वक्फ संशोधन विधेयक पर देशभर में उबाल, विजयवाड़ा में मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का महाधरना
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विजयवाड़ा में मुस्लिम संगठनों का बड़ा विरोध प्रदर्शन, सरकार पर लगाए वक्फ संपत्तियों को नष्ट करने और हड़पने के आरोप
मुस्लिम नाउ ब्यूरो,विजयवाड़ा
वक्फ (संशोधन) विधेयक को लेकर देशभर के मुस्लिम संगठनों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। इस विवादास्पद विधेयक के खिलाफ ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) और अन्य मुस्लिम संगठनों ने आंध्र प्रदेश की राजधानी विजयवाड़ा में महाधरना दिया। AIMPLB ने इसे वक्फ संपत्तियों को हड़पने और नष्ट करने की “साजिश” करार दिया और सरकार के रवैये की कड़ी आलोचना की।
AIMPLB ने सरकार पर आरोप लगाया कि उसने विधेयक लाने से पहले मुस्लिम समुदाय से कोई सलाह-मशविरा नहीं किया, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ है। पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना फजलुर रहीम मुज्जदीदी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री और तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के प्रमुख चंद्रबाबू नायडू से मुलाकात की और उन्हें मुस्लिम समुदाय की चिंताओं से अवगत कराया।
5 करोड़ ईमेल और आपत्तियों के बावजूद सरकार अडिग
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के अनुसार, जेपीसी (संयुक्त संसदीय समिति) को भारतीय मुसलमानों द्वारा 5 करोड़ ईमेल भेजे गए थे, जिनमें इस विधेयक पर आपत्ति जताई गई थी। इसके अलावा, AIMPLB और अन्य मुस्लिम संगठनों ने विधेयक के हर खंड की विस्तार से समीक्षा कर सरकार को अपनी आपत्तियाँ लिखित रूप में सौंपी थीं। इसके बावजूद, सरकार ने उनकी आपत्तियों को नजरअंदाज किया और विधेयक में और अधिक सख्त और विवादास्पद प्रावधान जोड़ दिए।
AIMPLB का कहना है कि आमतौर पर किसी भी लोकतांत्रिक देश में कानून बनाने से पहले संबंधित हितधारकों से सलाह ली जाती है, लेकिन इस बार सरकार ने पूरी तरह से तानाशाही रवैया अपनाया है। किसानों के मामले में भी ऐसा ही हुआ था जब कृषि कानूनों को बिना किसी परामर्श के पारित किया गया, लेकिन जब किसान मजबूत विरोध में उतरे, तो सरकार को झुकना पड़ा।
मुस्लिम संगठनों का सवाल – क्या यही लोकतंत्र है?
AIMPLB ने सवाल उठाया कि जब वक्फ संपत्तियों से जुड़े मामलों पर पहले मुस्लिम समुदाय से सलाह ली जाती थी, तो अब इसे क्यों दरकिनार किया गया? विपक्षी दलों द्वारा भी इस विधेयक की कड़ी आलोचना की गई, लेकिन सरकार ने उनकी बात को भी तवज्जो नहीं दी।
AIMPLB का मानना है कि सरकार का असली मकसद वक्फ संपत्तियों को नियंत्रित करना और उन्हें निजी हाथों में देना है। बोर्ड ने चेतावनी दी कि यदि यह विधेयक लागू होता है, तो भारत में लाखों मस्जिदों, मदरसों, कब्रिस्तानों और अन्य वक्फ संपत्तियों का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है।
चंद्रबाबू नायडू से AIMPLB की मुलाकात, बड़े आंदोलन की चेतावनी
मौलाना फजलुर रहीम मुज्जदीदी के नेतृत्व में AIMPLB के प्रतिनिधिमंडल ने आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू से मुलाकात की और उनसे इस बिल पर केंद्र सरकार से बातचीत करने की अपील की। इस मुलाकात के दौरान मुस्लिम नेताओं ने स्पष्ट किया कि यह बिल मुस्लिम समाज के खिलाफ एक “सुनियोजित साजिश” का हिस्सा है और इससे देश में धार्मिक ध्रुवीकरण को बढ़ावा मिलेगा।
AIMPLB और अन्य मुस्लिम संगठनों ने ऐलान किया है कि यदि सरकार ने इस विधेयक को वापस नहीं लिया, तो देशभर में व्यापक विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे।
Waqf Amendment Bill : A conspiracy to Destroy and Usrup Waqf Property.
— All India Muslim Personal Law Board (@AIMPLB_Official) March 8, 2025
We totally Reject it.
All India Muslim Personal Law Board holds Maha Dharna in Vijayawada, the capital city of Andhra Pradesh.
1/2#AndhraPradeshAgainstWaqfAmendmentBill #Waqfbill #WaqfAmendmentBill pic.twitter.com/iETBf6tVYA
क्या वक्फ बिल BJP के खिलाफ चुनावी मुद्दा बनेगा?
AIMPLB ने यह भी संकेत दिया कि मुसलमान वक्फ संशोधन विधेयक को भाजपा के खिलाफ “युद्ध” के रूप में देख रहे हैं। बोर्ड के अनुसार, यह विधेयक भाजपा की “फूट डालो और राज करो” नीति का हिस्सा है, और अब मुस्लिम समुदाय को यह तय करना होगा कि वह आगामी चुनावों में भाजपा का कितना समर्थन करेगा।
AIMPLB के साथ-साथ अन्य मुस्लिम संगठनों और धर्मनिरपेक्ष दलों ने भी सरकार पर दबाव बनाने के लिए देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों की योजना बनाई है। विजयवाड़ा में आयोजित महाधरना इस अभियान का हिस्सा था।
Press Release 👇
— All India Muslim Personal Law Board (@AIMPLB_Official) March 8, 2025
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क्या सरकार बदलेगी अपना रुख?
अब सवाल यह है कि क्या इन प्रदर्शनों का असर पड़ेगा और सरकार इस विवादास्पद विधेयक को वापस लेने पर विचार करेगी? या फिर यह मुद्दा आगामी चुनावों में भाजपा के लिए एक बड़ी चुनौती बनेगा?
जो भी हो, वक्फ (संशोधन) विधेयक को लेकर देश के मुस्लिम समाज में भारी असंतोष है और आने वाले दिनों में इस पर राजनीतिक सरगर्मी और बढ़ने की संभावना है।