रमज़ान 2026 : मस्जिद अल-हराम में तरावीह पढ़ाएंगे वही 7 इमाम
Table of Contents
मुस्लिम नाउ ब्यूरो | मक्का–मदीना
रमज़ान का पवित्र महीना अब कुछ ही कदम दूर है। जैसे-जैसे यह पाक और बरकतों भरा महीना नज़दीक आ रहा है, वैसे-वैसे दुनिया भर के मुसलमानों के दिलों में इसकी तैयारी और इंतज़ार और गहराता जा रहा है। घरों में रोज़ा रखने की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं, इबादत का शौक़ बढ़ रहा है और निगाहें हरमैन शरीफ़ैन—मक्का की मस्जिद अल-हराम और मदीना की मस्जिद-ए-नबवी—की ओर टिक गई हैं। इसी कड़ी में सऊदी अरब में रमज़ान 1447 हिजरी (2026) को लेकर बड़े पैमाने पर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।
रमज़ान के दौरान उमराह के लिए दुनिया भर से लाखों हाजियों और ज़ायरीन के मक्का-मदीना पहुंचने की उम्मीद है। इसे देखते हुए दोनो पवित्र मस्जिदों में धार्मिक, प्रशासनिक और शैक्षणिक स्तर पर व्यापक इंतज़ाम किए जा रहे हैं। इसी सिलसिले में हाल ही में मक्का और मदीना के वरिष्ठ इमामों की एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता शेख प्रोफेसर डॉ. अब्दुर्रहमान अल-सुदैस ने की। वह दोनो पवित्र मस्जिदों के धार्मिक मामलों के अध्यक्ष हैं।
रमज़ान 1447 हिजरी की रणनीति पर मंथन
इस अहम बैठक में रमज़ान 1447 हिजरी के लिए तैयार की गई सेवा योजनाओं और वैश्विक स्तर पर दीन की दावत (Global Outreach) से जुड़ी नई रणनीति को अंतिम रूप दिया गया। बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि रमज़ान के दौरान हरम शरीफ़ में आने वाले हर ज़ायरीन को न सिर्फ़ बेहतर सुविधाएं मिलें, बल्कि उनकी रूहानी तजुर्बे को भी और समृद्ध किया जाए।
बैठक में जिन योजनाओं की समीक्षा की गई, उनमें धार्मिक सेवाओं का व्यापक विस्तार शामिल है। इसके तहत वैज्ञानिक और दीनि दरस (इल्मी मजलिसें), फिक़्ही और अक़ीदे से जुड़े सवालों के जवाब देने के लिए विशेष कार्यक्रम, और अलग-अलग भाषाओं में प्रमाणिक इस्लामी सामग्री उपलब्ध कराने की योजना बनाई गई है, ताकि दुनिया के हर कोने से आने वाले ज़ायरीन आसानी से समझ सकें।
इमामों और खतीबों के लिए विशेष प्रशिक्षण
रमज़ान की तैयारियों के तहत इमामों और खतीबों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं। इनमें क़ुरआन की तिलावत के हल्क़े (Quranic Circles), ख़ुत्बा और तक़रीर से जुड़े वर्कशॉप, और दावत-ओ-इरशाद के आधुनिक तरीकों पर प्रशिक्षण शामिल है। इसका मक़सद यह है कि रमज़ान के दौरान दी जाने वाली हर तक़रीर, हर ख़ुत्बा और हर दर्स इल्म, हिकमत और रहमत का पैग़ाम बन सके।
इसके अलावा, प्रशासनिक स्तर पर भी पूरी ऑपरेशनल तैयारी की जा रही है, ताकि रमज़ान के दौरान बढ़ने वाली भीड़ को व्यवस्थित तरीके से संभाला जा सके और ज़ायरीन को किसी तरह की परेशानी न हो।
मक्का के डिप्टी गवर्नर को दी गई जानकारी
इसी सिलसिले में एक समन्वय बैठक (Coordination Meeting) भी आयोजित की गई, जिसमें मक्का क्षेत्र के डिप्टी गवर्नर हिज रॉयल हाइनेस प्रिंस सऊद बिन मिशाल बिन अब्दुलअज़ीज़ को रमज़ान की तैयारियों से अवगत कराया गया। शेख अल-सुदैस और ग्रैंड मस्जिद के इमामों के एक प्रतिनिधिमंडल ने उन्हें रमज़ान के लिए बनाई गई विस्तृत योजनाओं की जानकारी दी।
रमज़ान 1447 हिजरी की संभावित शुरुआत
उम्मुल क़ुरा कैलेंडर के अनुसार, रमज़ान 1447 हिजरी का चांद 17 फरवरी 2026 (शाबान 1447 की 29 तारीख) को दिखने की संभावना है। अगर इस दिन चांद दिखाई देता है, तो रमज़ान 2026 की शुरुआत बुधवार, 18 फरवरी 2026 से होगी।
अगर चांद नज़र नहीं आता है, तो 18 फरवरी को शाबान का 30वां दिन माना जाएगा और रमज़ान का पहला रोज़ा गुरुवार, 19 फरवरी 2026 को रखा जाएगा।
तरावीह और तहज्जुद: फर्क और अहमियत
रमज़ान की रातों की शान तरावीह की नमाज़ होती है। तरावीह, ईशा की नमाज़ के बाद अदा की जाती है और यह रमज़ान की विशेष रात्री इबादत है। हालांकि यह फ़र्ज़ नहीं है, लेकिन इसकी बड़ी फज़ीलत बताई गई है। तरावीह को तहज्जुद के समान दर्जा दिया गया है, जबकि तहज्जुद आमतौर पर रात के आख़िरी हिस्से में अकेले अदा की जाती है।
हदीसों के अनुसार, पैग़ंबर हज़रत मुहम्मद ﷺ ने तरावीह की नमाज़ जमाअत के साथ भी अदा की और इसे तहज्जुद से पहले के समय में पढ़ा। आज पूरी दुनिया की मस्जिदों के साथ-साथ मस्जिद अल-हराम और मस्जिद-ए-नबवी में भी तरावीह की नमाज़ बड़े एहतमाम से अदा की जाती है, जिसका सीधा प्रसारण (Live Broadcast) दुनिया भर में देखा जाता है।
मस्जिद अल-हराम में तरावीह पढ़ाने वाले 7 इमाम
दोनों पवित्र मस्जिदों के मामलों की जनरल प्रेसिडेंसी ने 13 जनवरी 2026 को रमज़ान 1447 हिजरी के दौरान मक्का की मस्जिद अल-हराम में तरावीह की नमाज़ पढ़ाने वाले इमामों की सूची जारी कर दी है। इस सूची में कुल 7 इमाम शामिल हैं, और गौर करने वाली बात यह है कि यह सूची पिछले साल की तरह ही है।
मस्जिद अल-हराम में तरावीह की इमामत करने वाले इमाम इस प्रकार हैं:
- शेख अब्दुर्रहमान अल-सुदैस – दोनो पवित्र मस्जिदों के धार्मिक मामलों के अध्यक्ष। उनकी भावनात्मक और प्रभावशाली क़िराअत पूरी दुनिया में मशहूर है।
- शेख माहिर अल-मुऐक़ली – अपनी स्पष्ट और संतुलित तिलावत के लिए जाने जाते हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रिय हैं।
- शेख अब्दुल्लाह जुहैनी – मधुर आवाज़ के लिए प्रसिद्ध, उम्मुल क़ुरा यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर भी हैं।
- शेख बंदर बलीला – सादगी और सुकून भरी क़िराअत के लिए जाने जाते हैं, इस्लामी अध्ययन के प्रोफेसर भी हैं।
- शेख यासिर दोसरी – बुलंद और असरदार आवाज़ के लिए मशहूर, इमाम मुहम्मद बिन सऊद इस्लामिक यूनिवर्सिटी में फैकल्टी सदस्य हैं।
- शेख बद्र अल-तुर्की – गंभीर और ठहराव भरी तिलावत के लिए जाने जाते हैं, उम्मुल क़ुरा यूनिवर्सिटी से जुड़े हैं।
- शेख वलीद अल-शमसान – भावपूर्ण क़िराअत के लिए प्रसिद्ध, अकादमिक क्षेत्र से भी जुड़े हुए हैं।
आगे क्या?
प्रेसिडेंसी ने संकेत दिया है कि तरावीह की पूरी समय-सारणी (Schedule) रमज़ान से कुछ हफ्ते पहले जारी कर दी जाएगी। इसके साथ ही आने वाले दिनों में मदीना की मस्जिद-ए-नबवी में तरावीह की नमाज़ पढ़ाने वाले इमामों की सूची भी जारी की जाएगी।
रमज़ान 1447 हिजरी की ये तैयारियां इस बात का संकेत हैं कि सऊदी अरब प्रशासन और हरमैन शरीफ़ैन की धार्मिक व्यवस्था दुनिया भर से आने वाले मुसलमानों के लिए एक बार फिर एक यादगार, सुकून भरा और रूहानी रमज़ान सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
पढ़ते रहें — मुस्लिम नाउ

