ईरानी नेतृत्व पर पश्चिमी और इजरायली मीडिया के दावों का सच
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मुस्लिम नाउ ब्यूरो, तेहरान
ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी भारी तनाव के बीच दुष्प्रचार का खेल तेज हो गया है। ईरानी सत्ता के शीर्ष नेतृत्व को लेकर इजरायली और पश्चिमी मीडिया में तरह-तरह की खबरें फैलाई जा रही हैं। दावा किया जा रहा है कि राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई के रिश्तों में भारी खटास आ चुकी है।
ईरान विरोधी मीडिया आउटलेट्स का मकसद ईरानी नेतृत्व में फूट और आम जनता में भ्रम पैदा करना है। हाल ही में इजरायली मीडिया ने दावा किया था कि राष्ट्रपति पेजेशकियन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। जब राष्ट्रपति ने खुद इस खबर को खारिज कर दिया, तो अब एक नई और अजीबोगरीब कहानी गढ़ी जा रही है।
गुप्त मुलाकात की अजीबो-गरीब थ्योरी और इजरायली दावे
इजरायली मीडिया और ईरान इंटरनेशनल की रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि तेहरान में राष्ट्रपति पेजेशकियन और सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई के बीच एक बेहद रहस्यमयी बैठक हुई। गल्फ न्यूज समेत कई अरब मीडिया संस्थानों ने इस खबर को प्रमुखता से छापा है।
रिपोर्ट्स के अनुसार यह मुलाकात आधिकारिक कार्यालय के बजाय तेहरान में किसी अज्ञात जगह पर हुई। दावा है कि राष्ट्रपति को सुरक्षा घेरे में एक गाड़ी के पास ले जाया गया। उस गाड़ी के शीशे काफी काले थे। पेजेशकियन को गाड़ी के अंदर बिठाया गया, जहां सुप्रीम लीडर पहले से मौजूद थे।
दावा किया जा रहा है कि गाड़ी के अंदर इतना अंधेरा था कि दोनों एक-दूसरे का चेहरा भी नहीं देख सके। बातचीत केवल कुछ मिनट ही चली। इस दौरान राष्ट्रपति को सुप्रीम लीडर से हाथ मिलाने का मौका भी नहीं मिला।
सबसे ज्यादा चौंकाने वाला दावा यह है कि राष्ट्रपति पेजेशकियन मुलाकात के बाद खुद उलझन में पड़ गए। उन्होंने अपने करीबी सहयोगियों से पूछा कि क्या वे जिस व्यक्ति से बात कर रहे थे, वह सच में मोजतबा खामेनेई ही थे? उन्हें आवाज को लेकर भी शक था। हालांकि इन सभी दावों की कोई स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ईरानी सरकार ने भी इस तरह की रिपोर्ट्स पर आधिकारिक रूप से कोई बयान नहीं जारी किया है।
राष्ट्रपति पेजेशकियन के पुराने बयान और मीडिया दावों में अंतर
मीडिया में फैलाई जा रही इन खबरों और राष्ट्रपति के सार्वजनिक बयानों में भारी अंतर देखने को मिलता है। मई में व्यापार संघों के प्रतिनिधियों से बात करते हुए मसूद पेजेशकियन ने खुद सुप्रीम लीडर के साथ अपनी बैठक का जिक्र किया था।
उन्होंने बताया था कि उन्होंने सुप्रीम लीडर के साथ लगभग ढाई घंटे का समय बिताया। वह मुलाकात बेहद सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई थी। लेकिन विरोधी मीडिया अब दावा कर रहा है कि पेजेशकियन ने नीतिगत फैसलों में दरकिनार किए जाने के बाद इस्तीफे की धमकी दी थी, जिसके बाद ही यह कथित गुप्त मुलाकात संभव हो सकी थी।
रिपोर्ट्स में कहा गया है कि सुप्रीम लीडर के दफ्तर ने स्थापित प्रोटोकॉल को तोड़ते हुए आधिकारिक आवास पर मिलने से मना कर दिया था। इसके बजाय सुरक्षा दस्तों के जरिए गुप्त मुलाकात का जरिया चुना गया। दावा है कि राष्ट्रपति ने इस पूरे वाकये को अपना अपमान माना और बाद में आधिकारिक दफ्तर में दोबारा मिलने की मांग की, जिसे खारिज कर दिया गया।
अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी एएफपी के मुताबिक राष्ट्रपति पेजेशकियन ने सार्वजनिक तौर पर माना है कि मौजूदा हालात में सुप्रीम लीडर तक पहुंचना आसान नहीं है। उन्होंने कहा था कि इस समय उनसे संपर्क करना काफी कठिन है। लेकिन उनकी मौजूदगी ही सरकार और प्रशासन के लिए सबसे बड़ी ताकत है। राष्ट्रपति ने यह भी स्पष्ट किया कि आलोचक सुप्रीम लीडर की गलत छवि पेश करने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि बैठकों में उनका रुख हमेशा दयालु और तार्किक रहा है।
🇮🇷 Pezeshkian reveals how the deal actually got approved, and confirms the Supreme Leader is hard to reach:
— Mario Nawfal (@MarioNawfal) August 5, 2026
"Communicating with Ayatollah Mojtaba Khamenei is very difficult now, but his presence is a significant source of strength.
He had a perspective, and when a report was… https://t.co/axCbHD0AOj
अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत और मोजतबा खामेनेई का दौर
ईरान में नेतृत्व परिवर्तन बेहद कठिन दौर में हुआ है। 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हवाई हमले में ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई थी। इसके बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई ने देश के नए सुप्रीम लीडर के रूप में कमान संभाली।
पद संभालने के बाद से मोजतबा खामेनेई सार्वजनिक कार्यक्रमों से काफी दूर रहे हैं। वह सीधे मीडिया के सामने आने से बचते रहे हैं। ईरानी सरकारी मीडिया केवल उनके लिखित बयान ही जारी करता है। जुलाई में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने भी माना था कि सुरक्षा और रणनीतिक कारणों से बहुत कम लोग ही सर्वोच्च नेता से सीधे मिल पा रहे हैं।
इस बीच अमेरिकी राजनीति की तरफ से भी बयानबाजी तेज है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में मोजतबा खामेनेई को लेकर बड़ा दावा किया था। उन्होंने कहा था कि खामेनेई के बेटे का काम लगभग पूरा हो चुका है। हालांकि ट्रंप ने इस बात की कोई तार्किक वजह या ब्योरा साझा नहीं किया।
इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स और सरकार के बीच तनाव की अफवाहें
इजरायली मीडिया आउटलेट चैनल 14 का दावा है कि ईरान की अंदरूनी राजनीति में इस समय खींचतान चल रही है। रिपोर्ट के मुताबिक रणनीतिक और युद्ध से जुड़े अहम मामलों में सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी आईआरजीसी के कमांडर अहमद वाहिदी के फैसलों को तरजीह दे रहे हैं।
इस वजह से नागरिक सरकार और राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन का प्रभाव कम होता दिख रहा है। कहा जा रहा है कि विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर अपनी बात न सुने जाने से राष्ट्रपति नाराज चल रहे हैं।
हालात यह दर्शाते हैं कि ईरान इस समय बाहरी सैन्य हमलों के साथ-साथ भीषण सूचना युद्ध का भी सामना कर रहा है। इजरायल और पश्चिमी देश मीडिया रिपोर्ट्स के जरिए यह संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि तेहरान की सत्ता में अंदरूनी बिखराव शुरू हो चुका है। वहीं ईरानी प्रशासन इन खबरों को पूरी तरह से मनोवैज्ञानिक युद्ध का हिस्सा मान रहा है।
अगर इन दावों में थोड़ी भी सच्चाई है, तो यह दर्शाता है कि भीषण अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच ईरान का शीर्ष नेतृत्व अपनी सुरक्षा और रणनीतियों को लेकर कितना सतर्क और गोपनीय रवैया अपना रहा है। फिलहाल तेहरान की ओर से इन मनगढ़ंत दावों का जवाब देने के बजाय युद्ध की स्थिति से निपटने पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।

