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नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर भगदड़: जब मुसलमान कुली ने बचाई मासूम की जान, हिंदुत्ववादियों की नफरत हुई बेनकाब

मुस्लिम नाउ ब्यूरो, नई दिल्ली

नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर शनिवार रात भगदड़ में 18 लोगों की मौत हो गई, जबकि करीब 20 लोग घायल हुए, जिनमें से पांच की हालत गंभीर बनी हुई है. यह दर्दनाक घटना तब हुई जब प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ मेले में स्नान करने के लिए हजारों श्रद्धालु देशभर से दिल्ली रेलवे स्टेशन पर उमड़ पड़े। व्यवस्था नाकाम रही, रेलवे प्रशासन असफल साबित हुआ, लेकिन इस भयावह स्थिति में इंसानियत की मिसाल पेश की एक मुस्लिम कुली ने, जिसने अपनी जान की परवाह किए बिना मासूम बच्ची की जान बचाई.

जब मुसलमान ने दिया इंसानियत का सबक

भगदड़ के दौरान रेलवे स्टेशन पर तैनात कुली मोहम्मद हाशिम ने जान की परवाह किए बिना एक 4 साल की मासूम बच्ची की जान बचाई. बच्ची की मां चीख-चीख कर रो रही थी कि उसकी बेटी मर चुकी है, लेकिन हाशिम ने उसे गोद में उठाया और सुरक्षित स्थान पर ले गए. कुछ ही देर बाद बच्ची ने सांस लेना शुरू कर दिया, और उसकी मां खुशी के मारे फूट-फूटकर रोने लगी। हाशिम ने कहा, “या तो हम बहादुर हैं या मूर्ख, लेकिन हमने कई लोगों की जान बचाई.”

प्रयागराज में मुसलमानों ने खोले अपने घर, हिंदू संगठन हुए नदारद

नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर हुए इस दर्दनाक हादसे के बाद लोगों को प्रयागराज में हुए एक अन्य घटनाक्रम की याद आ गई. महाकुंभ में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने के कारण वहां भी अव्यवस्था फैली थी. इस संकट की घड़ी में हिंदू संगठनों के बड़े-बड़े दावे करने वाले लोग तो कहीं नजर नहीं आए, लेकिन मुसलमानों ने अपने घर, मस्जिद और लंगर के दरवाजे खोल दिए.

काशी में सलीम मर्चेंट नामक व्यक्ति ने अपने घर में हरियाणा और राजस्थान से आए हिंदू श्रद्धालुओं को न सिर्फ जगह दी, बल्कि उनके रहने और खाने-पीने की व्यवस्था भी की. इन श्रद्धालुओं में हिसार के एक गायक कलाकार भी शामिल थे, जिन्होंने कहा, “हमें काशी में कोई होटल नहीं मिला, लेकिन सलीम भाई के घर में पनाह मिली। उन्होंने हमारी इतनी सेवा की कि हमारा दिल खुश हो गया। यही असली हिंदुस्तान है.”

क्या अब मुसलमानों पर प्रतिबंध लगाने की मांग करने वाले हिंदुत्ववादी शर्मिंदा होंगे?

यही वे मुसलमान हैं, जिनकी एंट्री प्रयागराज महाकुंभ में बैन करने की मांग कुछ हिंदुत्ववादी संगठन कर रहे थे। कहा जा रहा था कि मुसलमानों की वहां कोई जरूरत नहीं, लेकिन जब प्रशासन और हिंदू संगठनों ने श्रद्धालुओं की मदद से हाथ खींच लिया, तब यही मुसलमान आगे आए.

जो कट्टर हिंदूवादी मुसलमानों को देशद्रोही कहकर मंदिरों से दूर रखने की साजिश रचते हैं, क्या अब वे इस इंसानियत भरे काम को देखेंगे? जब कोई भी हिंदू संगठन भगदड़ में फंसे लोगों की मदद को आगे नहीं आया, तब मोहम्मद हाशिम जैसे लोगों ने अपनी जान की परवाह किए बिना श्रद्धालुओं को बचाया.

भगदड़ के पीछे प्रशासनिक लापरवाही, लेकिन इंसानियत बनी बड़ी मिसाल

दिल्ली रेलवे स्टेशन पर भगदड़ का कारण अव्यवस्था और कुप्रबंधन था। हर त्योहार के दौरान ऐसी घटनाएं देखने को मिलती हैं, लेकिन प्रशासन इससे सबक नहीं लेता. वहीं, दूसरी ओर इंसानियत की मिसाल पेश करते हुए मुसलमानों ने इस कठिन समय में आगे आकर अपना फर्ज निभाया.

अब सवाल हिंदू संगठनों पर?

जो कट्टर हिंदूवादी संगठन आए दिन मुसलमानों को निशाना बनाते हैं, क्या वे अब इस घटना पर प्रतिक्रिया देंगे? क्या वे अपने समर्थकों को बताएंगे कि कैसे एक मुसलमान कुली ने मासूम की जान बचाई? क्या वे उन मुसलमानों की तारीफ करेंगे, जिन्होंने अपनी छत श्रद्धालुओं के लिए खोल दी?

काबिल ए गौर

यह घटनाएं हमें याद दिलाती हैं कि हिंदुस्तान की असली पहचान धर्म नहीं, बल्कि मानवता है. चाहे दिल्ली हो, प्रयागराज हो या काशी, जब-जब मुश्किलें आई हैं, तब-तब इंसानियत के सच्चे सिपाही सामने आए हैं। सवाल यह है कि क्या नफरत फैलाने वालों की आंखें अब खुलेंगी?