डल झील पर सिनेमा का जादू , तैरते थिएटर ने रचा नया इतिहास
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अतहर गुल्फाम/ श्रीनगर
श्रीनगर की विश्व प्रसिद्ध डल झील का पानी इन दिनों एक अलग ही रंग में रंगा नजर आ रहा है। कश्मीर की वादियों में बहती ठंडी हवाओं और विशाल पहाड़ियों के बीच डल झील की लहरों पर हिंदी सिनेमा की पुरानी यादें तैरती हुई दिखाई दीं। मौका था जम्मू कश्मीर अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव 2026 का। इस महोत्सव के दौरान डल झील में एक विशाल तैरता हुआ सिनेमा पर्दा लगाया गया। 7 सितंबर से 10 सितंबर 2026 तक चले इस चार दिवसीय आयोजन ने स्थानीय लोगों और पर्यटकों को एक ऐसा अनुभव दिया जो उन्होंने पहले कभी नहीं देखा था।
डल झील के किनारे बने खुले प्रेक्षकों के बैठने के स्थान से लोगों ने पहाड़ों की ओट में और शहर की जगमगाती रोशनी के बीच बॉलीवुड की ऐतिहासिक फिल्मों का आनंद लिया। यह पहला अवसर था जब घाटी में किसी फिल्म महोत्सव के तहत पानी की सतह पर तैरता हुआ थिएटर स्थापित किया गया।
When the only sound on Dal Lake is applause and laughter…
— RuksanaBegum (@RBegum786) September 10, 2026
Floating cinema during #IFFJK turns the waters into a shared open-air theatre.
Peace looks like people simply enjoying a film under the open sky.#BadaltaKashmirpic.twitter.com/rpNM6BXexL
त्वरित सारांश और मुख्य बिंदु
- श्रीनगर की ऐतिहासिक डल झील में 7 से 10 सितंबर 2026 तक जम्मू कश्मीर अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव का आयोजन हुआ।
- झील की शांत लहरों के ऊपर एक विशाल तैरती हुई स्क्रीन लगाकर खुले आसमान के नीचे सिनेमा दिखाया गया।
- महोत्सव की शुरुआत 1961 की मशहूर हिंदी फिल्म ‘जंगली’ के प्रदर्शन के साथ की गई।
- 9 सितंबर की शाम शम्मी कपूर और शर्मिला टैगोर अभिनीत कालजयी फिल्म ‘कश्मीर की कली’ की विशेष स्क्रीनिंग हुई।
- 10 सितंबर को महोत्सव के अंतिम दिन यश चोपड़ा की प्रसिद्ध फिल्म ‘कभी कभी’ का प्रदर्शन किया गया।
- स्थानीय निवासियों और देश विदेश से आए पर्यटकों ने इस पहल को कश्मीर के पर्यटन और सांस्कृतिक जीवन में एक नया अध्याय बताया।
डल झील का अद्भुत नजारा और तैरते थिएटर की परिकल्पना
कश्मीर की खूबसूरती और हिंदी सिनेमा का नाता बहुत पुराना है। अस्सी के दशक से पहले भारतीय फिल्मों में कश्मीर के प्राकृतिक दृश्यों को बहुत प्रमुखता से दिखाया जाता था। निर्देशक अपनी कहानियों में रोमांस और संगीत का तड़का लगाने के लिए अक्सर श्रीनगर की गलियों और डल झील का रुख करते थे। आईएफएफजेके 2026 ने इसी पुराने और अटूट रिश्ते को एक नए अंदाज में जीवित करने का प्रयास किया।
डल झील में तैरते हुए मंच पर एक बड़ी सफेद स्क्रीन लगाई गई थी। जब शाम ढलती थी और शिकारों की बत्तियां जलती थीं तो उस समय झील का पानी किसी जादुई दर्पण की तरह चमकने लगता था। झील के किनारे शिकारे में बैठकर या तट पर बनी सीटों पर बैठकर दर्शक स्क्रीन पर चलने वाले दृश्यों को देखते थे।
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इस तरह के सिनेमा अनुभव की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि दर्शक जिस जगह पर बैठकर फिल्म देख रहे थे, वही स्थान उस फिल्म की कहानी का हिस्सा भी रह चुका है। फिल्मों में दिखने वाले शिकारे, चिनार के पेड़ और पहाड़ियां दर्शकों को अपनी आंखों के ठीक सामने वास्तविक रूप में नजर आ रहे थे।
Floating cinema at DalLake 😍
— Yusra Iqbal (@YusraIqbal_) September 10, 2026
These visuals once seemed impossible but now become an integral part of Kashmir's daily life..
Naya Kashmir Badalta Kashmir Khushaal Kashmir!@RajeevRC_X @abhijitmajumder @smitaprakash @gauravcsawant @ShefVaidya pic.twitter.com/SbwfVmVLf3
‘जंगली’ से शुरू हुआ पुरानी यादों का कारवां
महोत्सव के पहले दिन यानी 7 सितंबर 2026 को तैरते सिनेमा की शुरुआत 1961 में बनी ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘जंगली’ से हुई। अभिनेता शम्मी कपूर और अभिनेत्री सायरा बानो की इस फिल्म ने साठ के दशक में भारत के युवाओं को अपना दीवाना बना दिया था।
जब डल झील की लहरों पर फिल्म ‘जंगली’ का मशहूर गाना ‘चाहे कोई मुझे जंगली कहे’ गूंजा तो वहां मौजूद दर्शक खुशी से झूम उठे। कई बुजुर्ग दर्शकों की आंखें उन पुरानी यादों को ताजा करके नम हो गईं। यह फिल्म मुख्य रूप से कश्मीर की वादियों में ही शूट की गई थी।
आयोजकों ने बताया कि पहली रात की स्क्रीनिंग में ही सैकड़ों की संख्या में लोग डल झील के किनारे जमा हो गए थे। स्थानीय परिवारों ने अपने बच्चों के साथ आकर इस अनोखे सिनेमा घर का लुत्फ उठाया।
‘कश्मीर की कली’ का जादू और दर्शकों का उत्साह
बुधवार 9 सितंबर की शाम तैरते थिएटर पर वह फिल्म दिखाई गई जिसने कश्मीर के पर्यटन को पूरे विश्व में पहचान दिलाई थी। वर्ष 1964 में प्रदर्शित हुई शक्ति सामंत की फिल्म ‘कश्मीर की कली’ की स्क्रीनिंग जैसे ही शुरू हुई, पूरा डल झील परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
अभिनेता शम्मी कपूर का मस्तमौला अंदाज और अभिनेत्री शर्मिला टैगोर की सादगी ने दर्शकों का दिल जीत लिया। ‘दीवाना हुआ बादल’ और ‘तारीफ करूं क्या उसकी’ जैसे सदाबहार गानों को डल झील के पानी पर बजते सुनना एक रूहानी अहसास कराने वाला था।
फिल्म में दिखाए गए शिकारों के दृश्य असल जिंदगी में भी उसी डल झील में तैर रहे थे। दर्शकों को ऐसा महसूस हो रहा था मानो वे किसी टाइम मशीन में बैठकर साठ के दशक के कश्मीर में पहुंच गए हैं। यह स्क्रीनिंग केवल मनोरंजन नहीं थी बल्कि यह भारतीय सिनेमा के उस दौर की एक भावनात्मक यात्रा थी जब कश्मीर हिंदी फिल्मों का मुख्य केंद्र हुआ करता था।
FLOATING CINEMA, TIMELESS MAGIC!
— IFFJK (@iffjk26) September 8, 2026
Experience the classic Kashmir Ki Kali (1964), directed by Shakti Samanta, against the breathtaking beauty of Jammu & Kashmir.
📅 Save the Date: 09 September 2026
⏰Show Time: 08:00 PM
A timeless story. A stunning setting. Cinema like never… pic.twitter.com/yHzlUDdVNO
‘कभी कभी’ से समापन और दर्शकों के अनुभव
महोत्सव के अंतिम दिन 10 सितंबर 2026 को निर्देशक यश चोपड़ा की 1976 में आई मशहूर रोमांटिक फिल्म ‘कभी कभी’ का प्रदर्शन किया गया। अमिताभ बच्चन, राखी, शशि कपूर और वहीदा रहमान के अभिनय से सजी इस फिल्म में कश्मीर के बदलते मौसम और चिनार के पत्तों के सौंदर्य को बहुत खूबसूरती से दिखाया गया था।
तैरते सिनेमा में फिल्म देखने आई पर्यटक अदिति शर्मा ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्होंने भारत और विदेश में कई जगह फिल्में देखी हैं लेकिन ऐसा अनुभव जिंदगी में पहली बार मिला है। उन्होंने कहा कि कश्मीर में तैरता हुआ सिनेमा बनना अपने आप में बेहद अनोखा विचार है। झील के किनारे बैठकर और पीछे पहाड़ों का नजारा देखते हुए वही की पुरानी फिल्में देखना किसी सपने जैसा लगता है।
पर्यटकों के साथ साथ स्थानीय युवाओं में भी इस कार्यक्रम को लेकर बहुत उत्साह देखा गया। स्थानीय निवासियों का कहना था कि पिछले कुछ वर्षों में कश्मीर में सांस्कृतिक गतिविधियों का विस्तार हुआ है। तैरता सिनेमा जैसी पहल से घाटी के शांतिपूर्ण और जीवंत माहौल का संदेश पूरी दुनिया तक पहुंचता है।
सिनेमा और कश्मीर के सांस्कृतिक रिश्तों का नया दौर
आईएफएफजेके 2026 की यह पहल केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं है। इसका एक बड़ा सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व भी है। पिछले कुछ वर्षों से जम्मू कश्मीर सरकार और फिल्म उद्योग मिलकर राज्य में शूटिंग को बढ़ावा देने का काम कर रहे हैं। नई फिल्म नीति आने के बाद से कई बड़े बैनर की फिल्में और वेब सीरीज घाटी में शूट हो रही हैं।
डल झील में तैरता सिनेमा स्थापित करने का मुख्य उद्देश्य युवाओं और बाहरी पर्यटकों को यह याद दिलाना था कि कश्मीर का भारतीय सिनेमा में कितना बड़ा योगदान रहा है। जिस तरह से स्थानीय लोगों ने इस चार दिवसीय महोत्सव का स्वागत किया है, उससे आयोजकों के हौसले काफी बुलंद हुए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस तरह के तैरते थिएटर को नियमित रूप से संचालित किया जाए तो यह श्रीनगर के पर्यटन का एक बड़ा आकर्षण बन सकता है। इससे स्थानीय नाव चालकों यानी शिकारे वालों और छोटे व्यापारियों की आय में भी बढ़ोतरी होगी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. डल झील पर तैरता सिनेमा किस आयोजन के तहत शुरू हुआ?
डल झील पर तैरते थिएटर की शुरुआत जम्मू कश्मीर अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव 2026 (IFFJK 2026) के तहत की गई थी।
2. तैरते सिनेमा का आयोजन कब से कब तक किया गया?
तैरते सिनेमा का आयोजन 7 सितंबर 2026 से शुरू होकर 10 सितंबर 2026 तक कुल चार दिनों तक चला।
3. डल झील में तैरती स्क्रीन पर कौन सी फिल्में दिखाई गईं?
चार दिनों के दौरान 1961 की फिल्म ‘जंगली’, 1964 की ‘कश्मीर की कली’ और 1976 की ‘कभी कभी’ जैसी क्लासिक हिंदी फिल्में दिखाई गईं।
4. तैरते सिनेमा में पहली फिल्म कौन सी प्रदर्शित की गई थी?
महोत्सव के पहले दिन 7 सितंबर को शम्मी कपूर और सायरा बानो की प्रसिद्ध फिल्म ‘जंगली’ की स्क्रीनिंग की गई थी।
5. इस तैरते थिएटर की सबसे बड़ी खासियत क्या थी?
इसकी सबसे बड़ी खासियत यह थी कि दर्शक डल झील के पानी पर बैठकर उन फिल्मों को देख रहे थे जिनकी शूटिंग सालों पहले उसी डल झील में हुई थी।
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