संयुक्त राष्ट्र महासभा में गाज़ा पर गूंजे एर्दोआन, सुबियांतो और ट्रंप के स्वर
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मुस्लिम नाउ ब्यूरो, वाॅशिंगटन
मंगलवार (23 सितंबर) से शुरू हुए संयुक्त राष्ट्र महासभा के 80वें सत्र के उद्घाटन समारोह में गाज़ा-इज़राइल युद्ध सबसे बड़ा मुद्दा बनकर उभरा। तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोआन, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोध सुबियांतो और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने भाषणों में गाज़ा संकट को केंद्र में रखा और दुनिया से ठोस कदम उठाने की अपील की।
एर्दोआन ने दिखाईं भूख से मरते गाज़ावासियों की तस्वीरें
तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोआन ने महासभा के मंच से गाज़ा में भूख और कुपोषण से जूझते बच्चों की तस्वीरें दिखाकर दुनिया का ध्यान खींचा। उन्होंने कहा, “क्या 2025 में ऐसी बर्बरता के लिए कोई तर्कसंगत कारण बचा है? यह शर्मनाक तस्वीर गाज़ा में पिछले 23 महीनों से बार-बार सामने आ रही है।”
उन्होंने कब्ज़ा कर रही इज़रायली सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि गाज़ा के लोगों को जानबूझकर भूखा रखा जा रहा है। एर्दोआन ने सवाल उठाया, “किस तरह का मानवीय विवेक इसे बर्दाश्त कर सकता है? ऐसी दुनिया में जहाँ बच्चे भोजन और चिकित्सा के अभाव में मर रहे हों, क्या हम सचमुच शांति पा सकते हैं?”
तुर्की राष्ट्रपति ने गाज़ा युद्ध को “मानवता का काला अध्याय” बताया और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तुरंत कार्रवाई की अपील की।
इंडोनेशिया ने रखी संतुलित राय
इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोध सुबियांतो ने अपने संबोधन में कहा कि शांति तभी संभव है जब फिलिस्तीन की आज़ादी और इज़राइल की सुरक्षा दोनों सुनिश्चित हों। उन्होंने कहा, “हमें एक स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य चाहिए। लेकिन हमें इज़राइल की सुरक्षा का भी ध्यान रखना होगा। तभी हमें सच्ची शांति मिलेगी।”
उन्होंने आगे कहा कि अब्राहम के वंशज — अरब और यहूदी — के बीच मेल-मिलाप ही स्थायी समाधान है। सुबियांतो ने धार्मिक सौहार्द्र की अपील करते हुए कहा कि मुस्लिम, ईसाई, हिंदू, बौद्ध सभी को एक मानव परिवार की तरह रहना होगा। उन्होंने कहा, “यह शायद एक सपना लगे, लेकिन यह एक खूबसूरत सपना है, जिसे साकार करने के लिए हमें मिलकर काम करना होगा।”
ट्रंप बोले: “मुझे गाज़ा युद्ध रोकना होगा”
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी महासभा में गाज़ा युद्ध को समाप्त करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “हमें इसे रोकना होगा। हमें शांति वार्ता करनी होगी। हमें बंधकों को वापस लाना होगा। हम सभी 20 बंधकों को जिंदा वापस चाहते हैं और 38 शवों की वापसी भी चाहते हैं।”
हालांकि ट्रंप ने एक बार फिर गाज़ा में युद्ध की जिम्मेदारी हमास पर डाली। उन्होंने कहा कि युद्धविराम समझौते को हमास ने अस्वीकार किया, यही वजह है कि संघर्ष थम नहीं पाया। ट्रंप ने उन देशों की आलोचना भी की जिन्होंने फिलिस्तीन को मान्यता दी, और आरोप लगाया कि इससे हमास को “पुरस्कृत” किया गया है।
संयुक्त राष्ट्र पर हमला
अपने संबोधन में ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “संयुक्त राष्ट्र कड़े शब्दों में बयान तो देता है, लेकिन उन पर अमल नहीं करता।” इसके साथ ही ट्रंप ने दावा किया कि उनकी अगुवाई में अमेरिका ने दुनिया के सात युद्धों को रोका है और इसके लिए उन्हें नोबेल पुरस्कार मिलना चाहिए।
निष्कर्ष
संयुक्त राष्ट्र महासभा का यह सत्र एक बार फिर साबित करता है कि गाज़ा संकट अब वैश्विक राजनीति का केंद्र बन चुका है। एर्दोआन ने मानवीय तस्वीरें दिखाकर अंतरात्मा को झकझोरा, सुबियांतो ने संतुलित दृष्टिकोण से समाधान की राह सुझाई और ट्रंप ने युद्धविराम व बंधकों की वापसी को प्राथमिकता बताया। सवाल अब यह है कि क्या इन शब्दों को ठोस कार्रवाई में बदला जा सकेगा या गाज़ा के लोग यूँ ही भूख और हिंसा के बीच झूलते रहेंगे।

