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अरशद मदनी ने क्यों कहा, कानून की कीताबों को आग लगा दो

मुस्लिम नाउ ब्यूरो, नई दिल्ली

वाराणसी की निचली अदालत द्वारा ज्ञानवापी मस्जिद मामले में हिंदू पक्ष में फैसला देने के बाद से देश के इस्लामी और मुस्लिम रहनुमा बेहद नाराज हैं.स्थिति यह है कि बाबरी मस्जिद मामले में बकौल मुस्लिम रहनुमा, ‘एकपक्षीय फैसला सुनाने‘ के बावजूद खामोश रहने वाले अब अदालतों के रवैये पर उंगली उठाने लगे हैं. मुस्लिम रहनुमाओं को लगता है कि अदालतें बहुसंख्यक हिंदुओं के प्रभाव में हैं. उनके पक्ष में निरंतर फैसला सुना रही हैं.

जमीयत उलेमा ए हिंद के अरशद मदनी तो इसे लेकर इतने बिफरे हुए हैं कि कहने लगे हैं, ‘‘इन तमाम कवानीन और कवायद की लाइब्रेरियों को, इनकी किताबों को आग लगाव.‘‘

दिसंबर 2023 में यही अरशद मदनी ज्ञानवापी मस्जिद के प्रति अदालत के रवैये को लेकर कहा करते थे, ‘‘मुल्क हमारा है. सुप्रीम कोर्ट हमारी है. मसला कोर्ट में है. वहां अपनी बात रखेंगे. जो भी फैसला होगा उसे मानेंगे. हमें मस्जिद के सर्वे से कोई हर्ज नहीं. करा लीजिए.‘‘ मगर अब उनकी बातों से घोर निराशा झलकती है.

ज्ञानवापी मस्जिद पर आए वाराणसी कोर्ट के फैसले को लेकर सोशल मीडिया पर अरशद मदनी का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिससे पता चलता है कि वे अदालतों को लेकर न केवल मायूस हैं, गुस्से में भी हैं.

इस वीडियो में अरशद मदनी यह कहते दिखाई दे रहे हैं, ‘‘सिर्फ बाबरी मस्जिद के फैसले ने रास्ता दिखाया कि नहीं. इन तमाम कवानीन और कवायद की लाइब्रेरियों को, इनकी किताबों को आग लगाव. ’’

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वीडियो में वह आगे कहते हैं, ‘‘कोई चीज नहीं है. फैसले मजहब के अंदर जो भी हांेगे, वह अकीदत की बुनियाद पर होंगे. अकीदतमंदी की बुनियाद पर होंगे, तो मुल्क कैसे चलेगा. यह तो एक तसव्वुर दिया जा रहा है कि जहां भी अक्सरयित इस मुल्क के अंदर अपनी अकीदत की बुनियाद पर किसी मसले को लाएगी, वहां हकीकत और सबूत, सवायद को नहीं देखा जाएगा.’’

उन्हांेने आगे कहा, ‘‘बल्कि वहां यह देखा जाएगा कि अक्सरियत की अकीदतमंदी क्या चाहती है. जो चाहती है उसको पेश कर दिया जाएगा, तो मुल्क कैसे चलेगा.’’

वह आगे कहते हैं, ‘‘एक बात है सोचने की. हम सिर्फ इतनी ही बात कहना चाहते हैं कि अगर रविश यही रही चलेगी तो चाहे वह किसी भी अक्लीयत हो, चाहे वह सिख हो, चाहे वह जैन हो, चाहे वह मुसलमान हो, चाहे वो ईसाई हो, किसी मसले के अंदर उसको फैसला नहीं मिलेगा. अगर मुकाबले के अंदर तनाव है और उसके अंदर अकीदत अक्सरियत उसके अंदर दखल रखती है तो उसके मुकाबले कानून बेअसर हो जाएगा. यह बात मैं ही नहीं कह रहा हूं, समझदार और बड़े-बडे़ वोकला यह बात कह रहे हैं कि इस फैसले ने, बाबरी मस्जिद के, जो रास्ता खोला है कि अकीदत की बुनियाद पर जब कभी मुकाबला होगा तो कानून उसके अंदर एक हो जाएगा तो आप लाॅ पढ़ाते किस लिए हैं ?’’

वीडियो के अंत में अरशद मदनी ने कहा, लाइब्रेरियों के अंदर कानून की किताबें किस लिए रखी हुई हैं. उनको आग लगा दीजिए. यही मसला है. यह मुल्क का मैं समझता हूं यह बहुत बड़ा अलमियां है कि इस मुल्क के अंदर आज मुसलमान यह कह रहा है कि मसले की बुनियाद लोवर कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट अकीदत के उपर है, कानून के उपर नहीं है. ’’

अरशद मदनी के इस कड़े बयान के बाद अब सवाल उठने लगा है कि क्या राजनीति फायदा उठाने की खातिर बीजेपी, बीजेपी सरकारें या हिंदुवादी संगठनों का कोई कारिंदा उनके खिलाफ अदालत में जा सकता है ? जो भी हो लगता है कि अब मुसलमानों के सिर से पानी उंचा हो चुका है और आने वाला समय सरकार के लिए समस्या खड़ी करने वाला है.

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