बारामूला के Danish Manzoor ने ताइक्वांडो में रचा इतिहास, जॉर्डन में भारत के लिए जीता कांस्य पदक
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मुस्लिम नाउ ब्यूरो,श्रीनगर/अम्मान
कश्मीर घाटी के बारामूला जिले के युवा खिलाड़ी Danish Manzoor ने अंतरराष्ट्रीय खेल मंच पर भारत का नाम रोशन किया है। डेनिश ने जॉर्डन की राजधानी अम्मान में आयोजित 13वीं एलीट कप इंटरनेशनल ताइक्वांडो चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक जीता। यह प्रतियोगिता 21 से 24 अगस्त 2025 तक चली और इसमें मध्य-पूर्व के कई देशों के शीर्ष खिलाड़ी और ओलंपिक दावेदार शामिल हुए।
इस ऐतिहासिक उपलब्धि ने न सिर्फ बारामूला, बल्कि पूरे जम्मू-कश्मीर और भारत को गर्व महसूस कराया है। जॉर्डन नेशनल ताइक्वांडो फेडरेशन द्वारा आयोजित यह टूर्नामेंट अरब दुनिया की प्रतिष्ठित खेल प्रतियोगिताओं में गिना जाता है, जहाँ तकरीबन हर मुकाबले में अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं। ऐसे मंच पर भारत की ओर से एक कश्मीरी खिलाड़ी का पदक जीतना खेल इतिहास में मील का पत्थर माना जा रहा है।

कठिन तैयारी और अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण
Danish Manzoor ने इस चैंपियनशिप से पहले अपनी तैयारी को नए मुकाम तक पहुँचाया। उन्होंने 6 अगस्त से 20 अगस्त 2025 तक अम्मान में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय ताइक्वांडो प्रशिक्षण शिविर में हिस्सा लिया। इस शिविर का नेतृत्व जॉर्डन ओलंपिक टीम के राष्ट्रीय कोच आयमन अलहुशामी ने किया।
इस अंतरराष्ट्रीय अनुभव ने Danish Manzoor को निखारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जम्मू-कश्मीर ताइक्वांडो एसोसिएशन के सहयोग से वह इस शिविर में शामिल हो सके। कड़े अभ्यास, अनुशासन और मानसिक तैयारी का ही परिणाम रहा कि उन्होंने अपने पहले ही बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में भारत के लिए पदक हासिल किया।
कोच और परिजनों के प्रति आभार
अपनी जीत के बाद डेनिश ने भावुक होते हुए कहा,“यह पदक मेरे कोच मास्टर अतुल पांगोत्रा के मार्गदर्शन और मेरे परिवार व समर्थकों के विश्वास का परिणाम है। मैं यह उपलब्धि अपने कोच, परिवार और देश को समर्पित करता हूँ।”
उनकी सफलता में HELP फाउंडेशन का योगदान भी अहम रहा, जिसने पूरे प्रशिक्षण शिविर और चैंपियनशिप में उनकी भागीदारी का पूरा खर्च उठाया।
कश्मीर से वैश्विक मंच तक
Danish Manzoor की यह उपलब्धि जम्मू-कश्मीर के लिए ऐतिहासिक कही जा रही है। खेल जगत के जानकार मानते हैं कि घाटी के खिलाड़ियों के पास अपार प्रतिभा है, जिसे सही अवसर मिलने पर वे अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी चमक सकते हैं। बारामूला जैसे सीमांत जिले से निकलकर डेनिश ने यह दिखा दिया कि कश्मीर के युवा बड़े सपनों को साकार करने में सक्षम हैं।
खेल विशेषज्ञों का कहना है कि डेनिश का पदक घाटी के हजारों युवाओं को प्रेरित करेगा। यह जीत उन्हें बड़े मंचों पर जाने का आत्मविश्वास देगी और आने वाली पीढ़ी को ताइक्वांडो जैसे अंतरराष्ट्रीय खेलों की ओर आकर्षित करेगी।
खेल जगत से बधाइयाँ
जम्मू-कश्मीर ताइक्वांडो एसोसिएशन के अध्यक्ष ने डेनिश को इस उपलब्धि पर बधाई दी और कहा कि यह पदक न सिर्फ राज्य बल्कि पूरे देश की उपलब्धि है। वहीं, जम्मू-कश्मीर स्पोर्ट्स काउंसिल की सचिव सुश्री नुज़हत गुल ने भी उन्हें शुभकामनाएँ देते हुए कहा,
“Danish Manzoor ने ताइक्वांडो में भारत और जम्मू-कश्मीर दोनों का नाम रोशन किया है। यह जीत घाटी के युवाओं के लिए प्रेरणा है कि मेहनत और लगन से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान बनाई जा सकती है।”
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय महत्व
भारत ने पिछले कुछ वर्षों में ताइक्वांडो और अन्य मार्शल आर्ट्स में अपनी पहचान मजबूत की है। लेकिन कश्मीर से किसी खिलाड़ी का इस स्तर पर पदक जीतना एक अलग ही महत्व रखता है। यह उपलब्धि दर्शाती है कि देश के दूरदराज इलाकों में भी विश्वस्तरीय प्रतिभा मौजूद है।
डेनिश का कांस्य पदक भारत की ताइक्वांडो यात्रा में एक नया अध्याय जोड़ता है। उनकी मेहनत और जुनून इस बात का प्रतीक हैं कि अगर उचित समर्थन मिले तो भारत किसी भी खेल में विश्व स्तर पर पहचान बना सकता है।
निष्कर्ष
Danish Manzoor की सफलता केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह कश्मीर और भारत के खेल इतिहास का गौरवशाली क्षण है। यह संदेश देती है कि सपनों की उड़ान सीमाओं से परे होती है। अब डेनिश मंज़ूर न सिर्फ बारामूला के युवाओं के लिए बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणा बन गए हैं।

