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गाजा ‘शांति बोर्ड’ में शामिल होने का पाकिस्तान को न्योता, ट्रंप की पहल

पाकिस्तान को गाजा से जुड़ी अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में एक अहम भूमिका निभाने का संकेत मिला है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा गठित किए जा रहे गाजा ‘शांति बोर्ड’ में शामिल होने के लिए पाकिस्तान को औपचारिक रूप से आमंत्रित किया गया है। इस घटनाक्रम को मध्य पूर्व की राजनीति और फिलिस्तीनी मुद्दे के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।

इस्लामाबाद स्थित मुस्लिम नाउ ब्यूरो के अनुसार, पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने रविवार को इस संबंध में एक आधिकारिक बयान जारी किया। पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने पुष्टि की कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्वयं पाकिस्तानी प्रधानमंत्री को गाजा शांति बोर्ड में शामिल होने का निमंत्रण भेजा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार कर रहा है और वह संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों के अनुरूप गाजा में शांति, स्थिरता और सुरक्षा बहाल करने के लिए किए जा रहे अंतरराष्ट्रीय प्रयासों का हिस्सा बना रहेगा।

ताहिर अंद्राबी ने कहा कि पाकिस्तान लंबे समय से फिलिस्तीनी जनता के अधिकारों का समर्थन करता आया है और उसका रुख हमेशा अंतरराष्ट्रीय कानून तथा संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों के अनुरूप रहा है। उन्होंने यह भी दोहराया कि पाकिस्तान फिलिस्तीनी मुद्दे के न्यायसंगत और स्थायी समाधान के पक्ष में है, ताकि क्षेत्र में लंबे समय से चली आ रही हिंसा और अस्थिरता का अंत हो सके।

गौरतलब है कि गाजा पिछले दो वर्षों से इजरायली बमबारी की मार झेल रहा है, जिससे वहां का बुनियादी ढांचा लगभग पूरी तरह तबाह हो चुका है। इसी पृष्ठभूमि में डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा के लिए एक 20 सूत्री शांति योजना पेश की थी। इस योजना के दूसरे चरण के तहत अब ‘शांति बोर्ड’ के गठन की प्रक्रिया शुरू की गई है। ट्रंप ने खुद को इस बोर्ड का अध्यक्ष घोषित किया है और गाजा तथा फिलिस्तीनी क्षेत्रों में आर्थिक विकास को शांति का प्रमुख आधार मानते हुए एक विवादास्पद रोडमैप आगे बढ़ा रहे हैं।

संयुक्त राज्य अमेरिका ने इस शांति बोर्ड में शामिल होने के लिए दुनिया के लगभग 60 देशों के राष्ट्राध्यक्षों को आमंत्रण भेजा है। इनमें तुर्की, मिस्र, अर्जेंटीना, इंडोनेशिया, इटली, मोरक्को, ब्रिटेन, जर्मनी, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे प्रभावशाली देश शामिल हैं। पाकिस्तान को भेजा गया निमंत्रण इस बात का संकेत माना जा रहा है कि वाशिंगटन इस पहल को व्यापक अंतरराष्ट्रीय समर्थन दिलाना चाहता है।

हालांकि, इस शांति बोर्ड को लेकर कई सवाल और आशंकाएं भी सामने आ रही हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, बोर्ड के चार्टर में गाजा का सीधे तौर पर उल्लेख नहीं किया गया है। इसी कारण कई विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप इस बोर्ड को संयुक्त राष्ट्र के मौजूदा ढांचे के विकल्प के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं। यह आशंका इसलिए भी गहराती है क्योंकि अमेरिका पहले भी संयुक्त राष्ट्र की भूमिका को दरकिनार कर एकतरफा पहल करता रहा है।

शुक्रवार को डोनाल्ड ट्रंप ने शांति बोर्ड के कार्यकारी पैनल की भी घोषणा की। इस पैनल में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर, विश्व बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा, और व्हाइट हाउस के शीर्ष मध्य पूर्व वार्ताकार जेरेड कुशनर व स्टीव विटकॉफ को शामिल किया गया है। ये सभी नाम अपने-अपने क्षेत्रों में प्रभावशाली माने जाते हैं और उनकी मौजूदगी से बोर्ड के निर्णयों का वैश्विक असर पड़ सकता है।

रॉयटर्स के अनुसार, तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान भी इस शांति बोर्ड के सदस्य हैं। हालांकि, यह तथ्य भी ध्यान देने योग्य है कि इज़राइल गाजा के मामलों में तुर्की की किसी भी भूमिका का लंबे समय से विरोध करता रहा है। ऐसे में बोर्ड के भीतर मतभेद और कूटनीतिक खींचतान की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

कार्यकारी बोर्ड में संयुक्त राष्ट्र की मध्य पूर्व शांति प्रक्रिया के लिए विशेष समन्वयक सिग्रिड काग, इजरायली-साइप्रस उद्योगपति याकिर गेबे और संयुक्त अरब अमीरात के एक मंत्री को भी शामिल किया गया है। यह विविध संरचना दर्शाती है कि बोर्ड में राजनीतिक, आर्थिक और कूटनीतिक तीनों स्तरों पर फैसले लेने की कोशिश की जा रही है।

इसी बीच गाजा के भविष्य को लेकर एक और अहम पहल सामने आई है। गाजा पर शासन और पुनर्निर्माण की योजना बनाने के लिए गठित फिलिस्तीनी इंजीनियरों की एक समिति ने शुक्रवार को काहिरा में अपनी पहली बैठक की। इस बैठक में डोनाल्ड ट्रंप के दामाद और वरिष्ठ सलाहकार जेरेड कुशनर भी मौजूद थे, जो इस मुद्दे पर स्टीव विटकॉफ के साथ बीते कई महीनों से काम कर रहे हैं।

इस समिति का नेतृत्व फिलिस्तीनी प्राधिकरण के पूर्व उप मंत्री अली शाथ कर रहे हैं। उनकी योजना को बेहद महत्वाकांक्षी माना जा रहा है। इसमें युद्ध के दौरान गाजा में जमा हुए मलबे को भूमध्य सागर में धकेलने और अगले तीन वर्षों के भीतर पूरी तरह नष्ट हो चुके बुनियादी ढांचे का पुनर्निर्माण करने का प्रस्ताव शामिल है। इस योजना को लेकर पर्यावरणीय और मानवीय सवाल भी उठ रहे हैं, लेकिन समर्थकों का दावा है कि गाजा को फिर से बसाने के लिए यह एक व्यावहारिक रास्ता हो सकता है।

कुल मिलाकर, पाकिस्तान को गाजा शांति बोर्ड में शामिल होने का निमंत्रण न केवल उसकी कूटनीतिक अहमियत को दर्शाता है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि आने वाले समय में गाजा और फिलिस्तीनी मुद्दे पर वैश्विक राजनीति और तेज हो सकती है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पाकिस्तान इस प्रस्ताव को किस रूप में स्वीकार करता है और वह इस विवादास्पद लेकिन महत्वाकांक्षी शांति पहल में क्या भूमिका निभाता है।