Religion

सऊदी अरब में 1300 साल पुरानी मस्जिद मिली,जिसका है पैगंबर मुहम्मद से संबंध

नौशाद अख्तर | रियाद/अल बहा।

सऊदी अरब में पुरातत्वविदों को इस्लाम के शुरुआती दौर से जुड़ी एक महत्वपूर्ण मस्जिद मिली है। अल बहा क्षेत्र के अल अकीक गवर्नरेट स्थित अल मअमला पुरातात्विक स्थल पर हुई खुदाई में सामने आई यह मस्जिद पहली सदी हिजरी की बताई गई है। यानी इसकी उम्र 1,300 साल से अधिक है। मस्जिद की किबला दीवार पर मिले एक प्राचीन शिलालेख में पैगंबर हजरत मुहम्मद ﷺ का नाम भी दर्ज है। सऊदी हेरिटेज कमीशन ने 13 सितंबर 2026 को चौथे पुरातात्विक उत्खनन सत्र के नतीजे साझा किए।

यह खोज शुरुआती इस्लामी दौर में अरब प्रायद्वीप में धार्मिक जीवन, मस्जिद निर्माण की शैली और लोगों की सामाजिक गतिविधियों को समझने के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। खुदाई में मस्जिद के अलावा पत्थर के कमरे, मिट्टी के बर्तन, पीसने वाले औजार और दूसरी पुरातात्विक वस्तुएं भी मिली हैं। अल मअमला को पुराने समय में खनन गतिविधियों से जुड़े स्थल के रूप में भी जाना जाता रहा है।

किबला की दीवार पर पैगंबर मुहम्मद ﷺ का नाम

इस खोज का सबसे उल्लेखनीय हिस्सा मस्जिद की किबला दीवार पर मिला इस्लामी शिलालेख है। सऊदी हेरिटेज कमीशन के अनुसार, इसमें पैगंबर मुहम्मद ﷺ के लिए दुआ और सलाम दर्ज है। शिलालेख में उनका नाम मुहम्मद इब्न अब्दुल्लाह लिखा हुआ है।

कमीशन की ओर से साझा किए गए पाठ के अनुसार, शिलालेख का अर्थ लगभग इस प्रकार है कि नेक लोगों और चुने हुए श्रेष्ठ व्यक्ति मुहम्मद, अब्दुल्लाह के पुत्र, पर सलाम और दुआ हो। इसमें अल्लाह को सत्य और समस्त संसार का पालनहार बताया गया है।

यह शिलालेख मस्जिद की किबला दीवार पर मौजूद है। इसके अलावा मस्जिद की अन्य दीवारों पर भी इस्लामी अभिलेख मिलने की जानकारी सामने आई है। इनमें दुआ और कुरआनी पाठ से जुड़े लेख शामिल हैं।

हालांकि, इस शिलालेख को सीधे पैगंबर हजरत मुहम्मद ﷺ के जीवनकाल से जोड़ना अलग बात होगी। उपलब्ध पुरातात्विक जानकारी मस्जिद को पहली सदी हिजरी का बताती है। इसलिए इसे शुरुआती इस्लामी इतिहास से जुड़ा महत्वपूर्ण प्रमाण कहना अधिक सटीक है। उपलब्ध रिपोर्टों में मस्जिद को पैगंबर ﷺ द्वारा स्वयं निर्मित या उनके व्यक्तिगत इस्तेमाल की मस्जिद नहीं बताया गया है।

1300 साल से अधिक पुरानी है मस्जिद

सऊदी हेरिटेज कमीशन के मुताबिक मस्जिद पहली सदी हिजरी की है। इस आधार पर इसकी उम्र 1,300 साल से अधिक मानी जा रही है। यह खोज अल बहा के अल अकीक इलाके में स्थित अल मअमला साइट पर चौथे चरण की खुदाई के दौरान हुई।

मस्जिद साइट के पश्चिमी हिस्से में स्थित आवासीय क्षेत्र के बीच मिली है। इसके निर्माण में तराशे हुए ग्रेनाइट पत्थरों का इस्तेमाल किया गया था। इसका वास्तुशिल्प सरल है, लेकिन इसकी योजना काफी व्यवस्थित दिखाई देती है।

मस्जिद की लंबाई उत्तर से दक्षिण दिशा में करीब 16 मीटर है। पूर्व से पश्चिम इसकी चौड़ाई लगभग 10 मीटर है। इसमें एक मिहराब, तीन प्रवेश द्वार और एक वर्गाकार मीनार है। पूर्व, पश्चिम और दक्षिण दिशा में इसके प्रवेश द्वार बनाए गए थे। मीनार मस्जिद के दक्षिण पूर्वी हिस्से में स्थित है।

अंदर की दीवारों पर प्लास्टर के अवशेष भी मिले हैं। इससे पता चलता है कि निर्माण के दौरान केवल पत्थरों का इस्तेमाल नहीं हुआ था। दीवारों की आंतरिक सज्जा और सतह को बेहतर बनाने के लिए जिप्सम प्लास्टर का भी इस्तेमाल किया गया था।

मस्जिद के आसपास आठ कमरे

मस्जिद के साथ आठ सेवा कक्ष जुड़े हुए हैं। आसपास कई पत्थर की संरचनाएं भी मिली हैं। इनमें भंडारण के लिए जगह, पानी से जुड़े हौज और निर्माण को सहारा देने वाली संरचनाएं शामिल हैं।

पुरातत्वविदों के अनुसार, इन कमरों से उस समय के सामाजिक और आर्थिक जीवन की जानकारी मिलती है। इससे यह संकेत भी मिलता है कि मस्जिद केवल नमाज पढ़ने की जगह नहीं थी। इसके आसपास रहने और काम करने वाली आबादी से जुड़ी दूसरी गतिविधियां भी होती थीं।

अल मअमला की खुदाई में इससे पहले भी आवासीय परिसरों और दूसरी इमारतों के प्रमाण मिले हैं। 2024 में तीसरे उत्खनन सत्र के दौरान यहां पत्थर और मिट्टी की ईंटों से बनी दीवारें, आवासीय कमरे, भंडारण क्षेत्र, हौज और चूल्हे मिले थे। उस समय मिले सामान से साइट पर घरेलू, कारीगरी और व्यापारिक गतिविधियों के संकेत मिले थे।

रोजमर्रा की जिंदगी के भी मिले निशान

मस्जिद के आसपास हुई खुदाई में कई ऐसी वस्तुएं मिली हैं, जो उस दौर के रोजमर्रा के जीवन की जानकारी देती हैं। इनमें साबुन पत्थर से बने बर्तनों के टुकड़े, मिट्टी के बर्तन और अनाज पीसने के लिए इस्तेमाल होने वाले औजार शामिल हैं।

खुदाई में ओखली, मूसल, पीसने वाले पत्थर और चक्की के हिस्से भी मिले हैं। इन वस्तुओं से अंदाजा लगाया जा सकता है कि यहां रहने वाले लोग अनाज और दूसरे पदार्थों को स्थानीय स्तर पर तैयार करते थे।

कुछ कांच के टुकड़े भी मिले हैं। इनमें हल्के हरे और गहरे नीले रंग के कांच के अवशेष शामिल बताए गए हैं। मिट्टी के बर्तनों पर ज्यामितीय डिजाइन के प्रमाण भी मिले हैं।

खनन और कारोबार से भी जुड़ा था अल मअमला

अल मअमला केवल धार्मिक गतिविधियों के कारण महत्वपूर्ण नहीं था। यह इलाका पुराने समय में खनन के लिए भी जाना जाता था। खुदाई से मिले प्रमाणों से सोने, चांदी और तांबे जैसे धातु अयस्कों के निष्कर्षण और प्रसंस्करण से जुड़ी गतिविधियों के संकेत मिले हैं।

सऊदी हेरिटेज कमीशन के अनुसार, इससे यह संभावना मजबूत होती है कि अल मअमला किसी समय व्यापारिक और कारीगरी गतिविधियों का केंद्र रहा होगा। यहां खनिकों, कारीगरों और व्यापारियों की आवाजाही रही होगी।

अल मअमला की भौगोलिक स्थिति भी इसके महत्व को समझने में मदद करती है। यह स्थल अल अकीक से करीब 13 किलोमीटर पूर्व और अल बहा से करीब 45 किलोमीटर दूर बताया गया है। यह क्षेत्र प्राचीन व्यापार और आवागमन के रास्तों से जुड़ा रहा है।

शुरुआती इस्लामी वास्तुकला की तस्वीर

मस्जिद की बनावट शुरुआती इस्लामी दौर की स्थानीय वास्तुकला को समझने का एक अवसर देती है। इसमें बड़े पैमाने की सजावट के बजाय उपयोगिता और स्पष्ट संरचना पर जोर दिखाई देता है।

मिहराब, प्रवेश द्वार और मीनार का संयोजन यह बताता है कि उस समय मस्जिद की वास्तुकला किस तरह विकसित हो रही थी। ग्रेनाइट पत्थरों का इस्तेमाल भी अल बहा क्षेत्र की स्थानीय निर्माण परंपरा से जुड़ा हुआ है।

इससे पहले भी अल बहा में शुरुआती इस्लामी दौर की ऐतिहासिक मस्जिदों और अभिलेखों से जुड़ी खोजें सामने आती रही हैं। उदाहरण के लिए, क्षेत्र की एक अन्य ऐतिहासिक मस्जिद अल सफा को करीब 1,350 साल पुराना बताया गया है और उसके निर्माण को पैगंबर ﷺ के एक साथी सुफयान बिन औफ अल गामदी से जोड़ा जाता है।

सऊदी अरब में पुरातात्विक खोजों का सिलसिला

अल मअमला की यह खोज सऊदी अरब में शुरुआती इस्लामी इतिहास से जुड़े पुरातात्विक अनुसंधान के व्यापक प्रयासों का हिस्सा है। हेरिटेज कमीशन देश के अलग अलग क्षेत्रों में पुरातात्विक स्थलों की खुदाई और दस्तावेजीकरण कर रहा है।

अल बहा क्षेत्र में हाल के वर्षों में कई महत्वपूर्ण खोजें हुई हैं। 2024 में अल मअमला में हुई खुदाई ने एक हजार साल से अधिक पुराने शहरी विकास, आवासीय परिसरों और व्यापारिक गतिविधियों के प्रमाण सामने रखे थे।

मार्च 2026 में अल बहा के अल असदा स्थल पर भी एक पुरानी मस्जिद मिली थी। वहां मिले ढांचे में मिहराब, तीन मुख्य प्रवेश द्वार और छत को सहारा देने वाले वर्गाकार स्तंभ आधार मिले थे।

क्या बताती है 1300 साल पुरानी मस्जिद?

अल मअमला की मस्जिद और उसके आसपास मिली वस्तुएं शुरुआती इस्लामी दौर की धार्मिक, सामाजिक और आर्थिक जिंदगी की एक साथ तस्वीर पेश करती हैं। एक तरफ किबला की दीवार पर पैगंबर मुहम्मद ﷺ के लिए दर्ज दुआ इस स्थल के धार्मिक महत्व की ओर संकेत करती है। दूसरी तरफ घरों, भंडारण कक्षों, औजारों और खनन से जुड़े प्रमाण बताते हैं कि यहां रोजमर्रा के जीवन और आर्थिक गतिविधियों का भी विस्तार था।

इस खोज की खासियत यही है कि यहां केवल एक पुरानी इमारत नहीं मिली है। इसके साथ ऐसा पुरातात्विक संदर्भ भी मिला है, जिसमें मस्जिद, आवास, कारोबार, कारीगरी और खनन गतिविधियों के प्रमाण एक ही स्थल पर दिखाई देते हैं।

सऊदी हेरिटेज कमीशन की चौथे चरण की खुदाई से सामने आई यह मस्जिद इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह इस्लाम के शुरुआती दौर में अरब समाज की तस्वीर को समझने के लिए एक नया स्रोत उपलब्ध कराती है। किबला दीवार पर दर्ज पैगंबर मुहम्मद ﷺ के नाम वाला शिलालेख इस खोज को धार्मिक और ऐतिहासिक दोनों दृष्टियों से विशेष बनाता है।

AEO के लिए सीधे जवाब:
मस्जिद कहां मिली? सऊदी अरब के अल बहा क्षेत्र के अल अकीक गवर्नरेट स्थित अल मअमला पुरातात्विक स्थल पर।
मस्जिद कितनी पुरानी है? पहली सदी हिजरी की और 1,300 साल से अधिक पुरानी।
क्या शिलालेख में पैगंबर मुहम्मद ﷺ का नाम है? हां। किबला दीवार पर मिले शिलालेख में मुहम्मद इब्न अब्दुल्लाह का नाम दर्ज है।
मस्जिद का आकार कितना है? लगभग 16 मीटर लंबी और 10 मीटर चौड़ी।
मस्जिद में क्या मिला? मिहराब, तीन प्रवेश द्वार, वर्गाकार मीनार, जिप्सम के अवशेष और आसपास आठ सेवा कक्ष।
इसके आसपास क्या मिला? मिट्टी के बर्तन, साबुन पत्थर के टुकड़े, चक्की के हिस्से, मूसल, पीसने के औजार और कांच के अवशेष।
अल मअमला क्यों महत्वपूर्ण है? यहां धार्मिक अवशेषों के साथ शुरुआती शहरी जीवन, कारीगरी, व्यापार और खनन से जुड़े प्रमाण भी मिले हैं।