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जामिया हमदर्द की ऐतिहासिक छलांग: दुबई में खुलेगा ऑफ-कैंपस, वैश्विक पहचान की ओर मजबूत कदम

राजधानी दिल्ली स्थित प्रतिष्ठित जामिया हमदर्द विश्वविद्यालय के लिए यह समय गर्व, उत्साह और ऐतिहासिक उपलब्धि का है। विश्वविद्यालय ने वैश्विक शैक्षणिक मंच पर अपनी मौजूदगी को और सशक्त करते हुए संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के दुबई में अपना ऑफ-कैंपस स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। इस महत्वपूर्ण पहल के तहत जामिया हमदर्द और फातिमा हेल्थकेयर मैनेजमेंट सर्विसेज के बीच एक लेटर ऑफ इंटेंट (LOI) पर हस्ताक्षर किए गए हैं।

इस समझौते पर जामिया हमदर्द की ओर से माननीय कुलपति प्रो. एम. अफ़शर आलम ने और फातिमा हेल्थकेयर मैनेजमेंट सर्विसेज की ओर से उसके संस्थापक एवं चेयरमैन डॉ. के. पी. हुसैन ने हस्ताक्षर किए। यह साझेदारी दुबई में जामिया हमदर्द का ऑफ-कैंपस स्थापित करने के उद्देश्य से की गई है, जो शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग का एक नया अध्याय मानी जा रही है।

शैक्षणिक जगत के जानकारों का मानना है कि यह उपलब्धि न केवल जामिया हमदर्द के विकास को नई गति देगी, बल्कि विश्वविद्यालय की एक नई, वैश्विक और आधुनिक छवि भी उभरकर सामने आएगी। दुबई जैसे अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक और स्वास्थ्य केंद्र में ऑफ-कैंपस की स्थापना से जामिया हमदर्द को वैश्विक छात्रों, शोधकर्ताओं और पेशेवरों से जुड़ने का व्यापक अवसर मिलेगा।

इस ऐतिहासिक पहल की खबर सामने आते ही सोशल मीडिया पर बधाइयों और शुभकामनाओं की बाढ़ आ गई है। विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रों, शिक्षकों, डॉक्टरों, शोधकर्ताओं और शुभचिंतकों ने इसे “ऐतिहासिक क्षण” बताते हुए जामिया हमदर्द के उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।

सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए सोहराब ख़ान ने लिखा, “माशा अल्लाह, जामिया हमदर्द के सभी हितधारकों को मुबारकबाद। विश्वविद्यालय के दूरदर्शी नेतृत्व को विशेष धन्यवाद।”
वहीं दानिश रज़ा ने कहा, “जामिया हमदर्द को नई ऊँचाइयों तक ले जाने के लिए बधाई। माशा अल्लाह, आप बेहतरीन काम कर रहे हैं।”

डॉ. सैयद मोआवद तंतावी ने इसे जामिया हमदर्द, नई दिल्ली और फातिमा हेल्थकेयर ग्रुप यूएई के लिए एक “ऐतिहासिक पल” बताया।
सबा अमीन मीर ने अपनी प्रतिक्रिया में लिखा, “जामिया हमदर्द को बहुत-बहुत मुबारकबाद, यह हम सभी के लिए गर्व का क्षण है।”

कई अन्य शुभचिंतकों ने भी “माशा अल्लाह”, “बहुत-बहुत मुबारकबाद”, “ग्रेट वर्क” और “ऑल द बेस्ट” जैसे संदेशों के माध्यम से अपनी खुशी और समर्थन व्यक्त किया। कुछ लोगों ने भविष्य की योजनाओं, विशेष रूप से मेडिकल और एमबीबीएस पाठ्यक्रमों को लेकर भी उत्सुकता जाहिर की, जिससे इस पहल को लेकर बढ़ती उम्मीदों का अंदाजा लगाया जा सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि दुबई में ऑफ-कैंपस की स्थापना से जामिया हमदर्द न केवल भारतीय शिक्षा प्रणाली का प्रतिनिधित्व करेगा, बल्कि वैश्विक शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में भारत की सॉफ्ट पावर को भी मजबूत करेगा। यह कदम अंतरराष्ट्रीय सहयोग, शोध, नवाचार और बहुसांस्कृतिक शैक्षणिक वातावरण को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाएगा।

कुल मिलाकर, जामिया हमदर्द की यह पहल विश्वविद्यालय के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय जोड़ने जा रही है। यह न केवल वर्तमान पीढ़ी के छात्रों के लिए नए अवसर खोलेगी, बल्कि आने वाले वर्षों में जामिया हमदर्द को एक वैश्विक शैक्षणिक ब्रांड के रूप में स्थापित करने में भी निर्णायक सिद्ध होगी।