वक्फ संशोधन कानून के खिलाफ नागपुर में मुस्लिम-बौद्ध एकजुटता, इंटरफेथ सम्मेलन में उमड़ी भीड़
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मुस्लिम नाउ ब्यूरो, नागपुर
नागपुर के इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में रविवार को आयोजित अंतरधार्मिक सम्मेलन ने धार्मिक स्वतंत्रता और संविधानिक अधिकारों की रक्षा के मुद्दे पर एकजुटता का मजबूत संदेश दिया। यह सम्मेलन अखिल भारतीय मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) और भारतीय भागीदारी मिशन (BBM) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया था।

धार्मिक स्वतंत्रता और अनुच्छेद 25-26 पर केंद्रित सम्मेलन
सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य हाल ही में लागू किए गए उन कानूनों पर चर्चा करना था, जिनके बारे में कहा जा रहा है कि वे भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 के तहत गारंटीकृत धार्मिक स्वतंत्रता और धार्मिक संस्थाओं की स्वायत्तता का उल्लंघन करते हैं। मुस्लिम और बौद्ध समुदायों के प्रमुख नेताओं और कार्यकर्ताओं की मौजूदगी ने इस सम्मेलन को विशेष बना दिया।
उमड़ी अपार भीड़
आयोजकों ने पहले से अतिरिक्त बैठक व्यवस्था की थी, फिर भी इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर लोगों से खचाखच भर गया। यह भीड़ इस बात का प्रमाण थी कि संविधानिक अधिकारों और धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर दोनों समुदायों में गहरी चिंता और एकजुटता का भाव है।

प्रमुख वक्ताओं ने रखे विचार
सम्मेलन में अखिल भारतीय मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रवक्ता क़ासिम रसूल इलियास, मौलाना फ़ज़लुर रहीम मुजद्दिदी (महासचिव, AIMPLB), एडवोकेट डॉ. सुरेश माने (संस्थापक-प्रधान, भारतीय भागीदारी मिशन), एडवोकेट फ़िरदोस मिर्ज़ा और एडवोकेट रायपुरे प्रमुख वक्ता थे।
कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. विनोद रंगारी (जिला अध्यक्ष, BBM) के स्वागत भाषण से हुई। इसके बाद अब्दुल रऊफ शेख (पूर्व सीईओ, महाराष्ट्र वक्फ बोर्ड) ने सम्मेलन की पृष्ठभूमि और उद्देश्य पर प्रकाश डाला।
एडवोकेट फ़िरदोस मिर्ज़ा ने अल्पसंख्यकों के संविधानिक अधिकारों पर विस्तृत चर्चा की। क़ासिम रसूल इलियास ने वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 की आलोचना करते हुए कहा कि यह कानून मुस्लिम धार्मिक संस्थाओं की स्वतंत्रता के लिए खतरा है और मूलभूत अधिकारों का हनन करता है।
एडवोकेट रायपुरे ने बोधगया मंदिर से जुड़े विवाद पर प्रकाश डाला, वहीं डॉ. रविंद्र माने ने इस सम्मेलन को “अंतरधार्मिक एकता की नई शुरुआत” बताया।
मौलाना मुजद्दिदी ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में असंवैधानिक कानूनों के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध की आवश्यकता पर जोर दिया।

सम्मेलन की सफलता और समापन
कार्यक्रम का संचालन डॉ. आवेस हसन ने किया, जबकि मौलाना अब्दुल वहाब पारेख ने आभार व्यक्त किया। सम्मेलन का समापन मौलाना सिराज अहमद क़ासमी की दुआ से हुआ।
सफलता के पीछे समर्पित टीम की मेहनत
इस ऐतिहासिक आयोजन की सफलता के पीछे वहदते इस्लामी के इरशाद साहब, एमएमएनएफ के रफ़ीक भाई, जमीयत से अतीक कुरैशी, सीएसआरई, आसरा फाउंडेशन और अन्य संगठनों की टीमों की अथक मेहनत थी।
क्यों महत्वपूर्ण है यह सम्मेलन?
यह सम्मेलन केवल मुस्लिम समुदाय के लिए ही नहीं, बल्कि सभी धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए भी एक अहम पहल है। वर्तमान समय में जब कई नए कानून धार्मिक स्वतंत्रता और संस्थागत स्वायत्तता पर सवाल खड़े कर रहे हैं, ऐसे आयोजनों से संविधान के मूलभूत मूल्यों की रक्षा का संकल्प मजबूत होता है।

