी के कारण ईरान का तेल निर्यात बुरी तरह प्रभावित हुआ है और उसकी अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा है।
  6. अमेरिका ने ईरान के मिसाइल हमलों के जवाब में उसके तेल टैंकरों पर हमले शुरू कर दिए हैं जिससे विवाद और गहरा गया है।

होर्मुज की जलसंधि में अमेरिकी बेड़े पर मंडराता खतरा

होर्मुज की जलसंधि दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्ग है। इस संकरे रास्ते से दुनिया के कुल कच्चे तेल का बहुत बड़ा हिस्सा गुजरता है। छह महीनों से जारी इस संघर्ष में ईरान ने इस पूरे इलाके में अपनी सैन्य पकड़ मजबूत करने की कोशिश की है। शुरुआत में ईरान केवल इस रास्ते से गुजरने वाले मर्चेंट जहाजों को रोकता था।

अब ईरान की रणनीति में बड़ा बदलाव देखा जा रहा है। वह सीधे अमेरिकी नौसेना के बड़े बेड़ों पर घातक हमले कर रहा है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी अधिकारियों ने स्वीकार किया है कि हाल के हमले पहले की तुलना में बहुत अधिक सटीक थे।

अगर कोई मिसाइल अमेरिकी विमान वाहक पोत को नुकसान पहुंचाती है तो यह पूरे क्षेत्र को सीधे महायुद्ध में धकेल सकती है। इसके बावजूद ईरान यह बड़ा खतरा मोल ले रहा है।

हवा में दिशा बदलने वाली मिसाइलों का बढ़ा प्रयोग

इस पूरे विवाद में सबसे बड़ा बदलाव ईरान द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे आधुनिक हथियार हैं। रक्षा विश्लेषकों के अनुसार ईरान अब पारंपरिक बैलिस्टिक मिसाइलों की जगह नए गाइडेंस सिस्टम वाले हथियारों का इस्तेमाल कर रहा है।

पारंपरिक बैलिस्टिक मिसाइल एक निश्चित रास्ते पर ही आगे बढ़ती है। अगर निशाना अपनी जगह से हट जाता है तो मिसाइल चूक जाती है। लेकिन ईरान अब ऐसे वारहेड का प्रयोग कर रहा है जो उड़ान के दौरान भी अपनी दिशा बदल सकते हैं।

ईरान ने हाल ही में कासिम बसीर नाम की बैलिस्टिक मिसाइल का प्रदर्शन किया था। ईरान का दावा है कि यह मिसाइल समुद्र में चलते हुए जहाजों को खोजकर उन पर सटीक हमला कर सकती है। हालांकि अभी यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं है कि हर हमले में इसी मिसाइल का उपयोग हुआ है। लेकिन इसमें कोई शक नहीं है कि ईरान की मिसाइल तकनीक में तेजी से सुधार हुआ है।

समुद्र में चलते युद्धपोत को निशाना बनाने की तकनीक

किसी भी सेना के लिए समुद्र में तैरते हुए और लगातार गति बदल रहे युद्धपोत को निशाना बनाना बहुत मुश्किल काम माना जाता है। इसके लिए मिसाइल दागने के बाद भी जहाज की नई लोकेशन की लगातार जानकारी चाहिए होती है।

सवाल यह उठता है कि ईरान को समुद्र के बीचों बीच अमेरिकी जहाजों की सटीक लोकेशन कैसे मिल रही है। अमेरिकी खुफिया एजेंसियां इस बात की गहन जांच कर रही हैं। वे यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या ईरान को रूस या चीन जैसे देशों से सैटेलाइट या सर्विलांस की मदद मिल रही है।

यदि किसी बाहरी महाशक्ति की मदद से ईरान को अमेरिकी बेड़े की लोकेशन मिल रही है तो यह अमेरिका के लिए बहुत गंभीर चुनौती बन सकती है। इससे फारस की खाड़ी में तैनात सभी अमेरिकी जहाजों का जोखिम कई गुना बढ़ जाएगा।

ईरान का आर्थिक संकट और रणनीतिक मजबूरी

ईरान इतने बड़े खतरे उठाने के लिए क्यों तैयार है। इसका सीधा जवाब ईरान की गिरती हुई अर्थव्यवस्था से जुड़ा है। अमेरिका ने ईरान की चौतरफा घेराबंदी कर रखी है। अमेरिकी नौसेना ने ईरान के समुद्री रास्तों को ब्लॉक कर दिया है।

इस नाकाबंदी के कारण ईरान अपने कच्चे तेल का निर्यात नहीं कर पा रहा है। तेल का निर्यात रुकने से ईरान को विदेशी मुद्रा नहीं मिल रही है। देश में महंगाई बहुत ऊपर पहुंच चुकी है और ईरानी रियाल का मूल्य तेजी से गिरा है।

ईरान के पास खोने के लिए बहुत कम बचा है। पूर्व अमेरिकी कूटनीतिज्ञ मार्क सीवर्स का कहना है कि ईरान के पास कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है। इसलिए वह युद्ध का दायरा बढ़ा रहा है।

ईरान का मकसद अमेरिकी नौसेना को पूरी तरह हराना नहीं है। वह केवल इस युद्ध को अमेरिका के लिए इतना महंगा और जोखिम भरा बनाना चाहता है कि वाशिंगटन पीछे हटने पर मजबूर हो जाए।

टैंकर के बदले युद्धपोत और कूटनीतिक तनाव

अमेरिका ने भी ईरान को स्पष्ट शब्दों में कड़ा संदेश दिया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने साफ कहा है कि अमेरिकी जहाजों पर हर एक मिसाइल हमले का बदला ईरान के तेल टैंकरों को तबाह करके लिया जाएगा।

इसके बाद अमेरिका ने ईरानी तेल टैंकरों पर हमले शुरू कर दिए हैं। जवाब में ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने भी होर्मुज में 10 और जहाजों को निशाना बनाने का दावा किया है। साथ ही ईरान ने जोर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर भी मिसाइलें दागी हैं।

इस तरह हमलों का एक खतरनाक चक्र शुरू हो चुका है। ईरान अमेरिकी युद्धपोतों पर हमला करता है। अमेरिका जवाब में ईरानी तेल टैंकरों को डुबोता है। फिर ईरान अधिक आक्रामक होकर नए ठिकानों को निशाना बनाता है।

अमेरिका में दो महीने बाद मिडटर्म चुनाव होने वाले हैं। ऐसे समय में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने बड़ी चुनौती है। अगर कोई अमेरिकी जहाज दुर्घटनाग्रस्त होता है तो ट्रंप पर भारी सैन्य कार्रवाई का दबाव बनेगा। दूसरी ओर सीमित कार्रवाई करने पर उन्हें राजनीतिक रूप से कमजोर माना जाएगा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

1. ईरान ने अमेरिकी युद्धपोतों पर किन मिसाइलों से हमला किया है?

ईरान ने हवा में अपनी दिशा बदलने में सक्षम वारहेड वाली मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों का प्रयोग किया है। इनमें कासिम बसीर जैसी आधुनिक मिसाइलें शामिल हैं।

2. समुद्र में चलते युद्धपोत पर हमला करना क्यों कठिन होता है?

क्योंकि युद्धपोत समुद्र में लगातार अपनी जगह बदलते रहते हैं। ऐसे में मिसाइल को लक्ष्य तक पहुंचाने के लिए सैटेलाइट या रडार से जहाज की बिल्कुल सटीक और लाइव लोकेशन चाहिए होती है।

3. ईरान अमेरिका के साथ इतना बड़ा जोखिम क्यों ले रहा है?

अमेरिकी नौसेना की समुद्री नाकाबंदी के कारण ईरान का तेल निर्यात ठप हो गया है। आर्थिक तंगी से निपटने और अमेरिका पर दबाव बनाने के लिए ईरान इस संघर्ष को महंगा बना रहा है।

4. अमेरिका ने ईरान के मिसाइल हमलों का क्या जवाब दिया है?

अमेरिका ने जवाबी कार्रवाई करते हुए ईरान के कच्चे तेल के टैंकरों पर हमले तेज कर दिए हैं। अमेरिका का कहना है कि युद्धपोत पर हमले की कीमत ईरान को अपने तेल टैंकर गंवाकर चुकानी होगी।

5. होर्मुज की जलसंधि इस युद्ध में क्यों इतनी महत्वपूर्ण है?

होर्मुज की जलसंधि दुनिया का सबसे बड़ा तेल परिवहन मार्ग है। इस रास्ते पर कब्जा या रुकावट पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था और कच्चे तेल की कीमतों को प्रभावित कर सकती है।

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