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शहजादा इदरीस बदरुद्दीन के निधन पर एएमयू में शोक, कुलपति ने जताया दुख

मुस्लिम नाउ ब्यूरो, अलीगढ़

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) ने दाऊदी बोहरा समुदाय के 53वें अल-दाई अल-मुतलक हिज होलीनेस सैयदना मुफद्दल सैफुद्दीन के छोटे भाई और एएमयू के पूर्व कुलाधिपति के परिवार से जुड़े शहजादा इदरीस बदरुद्दीन के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। शहजादा इदरीस का 20 अक्टूबर को मुंबई में 73 वर्ष की उम्र में निधन हो गया।

एएमयू की ओर से 21 अक्टूबर को जारी बयान में कहा गया कि शहजादा इदरीस ने करीब पांच दशक तक सामुदायिक सेवा और शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया। उनकी जिंदगी के कार्यों में शिक्षा को विशेष महत्व हासिल था। उनके मार्गदर्शन में दाऊदी बोहरा समुदाय के वैश्विक स्कूल नेटवर्क का विस्तार हुआ और विभिन्न देशों में हजारों विद्यार्थियों को शिक्षा की सुविधा मिली।

शहजादा इदरीस ने शिक्षा के स्तर को बेहतर बनाने, आधुनिक शिक्षण पद्धतियों को बढ़ावा देने और शिक्षकों के पेशेवर विकास के लिए भी काम किया। उनका मानना था कि मजबूत शैक्षणिक व्यवस्था और प्रशिक्षित शिक्षक ही नई पीढ़ी के भविष्य को बेहतर बना सकते हैं।

वर्ष 1952 में जन्मे शहजादा इदरीस, दिवंगत सैयदना मोहम्मद बुरहानुद्दीन के पांचवें पुत्र थे। सैयदना मोहम्मद बुरहानुद्दीन समुदाय के 52वें धर्मगुरु थे।

शिक्षा और सेवा को समर्पित रहा जीवन

शहजादा इदरीस ने भारत के बाहर भी समुदाय की सेवा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वह ब्रिटेन, आयरलैंड, स्वीडन और नॉर्वे में हिज होलीनेस के विशेष प्रतिनिधि रहे। इसके अलावा, दुबई स्थित सुल्तान अल-बोहरा फाउंडेशन की परिषद के सदस्य के रूप में भी उन्होंने जिम्मेदारी निभाई।

एएमयू के मुताबिक, उन्होंने अपने कार्यों के माध्यम से शांति, सद्भावना और सेवा का संदेश अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाया। शिक्षा के विस्तार और विद्यार्थियों के भविष्य को संवारने में उनके योगदान को लंबे समय तक याद किया जाएगा।

कुलपति प्रो. नईमा खातून ने जताया शोक

एएमयू की कुलपति प्रो. नईमा खातून ने शहजादा इदरीस बदरुद्दीन के निधन पर संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि उनके जाने से शिक्षा जगत ने एक ऐसे कर्मयोगी को खो दिया है, जिन्होंने खामोशी और दृढ़ता के साथ शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण काम किया।

उन्होंने कहा, “करीब पांच दशकों तक उन्होंने शिक्षा के उद्देश्य के लिए खुद को समर्पित रखा। विभिन्न महाद्वीपों में स्कूलों को विकसित करने, पाठ्यक्रमों को मजबूत बनाने और शिक्षकों को सशक्त करने में उनकी भूमिका रही। उनकी विरासत उन अनगिनत युवाओं के जीवन में जीवित रहेगी, जिन्हें उन्होंने बेहतर भविष्य की दिशा दिखाई।”

प्रो. नईमा खातून ने कहा कि एएमयू का हिज होलीनेस सैयदना मुफद्दल सैफुद्दीन के साथ गहरा और स्थायी संबंध रहा है। विश्वविद्यालय ने कुलाधिपति के रूप में उनके दो कार्यकाल के दौरान उनके स्नेह और उदार सहयोग को हमेशा संजोकर रखा है।

उन्होंने कहा कि इस दुख की घड़ी में एएमयू परिवार सैयदना मुफद्दल सैफुद्दीन और शोकाकुल परिवार के साथ खड़ा है। उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की कि वह परिजनों को इस अपूरणीय क्षति को सहन करने की शक्ति और धैर्य प्रदान करे तथा दिवंगत आत्मा पर अपनी असीम कृपा बरसाए।

प्रो-वाइस चांसलर और रजिस्ट्रार ने भी जताई संवेदना

एएमयू के प्रो-वाइस चांसलर प्रो. मोहम्मद मोहसिन खान ने कहा कि शिक्षा के प्रति शहजादा इदरीस का आजीवन समर्पण अनगिनत युवा मस्तिष्कों को आगे भी प्रेरित करता रहेगा।

वहीं, विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार प्रो. आसिम जफर ने कहा कि उनका निधन केवल दाऊदी बोहरा समुदाय ही नहीं, बल्कि शिक्षा और सेवा को महत्व देने वाले सभी लोगों के लिए बड़ी क्षति है।

प्रो-वाइस चांसलर और रजिस्ट्रार, दोनों ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की और शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।

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