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जमीयत उलेमा-ए-हिंद की अपील: मुस्लिम बच्चे सूर्य नमस्कार से करें परहेज , भाजपा का विरोध

मुस्लिम नाउ ब्यूरो,नई दिल्ली

केंद्र की सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी मुस्लिमांे पर सूर्य नमस्कार,सरस्वती वंदना ‘थोपने’ के पक्ष में है. जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने जब इसका विरोध किया तो इसे अलगाववाद की स्थिति बता दिया. जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने मुस्लिम छात्रों से सरस्वती वंदना और सूर्य नमस्कार न करने की अपील की है. इस पर भाजपा ने कहा है कि सौहार्द बिगाड़ने के लिए ऐसा प्रस्ताव पारित करना दुर्भाग्यपूर्ण है.

  • जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने मुस्लिम छात्रों से सरस्वती वंदना और सूर्य नमस्कार न करने की अपील की.
  • भाजपा ने जमीयत के प्रस्ताव को सौहार्द बिगाड़ने वाला और दुर्भाग्यपूर्ण बताया.
  • जमीयत का तर्क: ऐसी किसी भी गतिविधि का हिस्सा न बनें जो उनके मजहब के खिलाफ है.
  • भाजपा नेता दुष्यंत कुमार गौतम ने कहा, यह अलगाववादी स्थिति देश के लिए खतरनाक है.
  • सपा प्रवक्ता ने कहा, हर किसी को धार्मिक आजादी है और किसी को बाध्य नहीं किया जा सकता.
  • जमात-ए-इस्लामी-हिंद के उपाध्यक्ष ने कहा, सूर्य नमस्कार थोपना संविधान विरोधी है.
  • मौलाना सूफियान ने जमीयत के प्रस्ताव को सही ठहराया और कहा, यह मजहब के अनुरूप है.

नई दिल्ली स्थित मुख्यालय में जमीयत उलेमा-ए-हिंद की प्रबंधन समिति के दो दिवसीय अधिवेशन के अंतिम दिन सरस्वती वंदना, धार्मिक गीत और सूर्य नमस्कार न करने संबंधित प्रस्ताव पारित किया गया था, जिसमें अभिभावकों से आग्रह किया गया कि ऐसी किसी भी गतिविधि का हिस्सा अपने बच्चों का न बनने दें जो उनके मजहब के खिलाफ है.

जमीयत के इस प्रस्ताव ने देश में एक नई बहस छेड़ दी है. सपा ने मुस्लिम संगठन की बात से इत्तेफाक रखा है तो भाजपा ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया है.भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री दुष्यंत कुमार गौतम ने इस पर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा, जमीयत ए उलेमा जो कर रही है वो दुर्भाग्यपूर्ण है.

आप अपनी संस्कृति अपने मदरसों में पढ़ाएं,लेकिन देश, देश के हिसाब से चलता है. शिक्षा नीति के हिसाब से चलता है. कहां लिखा है कि आप सूर्य नमस्कार नहीं करेंगे, योग नहीं करेंगे? ये तो स्वस्थ शरीर के लिए होता है. सूर्य नमस्कार नहीं कर रहे तो सूर्य की किरणों को भी स्वीकार न करो.

उन्होंने आगे कहा, जो अलगाववाद वाली स्थिति पैदा कर रहे हैं, देश के लिए खतरनाक है. इन लोगों के एजेंडे कभी भी पूरे नहीं होने वाले हैं. हम विकसित और सफल भारत की ओर बढ़ रहे हैं. जनता हमारा साथ दे रही है.

भाजपा प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने भी इसे सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने वाला बयान बताया. उन्होंने कहा, कुछ लोग ऐसे है जो शैक्षिक परिसरों का सौहार्द बिगाड़ने के लिए ऐसे बयान देते हैं. जो पहले से रीति रिवाज और अनुशासन चल रहे हैं, उसी के अनुसार सब कुछ चलना चाहिए, इस पर राजनीति नही करनी चाहिए.

वहीं, सपा प्रवक्ता फकरूल हसन चांद ने कहा, सबसे पहले आपको समझना होगा कि हर किसी को धार्मिक आजादी है. किसी के धर्म में सूर्य नमस्कार नहीं है तो आप उसे बाध्य नहीं कर सकते. हालांकि, इसके लिए सभी धर्मों में अन्य विकल्प सुझाए गए हैं. अगर कोई वो नहीं कर सकता तो कोई और आसन कर सकता है.

उन्होंने आगे कहा- ऐसे मुद्दे पहले भी उठे हैं, लेकिन ये कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं है. समाजवादी पार्टी भी इस मुद्दे को राजनीतिक नहीं बनाना चाहती है.

इस मुद्दे पर जमात-ए-इस्लामी-हिंद के उपाध्यक्ष प्रोफेसर सलीम इंजीनियर ने कहा, ये नया मसला नहीं है. पहले ऐसे मसले लाते रहे गए हैं. स्टेट गवर्नमेंट्स इस प्रकार के मसले उठाती रही हैं. हम हमेशा कहते रहे हैं कि किसी की आस्था के खिलाफ कोई चीज थोपना संविधान विरोधी है. संविधान अपनी आस्था और विश्वास और मजहब के प्रति अमल करने की आजादी देता है. योग के नाम पर सूर्य नमस्कार थोपना गलत है.

लखनऊ ईदगाह के मौलाना सूफियान का बयान भी सामने आया है. जमीयत के प्रस्ताव पर सहमति जताते हुए उन्होंने कहा, जमीयत ने कोई नई बात नहीं की है. हमारे संविधान ने अधिकार दिया है कि हम अपने मजहब में स्वतंत्र हैं. हम किसी और की इबादत न करें, ये हमारे मजहब ने बताया है. जो लोग करते हैं वो करें लेकिन मजहब ए इस्लाम की तरफ से लोगों से गुजारिश है कि वो अपने धर्म का पालन करें. अपने इस्लाम की इबादत करें जो जमीयत की अपील है वो सही है और हम इससे सहमत हैं.

इसके अलावा, नए कानूनों ने पुलिस को 60 से 90 दिनों की अवधि के दौरान कभी भी 15 दिनों तक की हिरासत का अनुरोध करने की अनुमति दी. इससे लंबे समय तक हिरासत में रहना और सत्ता का दुरुपयोग हो सकता है, जिससे नागरिक स्वतंत्रता कमज़ोर हो सकती है.ऐसा प्रतीत होता है कि नए कानून एक “पुलिस राज्य” की ओर ले जा सकते हैं जहाँ “जेल नियम बन जाएगा” और “जमानत अपवाद”.खान ने बताया कि एपीसीआर कानून के विभिन्न कठोर हिस्सों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगा.

एपीसीआर सचिव ने हाल ही में हुए लोकसभा चुनावों के बाद देश के विभिन्न क्षेत्रों में मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाकर सांप्रदायिक हिंसा, लिंचिंग की घटनाओं और तोड़फोड़ में खतरनाक वृद्धि पर भी गहरी चिंता व्यक्त की. उन्होंने एपीसीआर की एक संक्षिप्त रिपोर्ट पेश की, जिसमें चुनाव के बाद मुस्लिम समुदाय के खिलाफ विभिन्न घृणा अपराधों और लक्षित हत्याओं पर नज़र रखी गई.

खान ने इस बात पर ज़ोर दिया कि भाजपा और कांग्रेस दोनों ही विभिन्न राज्य सरकारों को हिंसा के इन जघन्य कृत्यों के खिलाफ़ कड़ा रुख़ अपनाना चाहिए और हर नागरिक की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए. उन्होंने इंडिया गठबंधन के सांसदों और विपक्ष के सांसदों से संसद में इन चिंताओं को दृढ़ता से संबोधित करने का आह्वान किया.

प्रो. सलीम इंजीनियर ने NEET (UG) 2024 परीक्षा को लेकर लगे आरोपों और विवादों पर गहरी चिंता व्यक्त की. उन्होंने कहा कि पेपर लीक के आरोप गंभीर हैं और सच्चाई को उजागर करने और परीक्षा प्रक्रिया की अखंडता सुनिश्चित करने के लिए गहन जांच की आवश्यकता है. NEET संकट ने छात्रों के लिए काफी तनाव पैदा किया है और परीक्षा प्रणाली में उनके विश्वास को गंभीर रूप से कम कर दिया है.