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टैलेंट की जीत, धर्म के सौदागरों की हार : सबीह खान बने Apple के नए COO

मुस्लिम नाउ ब्यूरो, नई दिल्ली

भारत के मुरादाबाद में जन्मे एक साधारण से बालक ने वैश्विक तकनीकी दिग्गज Apple के शीर्ष नेतृत्व में पहुंचकर आज एक ऐतिहासिक मिसाल कायम कर दी है। सबीह खान, जिन्हें हाल ही में Apple का मुख्य परिचालन अधिकारी (Chief Operating Officer – COO) नियुक्त किया गया है, सिर्फ एक व्यक्ति की सफलता की कहानी नहीं हैं, बल्कि वे उस भारत की जीवित पहचान हैं जिसे अक्सर सांस्कृतिक, धार्मिक और राजनीतिक द्वेष के धुंधले आईनों में धकेलने की कोशिश की जाती है।

🌍 एक संदेश उन चेहरों के लिए जो मुसलमानों को ‘पंचरवाला’ समझते हैं

सबीह खान की यह ऐतिहासिक पदोन्नति उन सभी लोगों के लिए करारा जवाब है जो भारत के मुसलमानों को सिर्फ एक वोट बैंक, एक सांस्कृतिक हाशिया, या सामाजिक अवरोध मानते हैं। यह उन चेहरों पर करारा तमाचा है जो मुसलमानों को जेल की सलाखों, भीड़ की हिंसा, और सांस्कृतिक बहिष्कार के जरिए नीचा दिखाने का प्रयास करते हैं।

कर्नाल की सोफिया के बाद, अब सबीह खान जैसे वैश्विक स्तर के मुसलमान भारत का नाम उस मंच पर ले जा रहे हैं जहाँ ना कोई धर्म देखा जाता है, ना जात — सिर्फ काबिलियत, मेहनत और नेतृत्व की चमक को महत्व दिया जाता है। ये वो असली ‘भारत’ है जो अब्दुल कलाम से लेकर शाहरुख खान तक, हर उस व्यक्ति में बसता है जो बिना शोर मचाए दुनिया में देश का झंडा ऊँचा कर रहा है।


📈 Apple में तीन दशकों की यात्रा: समर्पण और नेतृत्व का प्रतिरूप

Apple जैसी तकनीकी दिग्गज कंपनी में काम करते हुए 30 वर्षों तक अपने समर्पण, नेतृत्व और दूरदृष्टि का परिचय देने वाले सबीह खान को COO बनाए जाने का निर्णय केवल पदोन्नति नहीं, बल्कि Apple की आंतरिक प्रतिभा और दीर्घकालिक सोच की एक ठोस मिसाल है।

1995 में Apple की खरीद टीम में शामिल होने के बाद, उन्होंने अपने काम से लगातार कंपनी के संचालन को मजबूत किया। जेफ विलियम्स के उत्तराधिकारी के रूप में उनकी नियुक्ति यह दर्शाती है कि वे इस भूमिका के लिए पूरी तरह उपयुक्त हैं।

GE Plastics में एक तकनीकी विशेषज्ञ के रूप में अपने करियर की शुरुआत करने वाले सबीह ने Apple में संचालन को वैश्विक स्तर पर उस मुकाम तक पहुँचाया, जहाँ अब वह स्वयं कंपनी की रणनीतिक योजना का केंद्रीय हिस्सा बन चुके हैं।


🇮🇳 भारतीय जड़ें, वैश्विक पहचान

सबीह खान की जड़ें भारत के उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में हैं। वे वहाँ पैदा हुए, और फिर परिवार के साथ सिंगापुर और बाद में अमेरिका चले गए। उन्होंने Tufts University से मैकेनिकल इंजीनियरिंग और अर्थशास्त्र की डिग्री ली, और फिर Rensselaer Polytechnic Institute से मास्टर्स किया।

उनकी यह शैक्षणिक और पेशेवर यात्रा इस बात की प्रतीक है कि भारत की भूमि न केवल कर्मयोगी पैदा करती है, बल्कि विश्व नेतृत्व को आकार देने वाले व्यक्तित्व भी तैयार करती है।


💰 अनुमानित वेतन और वैश्विक मान्यता

हालांकि उनका वर्तमान वेतन सार्वजनिक नहीं है, लेकिन जेफ विलियम्स के वेतन मानकों के अनुसार सबीह खान का वार्षिक वेतन लगभग 20 से 25 मिलियन डॉलर के बीच अनुमानित है। इसमें शामिल है:

  • मूल वेतन: लगभग 10 लाख डॉलर
  • प्रदर्शन-आधारित बोनस
  • इक्विटी आधारित प्रोत्साहन – जो Apple के शेयरों के रूप में मिलते हैं

यह केवल आर्थिक सफलता की कहानी नहीं, बल्कि उस विश्वास की कहानी है जो एक भारतीय मुसलमान पर दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनी ने जताया है।


🏆 एक प्रभावशाली भारतीयों की वैश्विक सूची में नाम दर्ज

सबीह खान अब उन भारतीय मूल के वैश्विक सीईओ और सी-सूट लीडर्स की विशिष्ट सूची में शामिल हो गए हैं, जिसमें शामिल हैं:

  • सत्य नडेला – Microsoft के चेयरमैन और CEO
  • सुंदर पिचाई – Alphabet और Google के CEO
  • शांतनु नारायण – Adobe के CEO
  • अरविंद कृष्णा – IBM के CEO
  • रेशमा केवलरमानी, वसंत नरसिम्हन, अनिरुद्ध देवगन, लीना नायर जैसे दर्जनों नाम

इन सभी का भारत से जुड़ाव इस बात का प्रमाण है कि भारत में जन्मा प्रतिभाशाली युवा चाहे किसी भी पृष्ठभूमि से हो, वह वैश्विक मंचों पर नेतृत्व करने में सक्षम है।


एक सांस्कृतिक-सामाजिक संदेश भी

सबीह खान की सफलता सिर्फ एक कॉरपोरेट न्यूज़ नहीं है। यह भारत के मुसलमानों, दलितों, हाशिए पर पड़े हर वर्ग के लिए एक प्रेरणा है कि तुम्हारी पहचान तुम्हारी मेहनत और काबिलियत है, न कि तुम्हारे नाम या धर्म से तय होती है।

यह उन विचारधाराओं के लिए भी चेतावनी है जो नफ़रत के सहारे राजनीति को साधते हैं। भारत की असली पहचान ताजमहल या ट्रोल नहीं, बल्कि टैलेंट है।


🔚 निष्कर्ष

सबीह खान की यह उपलब्धि सिर्फ एक व्यक्ति का कैरियर माइलस्टोन नहीं है, बल्कि यह उस भारत की विजय गाथा है जिसे विविधता में एकता का आदर्श माना जाता था – और जिसे आज कुछ ताकतें धर्म और जाति के नाम पर बाँटना चाहती हैं।

सबीह खान इस बात का जीता-जागता सबूत हैं कि भारत का भविष्य न तो घृणा में है, न ही भेदभाव में – बल्कि शिक्षा, मेहनत और समर्पण में है।

“भारत को नफ़रत से नहीं, नायकों से जाना जाएगा — और सबीह खान उनमें से एक हैं।”