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खेल से संसद तक: बांग्लादेश चुनाव 2026 में खिलाड़ियों की दावेदारी

बांग्लादेश में आज 13वें राष्ट्रीय संसद चुनाव और जनमत संग्रह के बीच एक दिलचस्प ट्रेंड उभरकर सामने आया है—खेल जगत की कई जानी-मानी हस्तियां चुनावी मैदान में किस्मत आजमा रही हैं। पूर्व खिलाड़ी, क्लब प्रशासक और खेल आयोजक अलग-अलग दलों के टिकट पर या निर्दलीय रूप से चुनाव लड़ रहे हैं। राजनीतिक हलकों के साथ-साथ खेल समुदाय की नजरें भी इन सीटों पर टिकी हैं।

ढाका-16: पूर्व कप्तान अमीनुल हक की परीक्षा

राष्ट्रीय फुटबॉल टीम के पूर्व कप्तान Aminul Haque ढाका-16 से चुनाव लड़ रहे हैं। खेल से संन्यास के बाद वे राजनीति में सक्रिय रहे हैं और विरोध-प्रदर्शनों में भी भाग लेते रहे हैं। बतौर खेल सचिव (बीएनपी कार्यकारी समिति), अमीनुल हक की दावेदारी इस सीट को हाई-प्रोफाइल बनाती है।

भोला से मेजर (से.नि.) हाफ़िज़ उद्दीन अहमद

दिग्गज राजनेता और पूर्व फुटबॉलर Hafiz Uddin Ahmed अपने गृह ज़िले भोला से मैदान में हैं। 1970 के दशक में पाकिस्तान टीम के लिए खेलने और स्वतंत्रता के बाद ढाका मोहम्मडन के लिए दोहरी हैट्रिक बनाने का श्रेय उन्हें जाता है। खेल प्रशासन में भी उनका लंबा अनुभव रहा—वे बांग्लादेश फुटबॉल महासंघ (BFF) के महासचिव और अध्यक्ष रह चुके हैं तथा फीफा की अनुशासनात्मक समिति के सदस्य भी रहे। बाद में वे सक्रिय राजनीति में आए और मंत्री पद भी संभाला।

क्लब प्रशासकों की सक्रियता

ढाका मोहम्मडन जैसे पारंपरिक क्लब से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी मोनिरुल हक चौधरी कोमिला-6 से चुनाव लड़ रहे हैं। ब्रदर्स यूनियन क्लब के अध्यक्ष इंजीनियर इशराक हुसैन (पूर्व मेयर सादिक हुसैन खोका के पुत्र) ढाका-6 से मैदान में हैं।
खेल प्रशासन से जुड़े अन्य नामों में—पूर्व खेल मंत्री मिर्जा अब्बास (ढाका-8), बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) के पूर्व अध्यक्ष अली असगर लॉबी (खुलना-5), मोहम्मडन के पूर्व उपाध्यक्ष शरीफुल आलम (किशोरगंज-6), विक्टोरिया क्लब के अध्यक्ष खैरुल कबीर खोकन (नरसिंगदी-1) और पूर्व वॉलीबॉल खिलाड़ी व शिक्षा राज्य मंत्री एहसानुल हक मिलन (चांदपुर-1) शामिल हैं। ये सभी अलग-अलग प्रतीकों और दलों के तहत चुनावी दौड़ में हैं।

गठबंधन और निर्दलीय चेहरे

पूर्व BFF अध्यक्ष और एलडीपी प्रमुख कर्नल (से.नि.) ओली अहमद चटगांव-14 से 10 दलों के गठबंधन उम्मीदवार हैं। वहीं, पूर्व स्टार फुटबॉलर सज्जाद हुसैन लव्लू सिद्दीकी को पार्टी नामांकन न मिलने पर मदारीपुर-1 से निर्दलीय मैदान में उतरना पड़ा है।
अंतरिम सरकार में युवा एवं खेल मंत्री रह चुके आसिफ महमूद साजीब भुइयां इस बार सीधे चुनाव नहीं लड़ रहे, लेकिन वे एक प्रमुख दल की चुनाव प्रबंधन समिति का नेतृत्व कर रहे हैं।

प्रचार में भी खेल हस्तियां

कई खेल प्रशासक और पूर्व खिलाड़ी सीधे चुनाव न लड़ते हुए भी प्रचार अभियान में सक्रिय हैं। बांग्लादेश फुटबॉल महासंघ के अध्यक्ष तबिथ अवल एक प्रमुख दल की कार्यकारी समिति के सदस्य हैं और अपने परिवार के उम्मीदवारों के लिए प्रचार कर रहे हैं। अन्य खेल आयोजक भी अपने-अपने इलाकों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

मुद्दे और उम्मीदें

भ्रष्टाचार, महंगाई, रोज़गार और आर्थिक विकास इस चुनाव के मुख्य मुद्दे हैं। खेल समुदाय से जुड़े उम्मीदवारों के समर्थकों का तर्क है कि मैदान से निकले ये चेहरे अनुशासन, टीमवर्क और पारदर्शिता की संस्कृति लेकर राजनीति में आए हैं। आलोचकों का कहना है कि खेल की लोकप्रियता को वोट में बदलना आसान नहीं; जमीनी संगठन और स्थानीय समीकरण ही परिणाम तय करेंगे।

निष्कर्ष

खेल से संसद तक की यह यात्रा बांग्लादेश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में एक नया अध्याय जोड़ती है। 13वें संसदीय चुनाव के नतीजे बताएंगे कि मैदान के सितारे राजनीतिक पिच पर कितना दम दिखा पाते हैं। फिलहाल, खेल जगत की बढ़ती भागीदारी ने चुनावी परिदृश्य को और दिलचस्प बना दिया है।