The Wall Street Journal फेसबुक-बीजेपी के संबंधों का खुलासा करती पुस्तक The Real Face of Facebook in India
अमेरिकी अखबार ‘द वाल स्ट्रीट जरनल’( The Wall Street Journal ) में फेसबुक (Facebook) तथा भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच गुप्त संबंधों पर छपी रिपोर्ट ‘फेसबुकस हेट-स्पीच रूल्स कोलाइड विथ इंडियन पॉलिटिक्स’ (Facebook’s Hate-Speech Rules Collide With Indian Politic)को लेकर सियासी हलके में भूचाल आया हुआ है। रिपोर्ट मैं कहा गया कि भारत में फेसबुक की हेड ‘कंपनी हित की रक्षा’ के नाम पर भाजपा-संघ परिवार के पक्ष में काम कर रही हैं। हालाकि इस तरह की खबर से बहुत पहले ‘द रियल फेस ऑफ फेसबुक इन इंडिया’(The Real Face of Facebook in India) नामक पुस्तक में ऐसे तमाम ‘रहस्योद्घाटन’ किए जा चुके हैं। यही नहीं फेसबुक की तमाम ‘कारस्तानियों’ की जानकारीत तृमूल कांग्रेस के सांसद डेरेक ओ ब्रायन राज्यसभा के पटल पर भी रख चुके हैं।
‘द रियल फेस ऑफ फेसबुक इन इंडिया‘ (The Real Face of Facebook in India)सिरील सेम एवं प्राजय जी ठाकुर्ता ने संयुक्त रूप से लिखी है। ऑन लाइन इसके किंडल वर्जन की कीमत 225 तथा पेपरबैक की 345 रूपये है। पुस्तक के परिचय में ऐमजॉन की ओर से लिखा गया है कि हाल के दिनों मैं 300 मिलियन घृणा, झूठ, अर्धसत्य, भाड़काउ सामग्रियां इंटरनेट, मोबाइल के माध्यम से फैलाई गईं। लोकसभा चुनाव के समय मतदान को प्रभावित करने की खातिर दक्षिण पंथियों ने झूठ फैलाने तईं व्हाट्सएप सेना को हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया। फेसबुक व इसकी बहन व्हाट्सएप के साथ अन्य सोशल मीडिया भी इसके लिए उपयोग में लाए गए। पुस्तक के हवाले से कहा गया कि फेसबुक पिछले कुछ समय से भाजपा, संघ, मोदी समर्थकों को आगे बढ़ाने में लगी है।
इस पुस्तक के हवाले से टीएमसी सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने राज्यसभा में पूरी जिम्मेदारी के साथ कहा था कि फेसबुक का दिल्ली ऑफिस बीजेपी के आईटी सेल के रूप में विस्तार ले चुका है। उनके मुताबिक, फेसबुक बीजेपी मुखालिफ सामग्री सेंसर करती है। इसकी भारत की सीनियर मैनेजर बीजेपी के लिए काम करती हैं।’ विदेश मामलों के पत्रकार साकेत गोखले का दावा है कि फेसबुक की दिल्ली में तैनात पॉलिसी हेड अंकित दास जेएनयू की भाजपा के छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की पूर्व अध्यक्ष रश्मि दास की बहन हैं।

नियमों का उल्लंघन
‘द वॉल स्ट्रीट जरनल में फुसबुक तथा बीजेपी गठबंधन को लेकर छपी रिपोर्ट Facebook’s Hate-Speech Rules Collide With Indian Politicमें भी कुछ इसी तरह की बातें कही गई हैं। कहा गया कि फेसबुक मुस्लिम विरोधी सामग्रियों की अनदेखी करती है। रिपोर्ट के अनुसार, फेसबुक के भारत में तैनात बड़ अधिकारी भाजपा राजनेताओं एवं राष्ट्रवादी समूहों के लिए ‘अभद्र भाषा’ के नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं। इसकी शीर्ष नीति कार्यकारी अधिकारी अंकित दास कंपनी के पार्टी से संबंध खराब होने का भय दिखाकर नीयम विरूद्ध कार्य कर रही हैं। रिपोर्ट मेें बताया गया कि दास ने कर्मचारियों को कंपनी की व्यवसायिक संभावनाओं के नुक्सान का भय दिखाया। अमेरिकी अखबार की मानें तो बीजेपी राजनेताओं द्वारा कोरोना वॉयरस फैलाने, राष्ट्र के खिलाफ साजिश रचने, लवजेहाद के बारे में बवंडर खड़ा करने वाली पोस्ट करने पर दास की टीम ने कार्रवाई नहीं की। कहते हैं, आम चुनाव के समय मतदान से कुछ दिनों पहले फेसबुक पर पाकिस्तान, सेना, कांग्रेस, भाजपा एवं दूसरी पार्टियों को लेकर किए जाने वाले पोस्ट पर लगाम कसने की घोषणा की गई थी। मगर बाद में भाजपा के मामले में फेसबुक निष्पक्षता नहीं दिखा पाई। अखबर में छपी रिपोर्ट में कहा गया कि भाजपा सांसद अनंतकुमार हेगड़े की फेसबुक वॉल पर कई मुस्लिम विरोधी पोस्ट डले थे। अखबार के रिपोर्टर्स द्वारा बारबार उस ओर ध्यान दिलाने के बाद उसे हटाया गया। हालांकि रिपोर्ट के संदर्भ में फेसबुक प्रवक्ता ने दावा किया है कि संस्थान किसी के राजनीतिक फायदे के लिए नीति में कोई बदलाव नहीं करता।

बहिष्कार का ऐलान
दूसरी तरफ, अखबार में फेसबुक और भाजपा के कथित सांठगांठ पर छपी रिपोर्ट के बाद भारत में एक तबका इस सोशल मीडिया के खिलाफ खड़ा हो गया है। इसके बहिष्कार को लेकर अभियान की शुरूआत कर दी गई है। इसके तहत लोगों से पूछा जा रहा है कि क्यों न फेसबुक का बहिष्कार किया जाए ? अभियान के कामयाब होने पर यदि इसके यूजर्स का थोड़ा हिस्सा भी छिटका तो कंपनी को भारी नुक्सान झेलना पड़ेगा।
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संपादक