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प्रोफेसर रहमान मुसव्विर को मिला प्रतिष्ठित हंस ग़ज़ल सम्मान 2026

मुस्लिम नाउ ब्यूरो, नई दिल्ली

नई दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित एक विशेष साहित्यिक कार्यक्रम में जामिया मिल्लिया इस्लामिया के हिंदी विभाग के प्रोफेसर और जाने माने शायर रहमान मुसव्विर को हंस ग़ज़ल सम्मान 2026 से सम्मानित किया गया। यह प्रतिष्ठित पुरस्कार हिंदी साहित्य के महान कथाकार स्वर्गीय राजेंद्र यादव की याद में दिया जाता है। 10 सितंबर 2026 को आयोजित इस गरिमापूर्ण समारोह में देश के जाने माने साहित्यकार, आलोचक, कवि और कलाप्रेमी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

त्वरित सारांश और मुख्य बिंदु

  1. जामिया मिल्लिया इस्लामिया के प्रोफेसर रहमान मुसव्विर को हंस ग़ज़ल सम्मान 2026 से नवाजा गया।
  2. यह पुरस्कार प्रसिद्ध शायर प्रोफेसर शाहपर रसूल के हाथों प्रदान किया गया।
  3. यह सम्मान हिंदी के मूर्धन्य लेखक स्वर्गीय राजेंद्र यादव की स्मृति में दिया जाता है।
  4. कार्यक्रम का आयोजन नई दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर स्थित कमला देवी सभागार में हुआ।
  5. प्रोफेसर रहमान मुसव्विर मूल रूप से उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के रहने वाले हैं।
  6. इससे पहले उन्हें काव्य सुमन अलंकरण और नूरे ग़ज़ल सम्मान भी मिल चुके हैं।

इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में गरिमापूर्ण सम्मान समारोह

राजेंद्र यादव की स्मृति में विभिन्न साहित्यिक विधाओं के लिए हंस पुरस्कार प्रदान किए जाते हैं। वर्ष 2026 का हंस ग़ज़ल सम्मान प्रोफेसर रहमान मुसव्विर को चुना गया। इंडिया इंटरनेशनल सेंटर के कमला देवी सभागार में आयोजित कार्यक्रम में प्रख्यात शायर प्रोफेसर शाहपर रसूल ने उन्हें यह सम्मान सौंपा।

पुरस्कार प्रदान करते हुए प्रोफेसर शाहपर रसूल ने रहमान मुसव्विर की शायरी की तारीफ की। उन्होंने कहा कि भाषा, कला और समग्र प्रभाव के आधार पर उनकी ग़ज़लें वियोग, पुरानी यादों, पश्चाताप और अंदरूनी बेचैनी को बहुत ही संतुलित और सभ्य अंदाज में पेश करती हैं।

इस अवसर पर साहित्यिक जगत की कई प्रमुख हस्तियां मौजूद थीं। हंस पत्रिका के संपादक संजय सहाय और हंसाक्षर की मुख्य ट्रस्टी रचना यादव कार्यक्रम में उपस्थित रहीं। इनके अलावा प्रख्यात आलोचक पुरुषोत्तम अग्रवाल, कवयित्री सुमन केसरी, कवि मदन कश्यप, लेखक प्रभात रंजन, शायर मुईन शादाब, शायर शाहिद अंजुम, कहानीकार राकेश बिहारी, अजय नावरिया, लेखिका मृदुला गर्ग, गीताश्री और कवयित्री शोभा अक्षर भी समारोह में शामिल हुए।

सहारनपुर से नई दिल्ली तक का साहित्यिक सफर

प्रोफेसर रहमान मुसव्विर का संबंध उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले से है। वे मूल रूप से सहारनपुर के कैलाशपुर गांव के निवासी हैं। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई सहारनपुर के ही संस्थानों से पूरी की।

उन्होंने सहारनपुर के इस्लामिया इंटर कॉलेज, महाराज सिंह कॉलेज और जेवी जैन कॉलेज से उच्च शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद वे आगे की पढ़ाई के लिए नई दिल्ली आ गए।

उन्होंने जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी से अपनी पीएचडी की डिग्री पूरी की। उन्होंने प्रसिद्ध साहित्यकार प्रोफेसर असग़र वजाहत के निर्देशन में अपना शोध कार्य पूरा किया। उनके शोध का विषय ‘पाकिस्तानी उर्दू कथा साहित्य में भारतीय मिथक’ था। वर्तमान में वे जामिया के हिंदी विभाग में प्रोफेसर के रूप में पढ़ा रहे हैं।

हिंदी और उर्दू शायरी में विशिष्ट पहचान

रहमान मुसव्विर हिंदी और उर्दू शायरी की दुनिया में एक बड़ा नाम हैं। उनकी ग़ज़लों को देश और दुनिया भर में काफी पसंद किया जाता है। साहित्यिक कार्यक्रमों और मुशायरों के अलावा उन्होंने मीडिया के लिए भी बहुत काम किया है।

उन्होंने रेडियो, टीवी और फिल्मों के लिए गाने और पटकथाएं लिखी हैं। वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी शायरी की प्रस्तुति देते रहते हैं।

साहित्य में उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें पहले भी सम्मानित किया जा चुका है। हंस ग़ज़ल सम्मान से पहले उन्हें काव्य सुमन अलंकरण और नूरे ग़ज़ल सम्मान से भी नवाजा गया है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

1. हंस ग़ज़ल सम्मान 2026 किसे दिया गया है?

यह सम्मान जामिया मिल्लिया इस्लामिया के हिंदी विभाग के प्रोफेसर और प्रसिद्ध शायर रहमान मुसव्विर को दिया गया है।

2. यह सम्मान किसकी याद में दिया जाता है?

यह पुरस्कार हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध लेखक और हंस पत्रिका के पूर्व संपादक स्वर्गीय राजेंद्र यादव की स्मृति में दिया जाता है।

3. सम्मान समारोह का आयोजन कहां हुआ था?

सम्मान समारोह का आयोजन नई दिल्ली स्थित इंडिया इंटरनेशनल सेंटर के कमला देवी सभागार में किया गया था।

4. प्रोफेसर रहमान मुसव्विर ने पीएचडी किस विषय पर की है?

उन्होंने जामिया मिल्लिया इस्लामिया से प्रोफेसर असग़र वजाहत के निर्देशन में ‘पाकिस्तानी उर्दू कथा साहित्य में भारतीय मिथक’ विषय पर पीएचडी की है।

5. प्रोफेसर रहमान मुसव्विर को पहले कौन से सम्मान मिल चुके हैं?

उन्हें इससे पहले काव्य सुमन अलंकरण और नूरे ग़ज़ल सम्मान जैसे प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है।

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