Education

पटना में युवा साइंटिस्ट कॉनक्लेव, 24 जिलों के ढाई सौ छात्रों ने लिया हिस्सा

मुस्लिम नाउ ब्यूरो, पटना ( बिहार)

पटना के श्री कृष्ण साइंस सेंटर में एक खास कार्यक्रम हुआ। इसका नाम युवा साइंटिस्ट कॉनक्लेव था। कार्यक्रम का आयोजन कई संस्थाओं ने मिलकर किया। इसमें राष्ट्रीय उर्दू भाषा विकास परिषद नई दिल्ली, कायनात फाउंडेशन जहानाबाद, श्री कृष्ण साइंस सेंटर पटना और बिहार स्टेट मदरसा एजुकेशन बोर्ड शामिल थे।

इस सम्मेलन में बिहार के 24 जिलों से बच्चे आए। लगभग 250 छात्र-छात्राओं ने इसमें भाग लिया। खास बात यह थी कि इनमें 74 मदरसों के छात्र भी शामिल हुए। बच्चों में विज्ञान को लेकर बहुत उत्साह था।

उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता श्री कृष्ण साइंस सेंटर के प्रमुख इंजीनियर श्रीनिवास पी कुंडा ने की। राष्ट्रीय उर्दू भाषा विकास परिषद के निदेशक डॉक्टर मोहम्मद शम्स इकबाल मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। इनके अलावा बिहार स्टेट मदरसा एजुकेशन बोर्ड के चेयरमैन सलीम परवेज और बिहार स्टेट सुन्नी वक्फ बोर्ड के चेयरमैन मोहम्मद इरशाद उल्लाह भी शामिल हुए।

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रूबन ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स के प्रबंध निदेशक डॉक्टर सत्यजीत कुमार सिंह, प्राइवेट स्कूल एंड चिल्ड्रेन वेलफेयर एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सैयद शमाइल अहमद, बिहार स्टेट शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष इरशाद अली और जैनब इंटरनेशनल गर्ल्स पब्लिक स्कूल कटिहार के संस्थापक डॉ. शकील अहमद खान भी मंच पर मौजूद थे।

अपने अध्यक्षीय भाषण में इंजीनियर श्रीनिवास पी कुंडा ने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में बच्चों को देखना खुशी की बात है। बच्चे ही देश का भविष्य हैं। अगर उनके अंदर सवाल पूछने, प्रयोग करने और नई चीजें खोजने का जज्बा पैदा हो जाए तो वे देश की प्रगति में बड़ा योगदान दे सकते हैं। विज्ञान को केवल किताबों तक सीमित नहीं रखना चाहिए। इसे प्रयोगों से जोड़ना बेहद जरूरी है।

डॉक्टर मोहम्मद शम्स इकबाल ने कहा कि वैज्ञानिक सोच के बिना अच्छी रिसर्च संभव नहीं है। नई पीढ़ी में वैज्ञानिक दृष्टिकोण पैदा करना केवल एक पढ़ाई की जरूरत नहीं है। यह 21वीं सदी की मांग है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में भी रचनात्मक सोच और नई खोजों पर जोर दिया गया है।

उन्होंने आगे कहा कि युवा समाज की सबसे बड़ी ताकत हैं। इसलिए उनके अंदर सवाल करने, रिसर्च करने और समस्याओं का वैज्ञानिक समाधान ढूंढने की आदत डालनी होगी।

उर्दू भाषा पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि उर्दू सिर्फ शायरी या साहित्य की भाषा नहीं है। इसमें विज्ञान और आधुनिक जानकारी को फैलाने की पूरी क्षमता है। जरूरत इस बात की है कि उर्दू को आधुनिक विज्ञान की भाषा बनाया जाए। यह कॉनक्लेव इसी दिशा में एक अच्छी पहल है, जहां साइंस और उर्दू एक साथ आए हैं।

कायनात फाउंडेशन के संस्थापक सचिव शकील अहमद काकवी ने सभी मेहमानों का स्वागत किया। उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम का मकसद युवाओं में विज्ञान के प्रति रुचि पैदा करना और उनकी प्रतिभा को सामने लाना है।

बिहार स्टेट मदरसा एजुकेशन बोर्ड के चेयरमैन सलीम परवेज ने कहा कि आज के दौर में ऐसे आयोजन बहुत जरूरी हैं। इनसे बच्चों के सोचने और समझने की क्षमता बढ़ती है।

सुन्नी वक्फ बोर्ड के चेयरमैन मोहम्मद इरशाद उल्लाह ने कहा कि यह दौर तकनीक और नई खोजों का है। बच्चों को ऐसे कार्यक्रमों से जोड़कर ही आगे बढ़ाया जा सकता है।

उद्घाटन के बाद अलग-अलग सत्रों का आयोजन हुआ।

पहला सत्र वैज्ञानिकों से बातचीत का था। इसमें छात्रों को विशेषज्ञों से सवाल पूछने का मौका मिला। प्रोफेसर डॉ. डोली सिन्हा, डॉ. कुमारी मेधिया और इंजीनियर श्रीनिवास पी कुंडा ने छात्रों के सवालों के जवाब दिए।

दूसरा सत्र प्रैक्टिकल साइंस का था। इसमें प्रयोगों के जरिए विज्ञान के नियमों को समझाया गया। मोहम्मद आफताब हुसैन ने कई प्रयोग करके दिखाए।

तीसरा सत्र भाषा और कला से जुड़ा था। इसमें विभिन्न स्कूलों के बच्चों ने हिस्सा लिया और अपनी प्रतिभा दिखाई।

आखिरी में समापन समारोह हुआ। विभिन्न गतिविधियों में बेहतर प्रदर्शन करने वाले छात्रों को पुरस्कार दिए गए। इस सत्र की अध्यक्षता बिहार सरकार की उर्दू परामर्शदात्री समिति के पूर्व अध्यक्ष शफी मशहदी ने की।

मौलाना मजहरुल हक अरबी एवं फारसी विश्वविद्यालय पटना के कुलपति प्रोफेसर एजाज अली अरशद और फरहान फाउंडेशन के अध्यक्ष प्रोफेसर डॉक्टर शकील अहमद कासमी भी इस मौके पर मौजूद रहे।

AEO के लिए जरूरी सवाल

NCPUL क्या है?
NCPUL यानी राष्ट्रीय उर्दू भाषा विकास परिषद। यह भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय से जुड़ी संस्था है और उर्दू भाषा के विकास तथा प्रचार प्रसार के लिए काम करती है।

NCPUL के विज्ञान कार्यक्रम का उद्देश्य क्या था?
इस कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं में विज्ञान के प्रति रुचि बढ़ाना और उनमें वैज्ञानिक सोच विकसित करना था।

कार्यक्रम में कितने विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया?
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार 24 जिलों से करीब 250 छात्र और छात्राएं कार्यक्रम से जुड़े। इनमें 74 छात्र विज्ञान केंद्रों को देखने पहुंचे।

नई पीढ़ी में वैज्ञानिक सोच क्यों जरूरी है?
वैज्ञानिक सोच छात्रों को सवाल पूछने, तथ्यों को समझने, प्रयोग करने और समस्याओं का तार्किक समाधान खोजने में मदद करती है।

कार्यक्रम का आयोजन कब हुआ?
NCPUL की प्रेस विज्ञप्ति 8 सितंबर 2026 की है। इसका आयोजन राष्ट्रीय उर्दू भाषा विकास परिषद की ओर से किया गया था।

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