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नसीराबाद अजमेर में 148वां यूनानी मेडिकल कैंप संपन्न: 600 मरीजों का हुआ निःशुल्क उपचार

अजमेर,

स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए ऑल इंडिया यूनानी तिब्बी कांग्रेस ने जमीयत उलेमा के सहयोग से राजस्थान के अजमेर जिले की नसीराबाद तहसील में 148वें यूनानी मेडिकल कैंप का सफल आयोजन किया। इस शिविर में दिल्ली और देश के विभिन्न हिस्सों से आए यूनानी विशेषज्ञों ने अपनी सेवाएँ दीं। कार्यक्रम की शुरुआत में राजस्थानी परंपरा के अनुसार चिकित्सकों का साफा (पगड़ी) पहनाकर भव्य स्वागत किया गया।

स्वास्थ्य शिविर की मुख्य झलकियाँ

इस एक दिवसीय कैंप में नसीराबाद और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से लगभग 600 मरीजों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। शिविर की विशेषताएँ निम्नलिखित रहीं:

  • निःशुल्क परामर्श एवं उपचार: विभिन्न जटिल एवं सामान्य रोगों के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों ने मुफ्त परामर्श दिया।
  • मधुमेह (Diabetes) की विशेष जाँच: शुगर के मरीजों के लिए अलग से विशेष डेस्क स्थापित की गई थी, जहाँ सैकड़ों लोगों की रक्त-शर्करा (Blood Sugar) की जाँच की गई।
  • मुफ्त दवा वितरण: जाँच के उपरांत जरूरतमंद मरीजों को यूनानी औषधियाँ भी प्रदान की गईं।

ग्रामीण क्षेत्रों में शुगर का बढ़ता प्रकोप: एक गंभीर चुनौती

शिविर के दौरान मीडिया को संबोधित करते हुए ऑल इंडिया यूनानी तिब्बी कांग्रेस के महासचिव सैयद अहमद खान ने एक अत्यंत चौंकाने वाला और चिंताजनक मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि आमतौर पर यह माना जाता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में सादा खान-पान और प्रदूषण मुक्त वातावरण के कारण जीवनशैली से जुड़ी बीमारियाँ कम होती हैं, लेकिन ज़मीनी हकीकत इसके उलट है।

“यह अत्यंत विस्मयकारी है कि गाँवों में शुगर के मरीजों की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि हो रही है। जहाँ लोग शारीरिक श्रम अधिक करते हैं और ताजी हवा में रहते हैं, वहाँ मधुमेह का इस कदर पैर पसारना एक बड़े खतरे का संकेत है।” — सैयद अहमद खान

राजस्थान सरकार से अनुसंधान की मांग

सैयद अहमद खान ने राजस्थान सरकार और स्वास्थ्य मंत्रालय से अपील की कि वे इस विषय को गंभीरता से लें। उन्होंने माँग की कि राज्य सरकार को ग्रामीण इलाकों में बढ़ते मधुमेह पर विशेष शोध (Research) कराना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि जब तक इस वृद्धि के मूल कारणों (जैसे पानी की गुणवत्ता, जेनेटिक्स या आहार में आया बदलाव) का पता नहीं चलेगा, तब तक इसका प्रभावी समाधान संभव नहीं है।


तिब्बी कांग्रेस का मिशन: घर-घर तक स्वास्थ्य सेवा

महासचिव ने आगे बताया कि ऑल इंडिया यूनानी तिब्बी कांग्रेस देश भर में इन शिविरों का आयोजन इसलिए करती है ताकि उन लोगों तक पहुँचा जा सके जो अस्पताल जाने में सक्षम नहीं हैं या अपनी बीमारियों के प्रति जागरूक नहीं हैं। उन्होंने कहा:

  1. समय पर पहचान: गाँवों में लोग अक्सर नियमित चेकअप नहीं कराते, जिससे शुगर जैसी बीमारियाँ शरीर को अंदर से खोखला कर देती हैं। कैंप के माध्यम से इन बीमारियों की प्रारंभिक स्तर पर पहचान संभव हो पाती है।
  2. यूनानी चिकित्सा की प्रभावशीलता: यूनानी पद्धति न केवल रोग का उपचार करती है, बल्कि जीवनशैली में सुधार लाकर भविष्य में होने वाली बीमारियों से भी बचाती है।

जनता से अपील और निष्कर्ष

शिविर के समापन पर आयोजकों और चिकित्सकों ने स्थानीय निवासियों से आग्रह किया कि वे अपने स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही न बरतें। उन्होंने जोर दिया कि शुगर एक ‘साइलेंट किलर’ है, जिसे केवल नियमित जाँच और सही आहार से नियंत्रित किया जा सकता है।

नसीराबाद में आयोजित यह 148वां कैंप न केवल मरीजों के लिए वरदान साबित हुआ, बल्कि इसने सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली के सामने ग्रामीण स्वास्थ्य को लेकर नए सवाल भी खड़े कर दिए हैं। स्थानीय नागरिकों ने संस्था के इस मानवीय कार्य की सराहना की और भविष्य में भी ऐसे आयोजनों की उम्मीद जताई।


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