गाज़ा: यूएई ने शांति योजना के दूसरे चरण की शुरुआत का स्वागत किया, इज़राइल ने जताई आपत्ति
मुस्लिम नाउ ब्यूरो,अबू धाबी
संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने गाज़ा के लिए व्यापक शांति योजना के दूसरे चरण की शुरुआत और गाज़ा प्रशासन के लिए राष्ट्रीय समिति (नेशनल कमेटी फॉर द एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ गाज़ा–NCAG) के औपचारिक गठन का स्वागत किया है। यह अस्थायी संक्रमणकालीन निकाय संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2803 के तहत स्थापित किया गया है।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग राज्य मंत्री रीम बिंत इब्राहिम अल हाशिमी ने इस घोषणा का स्वागत करते हुए कहा कि यह कदम क्षेत्र में स्थिरता को मज़बूत करने और राजनीतिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगा। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की घोषणा को भी एक महत्वपूर्ण ढांचा बताया, जो शांति और स्थायित्व के प्रयासों को समर्थन देता है।
हालाँकि, इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व वाली सरकार ने गाज़ा के लिए ‘बोर्ड ऑफ पीस’ और उससे जुड़े निकायों में उम्मीदवारों की नियुक्ति पर आपत्ति जताई है। इज़राइल का कहना है कि ये नियुक्तियाँ उसके साथ समन्वय के बिना की गई हैं और उसकी नीतियों के विपरीत हैं। प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने विदेश मंत्री गिदोन सआर को इस मुद्दे पर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से संपर्क करने का निर्देश दिया है।
अल हाशिमी ने राष्ट्रपति ट्रंप के नेतृत्व प्रयासों की सराहना की, साथ ही क़तर, अरब गणराज्य मिस्र और तुर्किये द्वारा शांति प्रक्रिया को समर्थन देने और क्षेत्रीय सुरक्षा व स्थिरता को मज़बूत करने के लिए किए जा रहे निरंतर प्रयासों की भी प्रशंसा की।
उन्होंने गाज़ा कार्यकारी बोर्ड (Gaza Executive Board) में अपनी नियुक्ति पर गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि यह नियुक्ति शांति के समर्थन और चुनौतियों को अवसरों में बदलने में यूएई की अग्रणी भूमिका पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय के विश्वास को दर्शाती है—न केवल गाज़ा के लोगों के लिए, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए।
अल हाशिमी ने कहा, “यूएई का मानना है कि स्थायी शांति तभी संभव है जब अंतरराष्ट्रीय समुदाय सामूहिक प्रयास करे और गाज़ा पट्टी का प्रभावी शासन सुनिश्चित किया जाए, जिससे भाईचारे वाले फ़िलिस्तीनी लोगों के वैध अधिकारों और आकांक्षाओं की रक्षा हो, स्थिरता को बढ़ावा मिले और क्षेत्र के लिए अधिक सुरक्षित व समृद्ध भविष्य की दिशा में शांति प्रक्रिया आगे बढ़े।”
उन्होंने गाज़ा शांति योजना के तहत अब तक हुई प्रगति को आगे बढ़ाने और दो-राष्ट्र समाधान की ओर ले जाने वाली एक व्यापक राजनीतिक प्रक्रिया को पुनः स्थापित करने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।
इस बीच, इज़राइली प्रधानमंत्री कार्यालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जारी बयान में कहा कि ‘बोर्ड ऑफ पीस’ के अधीन गाज़ा कार्यकारी बोर्ड की संरचना इज़राइल के साथ समन्वय में तय नहीं की गई और यह उसकी नीति के विपरीत है।
व्हाइट हाउस ने इससे पहले गाज़ा संघर्षविराम और शासन योजना के तहत एक ‘एग्जीक्यूटिव बोर्ड’ और एक अलग ‘गाज़ा एग्जीक्यूटिव बोर्ड’ के गठन की घोषणा की थी। इज़राइल ने विशेष रूप से गाज़ा एग्जीक्यूटिव बोर्ड पर आपत्ति जताई है, जिसमें ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर, ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ, ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर, तुर्किये के विदेश मंत्री हाकान फिदान, क़तरी राजनयिक अली अल थावादी सहित अन्य नाम शामिल हैं।
शुक्रवार को व्हाइट हाउस ने ‘20-सूत्रीय शांति योजना’ के दूसरे चरण की निगरानी के लिए ‘बोर्ड ऑफ पीस’ के सदस्यों की सूची जारी की। इस कार्यकारी समिति में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर, ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ, वर्ल्ड बैंक समूह के अध्यक्ष अजय बंगा और जेरेड कुशनर शामिल हैं। इसके अलावा अपोलो ग्लोबल मैनेजमेंट के सीईओ मार्क रोवन और अमेरिकी उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रॉबर्ट गेब्रियल को भी सदस्य बनाया गया है।
व्हाइट हाउस के अनुसार, “एग्जीक्यूटिव बोर्ड का प्रत्येक सदस्य गाज़ा की स्थिरता और दीर्घकालिक सफलता से जुड़े प्रमुख क्षेत्रों—जैसे शासन क्षमता निर्माण, क्षेत्रीय संबंध, पुनर्निर्माण, निवेश आकर्षण, बड़े पैमाने पर वित्तपोषण और पूंजी जुटाने—की निगरानी करेगा।”
यह घोषणा ऐसे समय में आई है, जब कुछ ही दिन पहले स्टीव विटकॉफ ने इज़राइल–गाज़ा युद्ध को समाप्त करने के लिए अमेरिका की मध्यस्थता वाली शांति योजना के दूसरे चरण की शुरुआत की घोषणा की थी।

