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मोहम्मद अरबाश: मणिपुर से निकला वह सितारा जिसने भारत को एशियन कप में पहुंचाया

गुलरूख जहीन

भारतीय फुटबॉल के लिए 6 सितंबर 2026 की शाम लंबे समय तक याद रखी जाएगी। ताशकंद के डोस्तलिक स्टेडियम में भारत की अंडर 20 टीम ने बांग्लादेश को 3 गोल से हराया। इस जीत के साथ भारत ने करीब दो दशक बाद एएफसी अंडर 20 एशियन कप के मुख्य दौर में जगह बनाई। इस ऐतिहासिक जीत में डैनी मेइतेई लैशराम और विशाल यादव ने गोल किए। लेकिन मैच का आखिरी अध्याय लिखने वाले खिलाड़ी का नाम था मोहम्मद अरबाश।

79वें मिनट में मैदान पर उतरने वाले अरबाश ने कुछ ही मिनट में अपना असर दिखा दिया। उन्होंने बांग्लादेश के डिफेंस को चीरते हुए बाएं पैर से जोरदार शॉट लगाया। गेंद सीधे नेट की छत में जा पहुंची। स्कोर 3 से 0 हो गया। इसके बाद भारत की जीत पर किसी तरह का सवाल नहीं बचा।

लेकिन मोहम्मद अरबाश की कहानी इस एक गोल से शुरू नहीं होती। यह कहानी मणिपुर की फुटबॉल संस्कृति, एक युवा खिलाड़ी की मेहनत और भारतीय फुटबॉल में तेजी से उभरती नई प्रतिभा की कहानी है।

कौन हैं मोहम्मद अरबाश?

मोहम्मद अरबाश का जन्म 29 सितंबर 2008 को मणिपुर में हुआ। वह अभी 17 वर्ष के हैं। उनका मुख्य स्थान सेंट्रल मिडफील्ड है। क्लब स्तर पर वह बेंगलुरु एफसी से जुड़े हैं और बेंगलुरु एफसी की रिजर्व और युवा व्यवस्था में खेल चुके हैं। उपलब्ध खिलाड़ी रिकॉर्ड के अनुसार वह जुलाई 2025 में बेंगलुरु एफसी से जुड़े और उनका अनुबंध मई 2027 तक दर्ज है।

अरबाश की शुरुआती फुटबॉल पहचान मणिपुर की क्लासिक फुटबॉल अकादमी से बनी। इसी अकादमी ने उन्हें कम उम्र में प्रतिस्पर्धी फुटबॉल का अनुभव दिया। एआईएफएफ के रिकॉर्ड में भी अरबाश का नाम क्लासिक फुटबॉल अकादमी के युवा खिलाड़ी के तौर पर सामने आता है। 2023 में वह हीरो अंडर 17 यूथ कप के सेमीफाइनल में क्लासिक फुटबॉल अकादमी की ओर से गोल करने वाले खिलाड़ियों में शामिल थे।

मणिपुर भारतीय फुटबॉल को लगातार प्रतिभाशाली खिलाड़ी देता रहा है। अरबाश भी उसी फुटबॉल परंपरा की नई कड़ी हैं।

2023 में ही दिखा था अरबाश का हुनर

अरबाश का नाम अचानक 2026 में चर्चा में नहीं आया। वह काफी कम उम्र से राष्ट्रीय स्तर के फुटबॉल पर्यवेक्षकों की नजर में रहे हैं।

2023 में भारत ने एसएएफएफ अंडर 16 चैंपियनशिप जीती थी। उस टीम में मणिपुर के कई युवा खिलाड़ी शामिल थे। अरबाश भी उनमें से एक थे। उस समय उन्हें टूर्नामेंट के सबसे प्रभावी युवा खिलाड़ियों में गिना गया। एक रिपोर्ट के मुताबिक वह उस प्रतियोगिता में मोस्ट वैल्यूएबल प्लेयर और टॉप स्कोरर रहे थे।

यही वह दौर था जब अरबाश के खेल में एक खास बात दिखाई देने लगी थी। वह केवल गोल करने वाले खिलाड़ी नहीं थे। वह मिडफील्ड से खेल को नियंत्रित करने, गेंद को आगे पहुंचाने और सेट पीस में खतरा पैदा करने की क्षमता रखते थे।

उनके खेल की यही बहुमुखी प्रतिभा आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी ताकत बनी।

क्लासिक फुटबॉल अकादमी से बेंगलुरु एफसी तक

अरबाश के करियर में क्लासिक फुटबॉल अकादमी की भूमिका अहम रही है। मणिपुर की यह अकादमी कई युवा फुटबॉलरों को तैयार कर चुकी है। अरबाश ने इसी व्यवस्था में अंडर 17 और अंडर 21 स्तर पर खेलते हुए अपना खेल विकसित किया।

इसके बाद उनका अगला बड़ा पड़ाव बेंगलुरु एफसी बना। खिलाड़ी रिकॉर्ड में उन्हें बेंगलुरु एफसी की युवा टीम और रिजर्व सेटअप से जोड़ा गया है। उन्हें क्लब में 48 नंबर की जर्सी भी मिली थी, जबकि बेंगलुरु एफसी अंडर 21 टीम में वह 10 नंबर की जर्सी के साथ दर्ज हैं।

बेंगलुरु एफसी जैसे क्लब की युवा व्यवस्था में पहुंचना उनके करियर के लिए बड़ा कदम था। यहां उन्हें बेहतर प्रशिक्षण, मजबूत प्रतियोगिता और उच्च स्तर के खिलाड़ियों के साथ सीखने का अवसर मिला।

2025 और 2026 के दौरान उनके नाम भारतीय डेवलपमेंट लीग से जुड़ी उपलब्धियां भी दर्ज हुईं। खिलाड़ी रिकॉर्ड में उनके खाते में एक इंडियन डेवलपमेंट लीग खिताब और अंडर 20 दक्षिण एशियाई चैंपियन का सम्मान दर्ज है।

अरबाश की सबसे बड़ी ताकत क्या है?

मोहम्मद अरबाश को मुख्य रूप से मिडफील्डर के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन उनका खेल सिर्फ मिडफील्ड तक सीमित नहीं रहता।

वह आक्रमण में तेजी से शामिल होते हैं। गेंद को आगे ले जाने की कोशिश करते हैं। सेट पीस लेने की क्षमता भी उनके खेल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है। भारतीय युवा फुटबॉल पर नजर रखने वाली एक रिपोर्ट ने उन्हें मणिपुर की क्लासिक फुटबॉल अकादमी का उत्पाद बताते हुए उनकी तकनीकी गुणवत्ता और सेट पीस क्षमता की खास तौर पर चर्चा की थी।

उनका बाएं पैर का शॉट भी उनकी खासियत है। बांग्लादेश के खिलाफ 79वें मिनट में किया गया गोल इसका ताजा उदाहरण है।

इस गोल में केवल ताकत नहीं थी। टाइमिंग भी थी। भारत ने छोटे छोटे पासों के जरिए बांग्लादेश की रक्षापंक्ति को खोला। अरबाश ने सही जगह खुद को तैयार रखा। मौका मिला तो उन्होंने बिना ज्यादा समय गंवाए गेंद को गोल में पहुंचा दिया।

बांग्लादेश के खिलाफ वह ऐतिहासिक गोल

भारत और बांग्लादेश के बीच मुकाबला 6 सितंबर को ताशकंद में खेला गया। भारत के लिए डैनी मेइतेई लैशराम ने 25वें मिनट में पहला गोल किया। दूसरे हाफ में विशाल यादव ने 60वें मिनट में शानदार एक्रोबैटिक फिनिश के साथ भारत की बढ़त 2 से 0 कर दी।

72वें मिनट में भारतीय कोच महेश गवली ने डैनी की जगह मोहम्मद अरबाश को मैदान पर उतारा। अरबाश को प्रभाव छोड़ने में ज्यादा समय नहीं लगा।

79वें मिनट में याइफारेम्बा चिंगाकहाम से शुरू हुए मूव के बाद भारत ने लगातार पास खेले। गेंद अरबाश तक पहुंची। उन्होंने बाएं पैर से जोरदार शॉट लगाया। गेंद गोलकीपर को पछाड़ती हुई नेट की छत में जा लगी।

भारत 3 से 0 आगे था।

यही गोल आखिरकार भारत की ऐतिहासिक जीत की पहचान बन गया।

भारत ने 20 साल बाद कैसे किया क्वालीफाई?

बांग्लादेश के खिलाफ जीत से भारत के खाते में तीन मैचों से छह अंक हो गए। ग्रुप बी में उज्बेकिस्तान नौ अंकों के साथ पहले स्थान पर रहा। भारत दूसरे स्थान पर रहा।

इसके बाद उज्बेकिस्तान ने सीरिया को 3 से 0 से हराया। इस परिणाम ने भारत की स्थिति साफ कर दी। भारत आठ क्वालीफाइंग समूहों के सात सर्वश्रेष्ठ दूसरे स्थान पर रहने वाले देशों में शामिल हुआ और एएफसी अंडर 20 एशियन कप चीन 2027 के लिए क्वालीफाई कर गया।

भारत ने आखिरी बार 2006 में इस प्रतियोगिता के मुख्य दौर में हिस्सा लिया था। इस लिहाज से यह वापसी भारतीय युवा फुटबॉल के लिए बड़ी उपलब्धि है।

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क्या अरबाश का परिवार भी फुटबॉल से जुड़ा है?

मोहम्मद अरबाश के परिवार और माता पिता की पेशेवर पृष्ठभूमि से जुड़ी विस्तृत और पुष्ट जानकारी सार्वजनिक रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं है। इसलिए उनके परिवार के बारे में किसी तरह का अनुमान लगाना उचित नहीं होगा।

इतना जरूर स्पष्ट है कि उनका फुटबॉल सफर मणिपुर से शुरू हुआ। क्लासिक फुटबॉल अकादमी ने उनके शुरुआती विकास में अहम भूमिका निभाई। इसके बाद बेंगलुरु एफसी ने उन्हें अपने युवा ढांचे में आगे बढ़ने का अवसर दिया।

राष्ट्रीय टीम में अरबाश का सफर

अरबाश ने कम उम्र में ही भारत की अलग अलग आयु वर्ग की टीमों का प्रतिनिधित्व किया। उनके रिकॉर्ड में भारत अंडर 16, भारत अंडर 17, भारत अंडर 19 और भारत अंडर 20 का सफर दर्ज है।

भारत अंडर 20 स्तर पर भी वह गोल कर चुके हैं। दक्षिण एशियाई प्रतियोगिता में उनके प्रदर्शन ने उनकी पहचान को और मजबूत किया। उपलब्ध रिकॉर्ड में उन्हें भारत अंडर 19 के साथ अंडर 20 दक्षिण एशियाई चैंपियनशिप से भी जोड़ा गया है।

अब एएफसी अंडर 20 एशियन कप में उनके नाम एक महत्वपूर्ण गोल भी दर्ज हो चुका है।

आगे की राह आसान नहीं होगी

एक गोल किसी खिलाड़ी को स्टार बना सकता है। लेकिन स्टार बने रहने के लिए लगातार प्रदर्शन करना पड़ता है।

अरबाश अभी केवल 17 साल के हैं। इसलिए उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती निरंतरता की होगी। उन्हें शारीरिक मजबूती पर काम करना होगा। बड़े स्तर के खिलाड़ियों के खिलाफ खेलते हुए निर्णय लेने की क्षमता और बेहतर करनी होगी।

उनके लिए बेंगलुरु एफसी की युवा व्यवस्था एक महत्वपूर्ण मंच है। यहां से वह धीरे धीरे वरिष्ठ स्तर की फुटबॉल में अपनी जगह मजबूत कर सकते हैं।

भारत के लिए भी अरबाश जैसे खिलाड़ियों का विकास बेहद महत्वपूर्ण है। देश ने लंबे इंतजार के बाद एएफसी अंडर 20 एशियन कप में जगह बनाई है। अब अगला सवाल सिर्फ क्वालीफाई करने का नहीं है। सवाल यह है कि भारत चीन में कितना आगे जाता है।

एएफसी अंडर 20 एशियन कप चीन 2027 का आयोजन 24 मार्च से 10 अप्रैल 2027 तक होना है। इस प्रतियोगिता के शीर्ष चार स्थान हासिल करने वाली टीमें फीफा अंडर 20 विश्व कप 2027 के लिए भी क्वालीफाई करेंगी।

ऐसे में मोहम्मद अरबाश की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो सकती है।

मणिपुर से भारतीय फुटबॉल के अगले सितारे तक

मोहम्मद अरबाश की कहानी अभी शुरुआती दौर में है। लेकिन अब उनका नाम सिर्फ मणिपुर या भारतीय युवा फुटबॉल तक सीमित नहीं रहा।

ताशकंद में बांग्लादेश के खिलाफ किया गया गोल उन्हें एक बड़ी कहानी का हिस्सा बना चुका है।

भारत ने 20 साल बाद एएफसी अंडर 20 एशियन कप में वापसी की है। उस वापसी में एक 17 वर्षीय मिडफील्डर ने भी अपनी छाप छोड़ी है।

नाम है मोहम्मद अरबाश।

मणिपुर से निकला यह युवा खिलाड़ी अभी मंजिल से काफी दूर है। लेकिन अगर उसकी मेहनत, तकनीक और आत्मविश्वास इसी तरह आगे बढ़ते रहे तो आने वाले वर्षों में भारतीय फुटबॉल में उसका नाम और ज्यादा सुनाई दे सकता है।

सीधा जवाब: मोहम्मद अरबाश 17 वर्षीय भारतीय फुटबॉलर हैं। उनका जन्म मणिपुर में हुआ है। वह मुख्य रूप से सेंट्रल मिडफील्डर हैं। उन्होंने क्लासिक फुटबॉल अकादमी से अपना शुरुआती विकास किया और बाद में बेंगलुरु एफसी की युवा व्यवस्था से जुड़े। 6 सितंबर 2026 को बांग्लादेश के खिलाफ उनका गोल भारत की एएफसी अंडर 20 एशियन कप 2027 में वापसी के यादगार क्षणों में शामिल हो गया।

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