ऑपरेशन सिंदूर पर पाकिस्तान का दावा: हमने भारत के चार राफेल गिराए, इसने युद्धविराम की गुहार लगाई
मुस्लिम नाउ ब्यूरो, इस्लामाबाद
ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारत द्वारा की गई सैन्य कार्रवाई के बाद पाकिस्तान पूरी तरह से बौखला गया है। अपनी झेंप मिटाने और जवाबी सफलता का दावा करने के लिए अब उसने यह कहना शुरू कर दिया है कि उसने इस ऑपरेशन के दौरान भारत को भारी नुकसान पहुंचाया। पाकिस्तान का दावा है कि 6 और 7 मई की रात को जब भारतीय लड़ाकू विमानों ने सीमा पार हमला किया, तो पाकिस्तानी वायुसेना के ऑपरेशन रूम की स्क्रीन लाल हो गई थी। इससे भारत के दर्जनों लड़ाकू विमानों की स्थिति साफ दिखाई देने लगी।
ब्रिटिश समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, उस समय पाकिस्तान के एयर चीफ मार्शल ज़हीर अहमद बाबर सिद्धू ऑपरेशन रूम के पास एक कमरे में गद्दे पर सो रहे थे, ताकि तत्काल निर्णय ले सकें। जैसे ही भारतीय हमले की आशंका बनी, उन्होंने चीन निर्मित J-10C लड़ाकू विमानों को उड़ान भरने का आदेश दे दिया। पाकिस्तान वायुसेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सिद्धू ने अपने पायलटों को भारत के फ्रांसीसी राफेल विमानों को निशाना बनाने का निर्देश दिया, जिन पर भारत को गर्व है।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने दावा किया कि पाकिस्तानी वायुसेना ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चार राफेल विमानों को मार गिराया और भारत को अंततः युद्धविराम की गुहार लगानी पड़ी। उनके मुताबिक, अंधेरे में करीब एक घंटे तक चली इस हवाई भिड़ंत में दोनों तरफ से लगभग 110 विमान शामिल थे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह हालिया दशकों की सबसे बड़ी हवाई लड़ाई थी। रॉयटर्स ने अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से कहा कि J-10C ने कम से कम एक राफेल विमान को मार गिराया था, जिससे चीनी हथियार प्रणालियों की प्रभावशीलता को लेकर सैन्य हलकों में नई चर्चा छिड़ गई है।
इस खबर के सामने आने के बाद राफेल के निर्माता डसॉल्ट कंपनी के शेयरों में गिरावट आई और इंडोनेशिया जैसे संभावित खरीदारों ने J-10C की ओर रुख करने की बात कही। हालांकि, रॉयटर्स द्वारा किए गए दो भारतीय और तीन पाकिस्तानी अधिकारियों के साक्षात्कार में यह सामने आया कि समस्या राफेल की नहीं, बल्कि भारत की खुफिया विफलता की थी। भारतीय अधिकारियों ने स्वीकार किया कि राफेल पायलट यह मानकर चल रहे थे कि वे पाकिस्तानी मिसाइल रेंज से बाहर हैं, जबकि वास्तविक रेंज लगभग 200 किलोमीटर थी।
पाकिस्तानी अधिकारी ने बताया कि उन्होंने भारतीय पायलटों पर घात लगाकर हमला किया और साथ ही दिल्ली के सिस्टम पर इलेक्ट्रॉनिक युद्धक हमला भी किया, ताकि भ्रम की स्थिति बनाई जा सके। हालांकि भारतीय पक्ष ने इस इलेक्ट्रॉनिक हमले से इनकार किया है, लेकिन पाकिस्तानी अधिकारियों का दावा है कि उन्होंने चीनी PL-15 मिसाइलों के जरिए 200 किलोमीटर की दूरी से राफेल विमानों को निशाना बनाया।

फ्रांस की वायुसेना के प्रमुख ने भी जून में पत्रकारों को बताया था कि उन्होंने एक राफेल और दो अन्य भारतीय विमानों को गिराए जाने के प्रमाण देखे हैं। डसॉल्ट कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने भी फ्रांसीसी सांसदों को इसी तरह की जानकारी दी थी।
रॉयटर्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान ने एक ‘किल चेन’ नेटवर्क विकसित किया है, जिसमें हवाई, जमीनी और अंतरिक्ष आधारित सेंसरों को आपस में जोड़ा गया है। इस नेटवर्क में पाकिस्तानी डेटा लिंक-17 प्रणाली भी शामिल है, जो चीनी हथियार प्रणालियों को अन्य सैन्य उपकरणों से जोड़ती है। इससे J-10C जैसे विमान रडार बंद करके भी उड़ सकते हैं, जिससे भारतीय रडार उन्हें पकड़ नहीं पाते।
भारत भी ऐसा ही नेटवर्क बनाने की प्रक्रिया में है, लेकिन चूंकि भारत ने अपने सैन्य प्लेटफॉर्म कई अलग-अलग देशों से खरीदे हैं, इसलिए उसके लिए यह कार्य अधिक जटिल हो गया है। ब्रिटिश एयर मार्शल (सेवानिवृत्त) ग्रेग बैगवेल ने इस घटना को लेकर कहा कि इस लड़ाई ने किसी भी सैन्य शक्ति की निर्णायक श्रेष्ठता साबित नहीं की, लेकिन यह जरूर दिखाया कि युद्ध में “स्थितिजन्य जागरूकता” सबसे बड़ा हथियार है।
7 मई को भारत ने पाकिस्तान में कई ठिकानों पर हमला किया, जिसके बाद पाकिस्तानी वायुसेना प्रमुख ने अपनी नीति में बदलाव कर रक्षात्मक से आक्रामक रवैया अपनाया। पाकिस्तानी अधिकारियों ने दावा किया कि भारत ने लगभग 70 लड़ाकू विमान तैनात किए, जिससे PL-15 मिसाइलों को कई लक्ष्यों पर हमले का अवसर मिला।
इस लड़ाई की खासियत यह रही कि इसमें दोनों देशों के विमान अपने-अपने हवाई क्षेत्र में ही रहे और दृश्य सीमा से परे लक्ष्य भेदने वाले हथियारों का उपयोग किया गया। भारत के कुछ विमान इलेक्ट्रॉनिक हमलों से प्रभावित हुए, विशेष रूप से रूस निर्मित सुखोई विमान, जिसे अब अपग्रेड किया जा रहा है।
जकार्ता में एक विश्वविद्यालय सेमिनार में भारत के रक्षा अताशे ने कहा कि कुछ विमानों को इसलिए खोना पड़ा क्योंकि राजनीतिक नेतृत्व ने पाकिस्तान की सैन्य संपत्तियों पर सीधा हमला करने की इजाजत नहीं दी थी।

7 मई की लड़ाई के बाद भारत ने पाकिस्तान के हवाई ढांचे को निशाना बनाते हुए ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों से कई बार हमले किए। 10 मई को भारत ने घोषणा की कि उसने पाकिस्तान के नौ हवाई अड्डों और रडार स्टेशनों को निशाना बनाया है। एक निगरानी विमान को भी दक्षिणी पाकिस्तान में ध्वस्त किया गया।
घटना के बाद भारत के उप-सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल राहुल सिंह ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान को इस संघर्ष के दौरान चीन से ‘लाइव इनपुट्स’ मिल रहे थे, जिसमें रडार और सैटेलाइट फीड शामिल थी। हालांकि उन्होंने कोई सबूत नहीं दिया और पाकिस्तान ने इस आरोप का खंडन किया। चीन ने भी इसे सामान्य सैन्य सहयोग बताया।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया कि अब हवाई युद्ध महज़ तकनीक और विमान की क्षमता का खेल नहीं रहा, बल्कि यह सूचना, नेटवर्किंग, और रणनीतिक एकजुटता का भी युद्ध है – जिसमें चूक का मतलब है एक राफेल का नुकसान और एक सियासी बहस की शुरुआत।

