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सऊदी अरब, ओमान और कतर की कूटनीति से टला ईरान पर अमेरिकी हमला

मध्य पूर्व एक बार फिर बड़े युद्ध के मुहाने पर खड़ा दिखाई दे रहा था, लेकिन आख़िरी समय पर सऊदी अरब, ओमान और कतर की सक्रिय और गहन कूटनीति ने हालात को संभाल लिया। इन तीनों खाड़ी देशों के संयुक्त प्रयासों के चलते अमेरिका द्वारा ईरान पर संभावित सैन्य हमले की योजना को रोक दिया गया। एक वरिष्ठ सऊदी अधिकारी के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इन देशों की अपील पर ईरान को “सद्भावना दिखाने का एक और अवसर” देने का फैसला किया और हमले से पीछे हट गए।

सऊदी अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर गुरुवार, 15 जनवरी को फ्रांसीसी समाचार एजेंसी एएफपी से बातचीत में बताया कि यह फैसला किसी एक बातचीत का नतीजा नहीं था, बल्कि लंबे, कठिन और आख़िरी पलों तक चले राजनयिक प्रयासों का परिणाम था। अधिकारी ने कहा, “तीनों खाड़ी देशों ने पूरी रात जागकर अमेरिका को यह समझाने की कोशिश की कि ईरान पर हमला पूरे क्षेत्र को गंभीर अस्थिरता की ओर धकेल सकता है।”

दरअसल, ईरान में पिछले दो सप्ताह से अधिक समय से सरकार विरोधी प्रदर्शन जारी हैं। 28 दिसंबर को महंगाई और आर्थिक बदहाली के खिलाफ शुरू हुए ये प्रदर्शन धीरे-धीरे राजनीतिक असंतोष का रूप ले चुके हैं। कई शहरों में हिंसा भड़क उठी, सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुईं और हालात पर काबू पाने के लिए ईरानी सरकार ने सख्त कार्रवाई की। इसके साथ ही, सरकार के समर्थन में भी बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरे, जिससे देश में ध्रुवीकरण और गहरा गया।

इन घटनाओं के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार तीखे बयान दे रहे थे। उन्होंने ईरान पर आरोप लगाया कि वहां प्रदर्शनकारियों की हत्या की जा रही है और गिरफ्तार लोगों को फांसी देने की तैयारी है। ट्रंप की इन चेतावनियों से यह आशंका गहराने लगी थी कि अमेरिका किसी भी समय सैन्य कार्रवाई का आदेश दे सकता है। इसी कारण क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया था।

तनाव की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि बुधवार को कतर के दोहा स्थित अल-उदैद एयरबेस से कुछ अमेरिकी सैनिकों को सुरक्षा कारणों से बाहर निकाला गया। साथ ही सऊदी अरब और कुवैत में स्थित अमेरिकी दूतावासों को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए गए। पूरे खाड़ी क्षेत्र में यह संदेश साफ था कि हालात बेहद नाजुक हैं।

इसी पृष्ठभूमि में सऊदी अरब, ओमान और कतर ने संयुक्त रूप से अमेरिका से हस्तक्षेप न करने की अपील की। इन देशों ने ट्रंप प्रशासन को आगाह किया कि ईरान पर हमला केवल एक देश के खिलाफ कार्रवाई नहीं होगी, बल्कि इससे पूरा मध्य पूर्व हिंसा और अराजकता की चपेट में आ सकता है। सऊदी अधिकारी के शब्दों में, “हमारा लक्ष्य क्षेत्र में अनियंत्रित स्थिति को पनपने से रोकना था। हमने अमेरिका को साफ बताया कि बमबारी से कई झटकों की श्रृंखला शुरू हो सकती है, जिसे रोक पाना बेहद मुश्किल होगा।”

इन राजनयिक प्रयासों के बीच ट्रंप के रुख में भी बदलाव के संकेत मिले। गुरुवार सुबह पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि ईरान ने प्रदर्शनकारियों की हत्या रोक दी है और फांसी की सजा को भी निलंबित कर दिया गया है। यह बयान उनके पहले के कड़े रुख से बिल्कुल अलग था और इससे यह संकेत मिला कि अमेरिका फिलहाल सैन्य कार्रवाई के बजाय हालात पर नजर बनाए रखना चाहता है।

हालांकि, तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। उसी दिन एएफपी ने रिपोर्ट किया कि ईरानी सरकारी मीडिया पर एक संदेश प्रसारित किया गया, जिसमें ट्रंप की हत्या की ओर इशारा किया गया था। इसमें 13 जुलाई 2024 को पेंसिल्वेनिया के बटलर में हुई उस घटना का जिक्र था, जब एक चुनावी रैली के दौरान एक बंदूकधारी ने ट्रंप पर गोलियां चलाई थीं। गोली उनके कान के बेहद पास से गुजर गई थी और वे बाल-बाल बच गए थे। इस घटना की तस्वीरें और संदर्भ दोबारा दिखाए जाने से यह साफ हुआ कि बयानबाजी का स्तर अभी भी खतरनाक बना हुआ है।

ईरान में जारी विरोध प्रदर्शनों को 1979 में इस्लामी गणराज्य की स्थापना के बाद से सबसे बड़ा जनआंदोलन माना जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों का दावा है कि सरकार की कार्रवाई में अब तक कम से कम 3,428 लोगों की मौत हो चुकी है। अमेरिका ने चेतावनी दी है कि अगर गिरफ्तार प्रदर्शनकारियों को फांसी दी गई, तो वह सैन्य कार्रवाई पर विचार कर सकता है।

ट्रंप ने बुधवार को कहा था, “मुझे बहुत भरोसेमंद सूत्रों से जानकारी मिली है कि ईरानी सरकार ने कार्रवाई की तीव्रता कम कर दी है और फांसी देने की कोई योजना नहीं है।” इस बयान को भी हमले से पीछे हटने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

गौरतलब है कि ट्रंप को ईरान की ओर से जान से मारने की धमकियां पहले भी मिल चुकी हैं। 2021 में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के कार्यालय से जारी एक पोस्ट में ट्रंप को गोल्फ खेलते हुए दिखाया गया था, जिसके ऊपर एक लड़ाकू विमान मंडरा रहा था। यह 2020 में जनरल कासिम सुलेमानी की हत्या के बदले की धमकी मानी गई थी। 2022 में अमेरिका ने आरोप लगाया कि ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड का एक सदस्य ट्रंप के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन की हत्या की साजिश में शामिल था।

पिछले साल फरवरी में ट्रंप ने कहा था कि अगर उनकी हत्या होती है तो ईरान को “पूरी तरह नष्ट” कर दिया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी थी कि “कुछ भी नहीं बचेगा।”

फिलहाल, खाड़ी देशों की कूटनीति ने एक बड़े युद्ध को टाल दिया है, लेकिन ईरान, अमेरिका और पूरे मध्य पूर्व के बीच तनाव अभी भी बना हुआ है। आने वाले दिन यह तय करेंगे कि यह अस्थायी शांति स्थायी संवाद में बदलती है या फिर क्षेत्र एक बार फिर टकराव की ओर बढ़ता है।