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नागपुर में मुस्लिम समाज की तालीमी गश्त, घर घर शिक्षा की अलख

मुस्लिम नाउ ब्यूरो, नागपुर ( महाराष्ट्र)

महाराष्ट्र के नागपुर और यवतमाल में मुस्लिम समाज के बीच शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए एक अनोखी मुहिम तेजी से फल फूल रही है। सामाजिक संस्था सेवा यानी एसईडब्ल्यूए ने मुस्लिम बच्चों को उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रति जागरूक करने के लिए तालीमी गश्त अभियान को नया रूप दिया है। तब्लीगी जमात की तर्ज पर चलने वाले इस अभियान में संस्था के वालंटियर रविवार के दिन घर घर जाकर अभिभावकों और बच्चों से सीधे संवाद करते हैं।

इस अभियान का मुख्य उद्देश्य गरीब और पिछड़े मुस्लिम परिवारों के बच्चों को सही मार्गदर्शन देना है। साथ ही समाज के साधन संपन्न लोगों को इन बच्चों की मदद के लिए जोड़ना है। 2014 से शुरू हुआ यह सिलसिला अब तीन दिवसीय तालीमी कारवां और कोचिंग क्लास स्थापित करने तक पहुंच गया है।

मुख्य बिंदु और त्वरित सारांश

  • नागपुर और यवतमाल में सेवा संस्था द्वारा तालीमी गश्त नाम से घर घर शैक्षिक जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है।
  • इस मुहिम में 75 वर्ष से अधिक उम्र के सेवानिवृत्त इंजीनियर और बुजुर्ग पेशेवर हर रविवार को बस्तियों में जाते हैं।
  • तालीमी गश्त का उद्देश्य मुस्लिम बच्चों को स्कूल, कॉलेज और प्रतियोगी परीक्षाओं में आगे बढ़ाना है।
  • एक दिन और तीन दिन के तालीमी कारवां के जरिए ग्रामीण इलाकों और तहसीलों में भी संपर्क किया जा रहा है।
  • 30 अगस्त 2026 को संघर्ष नगर और तबरेज नगर में विशेष अभियान चलाकर ट्यूशन सेंटर खोलने की योजना बनाई गई।
  • सोशल मीडिया और यूट्यूब रील्स के जरिए भी युवाओं और अभिभावकों को इस अभियान से जोड़ा जा रहा है।

क्या है तालीमी गश्त और सेवा संस्था का मॉडल

तब्लीगी जमात की गश्त प्रक्रिया में धर्म और परलोक की बातें प्रमुख होती हैं। इसी मॉडल को अपनाकर सेवा संस्था ने इसे तालीमी बेदारी यानी शैक्षिक जागरूकता का माध्यम बनाया है। संस्था के प्रतिनिधि मस्जिदों और मोहल्लों में जाकर लोगों से मिलते हैं। वे सीधे अभिभावकों से बच्चों की पढ़ाई, उनकी समस्याओं और उनके भविष्य के सपनों पर बात करते हैं।

सेवा के राष्ट्रीय सचिव निजामुद्दीन शेख का कहना है कि घर घर तालीमी बेदारी गश्त इस संगठन की आत्मा है। वर्ष 2014 से यह प्रक्रिया लगातार चल रही है। शुरुआत में केवल रविवार को बस्तियों का दौरा किया जाता था। अब इसे बढ़ाकर तीन दिन की तालीमी जमात या कारवां का रूप दे दिया गया है।

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इस तीन दिवसीय कारवां में चार से पांच सदस्यों की टीम किसी तहसील के दूर दराज गांवों में रुकती है। वहां मस्जिदों के जिम्मेदारों से लेकर आम लोगों तक से आधुनिक शिक्षा पर संवाद किया जाता है। स्थानीय स्कूलों और कॉलेजों में छात्रों के लिए विशेष मार्गदर्शन व्याख्यान भी आयोजित किए जाते हैं।

नागपुर में बुजुर्ग इंजीनियरों की मिसाल

नागपुर में चल रहे इस काम की सबसे बड़ी खासियत यहां की जमीनी टीम है। नागपुर में इस तालीमी गश्त की कमान 75 साल से अधिक उम्र के बुजुर्ग संभाल रहे हैं। ये सभी साथी रिटायर्ड इंजीनियर और वरिष्ठ अधिकारी हैं।

अपनी ढलती उम्र और सेहत की परवाह किए बिना यह बुजुर्ग टीम हर रविवार को नागपुर की पिछड़ी बस्तियों में पैदल घूमकर बच्चों का हालचाल लेती है। वे अभिभावकों को समझाते हैं कि बच्चों की पढ़ाई बीच में न छुड़वाएं।

आयोजकों का मानना है कि जब 75 साल से अधिक उम्र के बुजुर्ग हर हफ्ते सड़कों पर निकल सकते हैं, तो देश के बाकी कस्बों और जिलों में युवा और सक्षम लोग यह काम क्यों नहीं कर सकते। इस अभियान से जुड़ने वाले लोगों का कहना है कि सीधे परिवारों से मिलने पर कौम के बच्चों की वास्तविक प्रतिभा और उनकी वास्तविक परेशानियों का सही पता चलता है।

ग्राउंड रिपोर्ट: संघर्ष नगर और तबरेज नगर का अनुभव

30 अगस्त 2026 को नागपुर के संघर्ष नगर और तबरेज नगर में सेवा टीम ने विशेष तालीमी गश्त की। इस दौरे के दौरान टीम का मुख्य लक्ष्य इलाके के गरीब बच्चों के लिए एक ट्यूशन क्लास शुरू करना था।

पिछले कुछ समय से संस्था के कार्यकर्ता इस इलाके के बच्चों से लगातार संपर्क में थे। जब हालिया परीक्षाओं के नतीजे सामने आए तो कई बच्चों ने बहुत बेहतरीन प्रदर्शन किया। इन अच्छे नतीजों को देखकर तबरेज नगर की महिलाओं और अभिभावकों में अपने बच्चों के बेहतर भविष्य की उम्मीद जग गई।

इलाके की महिलाओं ने टीम से पुरजोर गुजारिश की कि उनके बच्चों के लिए स्थानीय स्तर पर ट्यूशन क्लास शुरू की जाए। स्थानीय पढ़ी लिखी महिलाओं ने बच्चों की सूची बनाने और क्लास के लिए जगह खोजने की जिम्मेदारी अपने हाथों में ली।

तबरेज नगर की 135 से अधिक झोपड़ियों और मकानों में रहने वाले बच्चों का सर्वे शुरू किया गया है। जगह मिलते ही वहां एक नया नि:शुल्क शिक्षण केंद्र शुरू करने का निर्णय लिया गया है।

सोशल मीडिया और आर्थिक सहयोग का नेटवर्क

सेवा संस्था केवल जमीनी स्तर पर ही काम नहीं कर रही है, बल्कि आधुनिक डिजिटल माध्यमों का भी पूरा उपयोग कर रही है। यूट्यूब पर छोटी वीडियो रील्स और व्हाट्सएप संदेशों के माध्यम से इस तालीमी मिशन को देश भर में फैलाया जा रहा है।

डिजिटल प्रचार का एक बड़ा फायदा यह हो रहा है कि देश और विदेश में रहने वाले सक्षम लोग संस्था से जुड़ रहे हैं। जो लोग खुद समय नहीं दे सकते, वे आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों की फीस, किताबों और ट्यूशन का खर्च उठाने के लिए आगे आ रहे हैं।

संस्था का कहना है कि मुस्लिम समाज में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। बच्चे विपरीत परिस्थितियों और सीमित साधनों के बावजूद बेहतरीन परिणाम दे रहे हैं। उन्हें केवल सही मार्गदर्शन, आर्थिक सहारे और थोड़े से प्रोत्साहन की आवश्यकता है।

भविष्य की चुनौतियां और आगे की राह

भारत में मुस्लिम समुदाय की साक्षरता दर और उच्च शिक्षा में भागीदारी अन्य सामाजिक समूहों की तुलना में काफी कम रही है। ऐसे में सरकारी योजनाओं के साथ साथ इस तरह के निजी और सामाजिक प्रयास बहुत महत्वपूर्ण साबित हो रहे हैं।

सेवा तंजीम का लक्ष्य है कि आने वाले समय में देश के हर जिले और कस्बे से तालीमी जमात निकलकर गांवों तक पहुंचे। इसके लिए निम्नलिखित प्राथमिकताओं पर काम किया जा रहा है:

  1. हर शहर में स्थानीय शिक्षित युवाओं और सेवानिवृत्त कर्मियों की गश्त टीम बनाना।
  2. गरीब बस्तियों में प्राथमिक और माध्यमिक स्तर के ट्यूशन सेंटर शुरू करना।
  3. प्रतिभावान छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे यूपीएससी, एसएससी और नीट के लिए तैयार करना।
  4. ड्रॉपआउट दर रोकने के लिए अभिभावकों के साथ नियमित काउंसलिंग सत्र आयोजित करना।
  5. मस्जिदों को केवल इबादत तक सीमित न रखकर उन्हें शैक्षिक मार्गदर्शन का केंद्र बनाना।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

1. सेवा संस्था की तालीमी गश्त क्या है?

तालीमी गश्त एक सामाजिक अभियान है जिसमें वालंटियर घर घर जाकर मुस्लिम परिवारों को बच्चों की उच्च शिक्षा और करियर मार्गदर्शन के प्रति जागरूक करते हैं।

2. तालीमी जमात या कारवां कैसे काम करता है?

चार से पांच सदस्यों की टीम तीन दिनों के लिए विभिन्न गांवों और तहसीलों का दौरा करती है। वे वहां की मस्जिदों, स्कूलों और घरों में जाकर शिक्षा के महत्व पर बात करते हैं।

3. नागपुर में इस अभियान को कौन चला रहा है?

नागपुर में 75 वर्ष से अधिक उम्र के सेवानिवृत्त इंजीनियर और वरिष्ठ नागरिक हर रविवार को पिछड़ी बस्तियों में तालीमी गश्त करते हैं।

4. तबरेज नगर में हाल ही में क्या पहल की गई है?

30 अगस्त 2026 की गश्त के बाद तबरेज नगर में 135 घरों के बच्चों के लिए स्थानीय महिलाओं के सहयोग से ट्यूशन क्लास शुरू करने की योजना बनाई गई है।

5. क्या तालीमी गश्त के जरिए आर्थिक मदद भी दी जाती है?

हां, गश्त के दौरान जिन गरीब और होनहार बच्चों की पहचान होती है, उन्हें संस्था के माध्यम से फीस, किताबों और कोचिंग में आर्थिक सहायता दी जाती है।

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