मीट बंद तो शराब क्यों नहीं? राजस्थान में जश्ने मिलादुन्नबी पर ड्राई डे की गूंज
मुस्लिम नाउ ब्यूरो, जयपुर
राजस्थान में इन दिनों जश्ने ईद मिलादुन्नबी को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। मुस्लिम समुदाय का एक वर्ग अब सरकार से इस दिन को ड्राई डे घोषित करने की मांग कर रहा है। समुदाय का कहना है कि जिस तरह नवरात्र, पर्युषण पर्व और अन्य धार्मिक अवसरों पर मांस और अंडे की बिक्री पर रोक लगाई जाती है, उसी तरह ईद मिलादुन्नबी पर शराब की बिक्री भी बंद होनी चाहिए। यह मांग सिर्फ धार्मिक भावनाओं से जुड़ी नहीं है, बल्कि पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की शिक्षाओं और संदेशों से भी सीधी तरह से संबंधित है।
कोटा में माहौल गरमाया
फिलहाल इस मुद्दे को लेकर राजस्थान के कोटा जिले में माहौल गरमा गया है। कई संगठनों और समुदाय के लोगों ने विरोध-प्रदर्शन करते हुए सरकार पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है। आंदोलनकारी मुस्लिमों का कहना है कि अगर हिंदू त्यौहारों पर मीट-मुर्गा और अंडे की दुकानें बंद कराई जा सकती हैं, तो मुस्लिम त्यौहार पर शराब की दुकानें क्यों नहीं बंद हो सकतीं? उनका कहना है कि यह मांग कोई नई नहीं है, बल्कि वर्षों से चली आ रही है। अब यह धीरे-धीरे एक राज्यव्यापी आंदोलन का रूप लेती जा रही है।
जश्ने ईद मिलादुन्नबी के दिन शराब की बिक्री पर पाबंदी लगाने के लिए राजस्थान के कोटा मे ज़बरदस्त विरोध प्रदर्शन ,
— Nargis Bano (@Nargis_Bano78) August 30, 2025
हिन्दुओ के त्यौहार पर मीट क़ी दूकान बंद हो सकती है तो मुसलमानो के त्यौहार पर शराब बंद क्यों नहीं हो सकती ? pic.twitter.com/03VAQgD1Ua
पैगंबर से जुड़ा पवित्र दिन
ईद मिलादुन्नबी मुसलमानों के लिए बेहद अहम दिन है। यह पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब का जन्मदिन भी है और वही दिन है जब उन्होंने इस दुनिया से रुखसती की थी। इस मौके पर देशभर में बड़े पैमाने पर जुलूस, जलसे और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। पैगंबर साहब ने हमेशा इंसानियत, भाईचारे और शांति का पैगाम दिया। उन्होंने शराब और नशे को हराम करार दिया और कहा कि यह समाज में व्याप्त तमाम बुराइयों की जड़ है। ऐसे में मुस्लिम समुदाय का मानना है कि ईद मिलादुन्नबी जैसे पवित्र मौके पर शराब की बिक्री धार्मिक माहौल को प्रभावित करती है।
भीलवाड़ा में ज्ञापन सौंपा गया
भीलवाड़ा में मुस्लिम समाज ने कांग्रेस शहर महासचिव निसार सिलावट की अगुआई में जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। इसमें स्पष्ट कहा गया कि ईद मिलादुन्नबी के दिन शराब की दुकानें बंद रखी जाएं और इस दिन को ड्राई डे घोषित किया जाए। ज्ञापन में समुदाय ने तर्क दिया कि पिछली सरकारों ने इस मांग का सम्मान किया था, लेकिन मौजूदा सरकार की आबकारी नीति में इसे शामिल नहीं किया गया।
ज्ञापन में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से आग्रह किया गया कि जिस तरह गणतंत्र दिवस, महात्मा गांधी की पुण्यतिथि, महावीर जयंती, स्वतंत्रता दिवस और गांधी जयंती को ड्राई डे घोषित किया गया है, उसी तरह ईद मिलादुन्नबी को भी इस सूची में शामिल किया जाना चाहिए।
पहले भी लागू रहा है आदेश
मुस्लिम समुदाय का कहना है कि यह कोई पहली बार उठाई गई मांग नहीं है। पूर्ववर्ती सरकारों में इस दिन को ड्राई डे घोषित किया गया था। यहां तक कि 2004 में पूर्व मुख्यमंत्री की ओर से आदेश संख्या P4(17) वित्त/आब/2004 जारी कर राज्य में इस दिन शराब की बिक्री पर रोक लगाई गई थी। लेकिन सरकार बदलने के साथ ही यह फैसला रद्द कर दिया गया। समुदाय का आरोप है कि यह कदम न सिर्फ उनकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला है बल्कि ईद मिलादुन्नबी पर दिए जाने वाले शांति और भाईचारे के संदेश के भी खिलाफ है।
पैगंबर का संदेश और शराब
ज्ञापन में खासतौर पर पैगंबर-ए-इस्लाम की शिक्षाओं का हवाला दिया गया। इसमें कहा गया कि पैगंबर ने इंसानियत और अमन का पैगाम दिया और शराब को हराम करार दिया। उनका मानना था कि नशा इंसान को बुराई की तरफ ले जाता है और समाज को खोखला कर देता है। ऐसे में ईद मिलादुन्नबी जैसे दिन शराब की दुकानें खुली रहना धार्मिक माहौल के साथ-साथ सामाजिक मूल्यों के भी खिलाफ है।

अन्य त्यौहारों पर पाबंदी का उदाहरण
गौरतलब है कि राजस्थान सरकार ने हाल ही में पर्युषण पर्व और अनंत चतुर्दशी के मौके पर अंडे और मांस की बिक्री पर रोक लगाई थी। सरकार ने इसके लिए बाकायदा आदेश जारी किया और 27 अगस्त से 6 सितंबर तक इस पर अमल किया गया। इससे पहले नवरात्र के दौरान भी मीट और मांस की बिक्री पर रोक लगाई गई थी। मुस्लिम समुदाय का कहना है कि जब हिंदू और जैन त्यौहारों पर ऐसी पाबंदियां लगाई जा सकती हैं, तो मुस्लिम समुदाय की मांग को भी नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
आंदोलन का रूप लेती मांग
कोटा और भीलवाड़ा से शुरू हुई यह मांग धीरे-धीरे राजस्थान के अन्य जिलों में भी उठने लगी है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा पूरे देश में गूंज सकता है। मुस्लिम संगठनों का कहना है कि यह मांग पूरी तरह से लोकतांत्रिक दायरे में है और इसे नकारना समुदाय की धार्मिक भावनाओं की अनदेखी होगी।
निष्कर्ष
ईद मिलादुन्नबी के मौके पर शराब की बिक्री बंद करने की यह मांग सिर्फ धार्मिक संवेदनशीलता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक सद्भाव और पैगंबर के संदेश से भी जुड़ी हुई है। सवाल यह है कि क्या सरकार इस मांग को मानते हुए ईद मिलादुन्नबी को ड्राई डे घोषित करेगी या फिर यह विवाद आगे और तूल पकड़ेगा। लेकिन इतना तय है कि राजस्थान में उठी यह आवाज आने वाले समय में राष्ट्रीय बहस का मुद्दा बनने वाली है।

