मुहर्रम की पहली तारीख पर इज़रायल का खूनी हमला : एक दिन में 100 फिलिस्तीनियों की मौत
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मुस्लिम नाउ ब्यूरो, दुबई।
ग़ाज़ा पर इज़रायली हमले थमने का नाम नहीं ले रहे। मुहर्रम की पहली तारीख को, जब दुनिया भर के मुसलमान मातम और शांति का संदेश दे रहे थे, इज़रायली सेना ने ग़ाज़ा में ऐसा कहर बरपाया कि 100 से ज़्यादा फिलिस्तीनियों की जान चली गई।
यह हमला सिर्फ़ गोलियों और मिसाइलों का नहीं था, यह उस अन्याय का प्रतीक बन गया है, जो आज भी दुनिया के सबसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में इंसानियत के खिलाफ किया जा रहा है।
ईरान जब इज़रायल पर जवाबी हमलों में उसके सैन्य ठिकानों को ध्वस्त कर रहा है, तो इज़रायल दुनिया के सामने खुद को “पीड़ित” साबित करने में जुटा है। लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि ग़ाज़ा में उसकी बर्बरता थमने का नाम नहीं ले रही। मुहर्रम के दिन, जब मातम किया जा रहा था, इज़रायल ने एक के बाद एक बम बरसाकर ग़ाज़ा को खंडहर में बदल दिया।
अनादोलु एजेंसी की रिपोर्ट: हर तरफ तबाही, हर चेहरा मातम
तुर्की की समाचार एजेंसी अनादोलु ने बताया कि बुधवार (25 जून) को ग़ाज़ा पट्टी पर हुए इज़रायली हमलों में कम से कम 100 फिलिस्तीनी मारे गए, जबकि सैकड़ों घायल हुए। इनमें बच्चे, महिलाएं और वे लोग शामिल थे, जो केवल मानवीय सहायता और भोजन लेने के लिए बाहर आए थे।
- पूर्वी ग़ाज़ा के शाजैया इलाके में हुए दो हवाई हमलों में दो बच्चों सहित 17 लोगों की मौत हुई।
- मध्य ग़ाज़ा के नेत्ज़ारिम कॉरिडोर में सहायता पाने की कोशिश कर रहे लोगों पर गोलीबारी में 8 लोग मारे गए।
- राफा शहर के पश्चिमी इलाके में तीन सहायता कर्मियों को गोली मार दी गई।
- पश्चिमी ग़ाज़ा शहर में एक मकान पर हमले में चार बच्चों समेत 9 लोग मारे गए।
- ग़ाज़ा शहर के उत्तर-पश्चिम में एक मां और उसके दो बच्चों समेत 5 लोगों की जान चली गई।
हर तरफ मलबा, हर घर मातम
- जबलिया अल-नजला में दो घरों को उड़ाया गया, जहां से तीन शव बरामद किए गए और कई लोग अभी भी मलबे में दबे हुए बताए जा रहे हैं।
- डेर अल-बलाह और नुसैरात कैंप पर बमबारी में 10 लोगों की मौत हुई।
- खान यूनिस के अबासन कस्बे में एक घर के मलबे से एक युवक का शव निकाला गया, और कुल 5 लोग मारे गए।
- ओमारी मस्जिद के पास इकट्ठा हुए लोगों पर भी बम गिराया गया, जिससे 2 लोग मारे गए।
ग़ाज़ा के अल-शती शरणार्थी शिविर में एक मकान पर हमले में 5 बच्चों सहित 9 लोग मारे गए। एक अन्य हमले में शाजैया में 12 लोग मारे गए।
इज़रायली आक्रमण: अब तक की सबसे बड़ी त्रासदी
7 अक्टूबर 2023 को शुरू हुए इस संघर्ष ने अब तक 80,000 से अधिक फिलिस्तीनियों की जान ले ली है, जिनमें अधिकांश महिलाएं और बच्चे हैं।
20 महीनों से चल रहे इस युद्ध में इज़रायली सेना ने ग़ाज़ा की अधिकांश आबादी को विस्थापित कर दिया है, हजारों इमारतें ध्वस्त हो चुकी हैं और फिलिस्तीनी क्षेत्र पूरी तरह से मानवीय आपदा की चपेट में है।
इज़रायल के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय कार्रवाइयाँ
- नवंबर 2024 में, अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) ने इज़रायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और पूर्व रक्षा मंत्री याओव गैलेंट के खिलाफ ग़ाज़ा में युद्ध अपराध और मानवता के खिलाफ अपराध के आरोप में गिरफ्तारी वारंट जारी किया।
- साथ ही, अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) में इज़रायल के खिलाफ नरसंहार के आरोप में मुकदमा चल रहा है।
फिर भी ग़ाज़ा नहीं झुका
इन बर्बर हमलों के बावजूद ग़ाज़ा के लड़ाके पीछे नहीं हटे हैं। एक दिन पहले ही, उन्होंने इज़रायली टैंक को विस्फोट से उड़ाकर 7 सैनिकों को मार गिराया। युद्ध जारी है, लेकिन अब यह सिर्फ़ बंदूक़ों की नहीं, इंसानियत और ज़ुल्म के बीच जंग बन चुकी है।
ग़ाज़ा की कहानी, आज के कर्बला से कम नहीं। यज़ीदियत के सामने खड़े हुसैनी हौसले को दुनिया सलाम कर रही है।

