Religion

या अल्लाह अमन अता फ़रमा’: शब-ए-बारात पर भारत भर में माफी और रहमत का पैग़ाम

“या अल्लाह! सबको सेहत और तंदुरुस्ती अता फ़रमा, हिंदुस्तान समेत पूरी दुनिया में अमन क़ायम कर, और हमारे दिलों से दुश्मनी और नफ़रत निकाल दे…”
इन दुआओं की गूंज के साथ देशभर की मस्जिदों, दरगाहों और कब्रिस्तानों में शब-ए-बारात की पाक रात इबादत, तौबा और मग़फिरत की रौशनी में डूबी रही। फज्र की नमाज़ तक चलता रहा इबादत का सिलसिला, और तक़रीबन आधे घंटे तक सामूहिक दुआओं में हाथ उठे रहे। यह मंज़र सिर्फ़ एक जगह का नहीं था, बल्कि साइबर सिटी गुरुग्राम से लेकर कश्मीर की वादियों, दिल्ली, मुंबई, अजमेर और देश के कोने-कोने तक यही तस्वीर देखने को मिली।

मस्जिदों और दरगाहों में उमड़ा अकीदतमंदों का सैलाब

दिल्ली की मशहूर निज़ामुद्दीन दरगाह में शब-ए-बारात की रात रौशनी और रूहानियत का अद्भुत संगम देखने को मिला। दरगाह परिसर में देर रात तक ज़िक्र-ओ-अज़कार, कुरआन की तिलावत और दुआओं का सिलसिला जारी रहा। इसी तरह राजस्थान की अजमेर शरीफ़ दरगाह में भी लाखों ज़ायरीनों ने हाज़िरी लगाई और ख्वाजा गरीब नवाज़ के आस्ताने पर अमन, रहमत और मग़फिरत की दुआ मांगी।

उत्तर भारत से लेकर दक्षिण तक, लगभग हर छोटी-बड़ी मस्जिद में पूरी रात इबादत होती रही। लोग अपने गुनाहों की माफी मांगते नज़र आए और रमज़ान से पहले इस पाक रात को आत्मशुद्धि का ज़रिया बनाया।

कब्रिस्तानों में रौशनी, मजारों पर फातिहा

शब-ए-बारात की एक खास परंपरा—अपने दिवंगत रिश्तेदारों और बुज़ुर्गों की कब्रों पर फातिहा पढ़ना—इस बार भी पूरी अकीदत के साथ निभाई गई। श्रीनगर, दिल्ली, लखनऊ, हैदराबाद, कोलकाता और मुंबई समेत कई शहरों के कब्रिस्तानों में मोमबत्तियों और अगरबत्तियों की रौशनी दिखाई दी। लोग अपने माता-पिता, रिश्तेदारों और दोस्तों की मग़फिरत के लिए दुआ करते रहे।

श्रीनगर में लोगों ने अपने अज़ीज़ों की कब्रों पर दीये जलाए। हालांकि, इस बीच जामा मस्जिद श्रीनगर के बंद रहने को लेकर एक बार फिर सवाल उठे। कश्मीर के प्रमुख धार्मिक नेता मीरवाइज उमर फारूक ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि 2019 के बाद से लगातार शब-ए-बारात समेत कई अहम मौकों पर घाटी की सबसे बड़ी मस्जिद में नमाज़ पर पाबंदी लगाई जा रही है। उन्होंने इसे ‘नॉर्मलसी’ और ‘नया कश्मीर’ के दावों के उलट बताया।

मुंबई में बदला लोकल ट्रेन का टाइम-टेबल

शब-ए-बारात पर अकीदतमंदों की भारी भीड़ को देखते हुए मुंबई में प्रशासन और रेलवे ने विशेष इंतज़ाम किए। पश्चिम रेलवे ने चर्चगेट–विरार रूट पर देर रात विशेष लोकल ट्रेनें चलाईं, ताकि इबादत से लौट रहे लोगों को परेशानी न हो। सोशल मीडिया पर शेयर की गई तस्वीरों और वीडियो में मस्जिदों के बाहर, प्लेटफॉर्म्स पर और लोकल ट्रेनों में श्रद्धालुओं की भीड़ साफ़ देखी जा सकती थी।

दक्षिण भारत से कश्मीर तक एक ही पैग़ाम

तमिलनाडु के कोयंबटूर में जमातुल सालीहीन मस्जिद में शब-ए-बारात की नमाज़ अदा की गई, जहां लोगों ने अल्लाह से रहमत और बरकत की दुआ की। वहीं कश्मीर के हज़रतबल दरगाह में भी रातभर जागरण और इबादत का सिलसिला चला। प्रशासनिक अधिकारियों ने कई ज़ियारत स्थलों का दौरा कर व्यवस्थाओं का जायज़ा लिया।

शब-ए-बारात का आध्यात्मिक महत्व

इस्लाम में शब-ए-बारात को ‘मग़फिरत की रात’, ‘नजात की रात’ और ‘लैलतुल मुबारकाह’ भी कहा जाता है। यह शाबान महीने की 15वीं रात होती है, जिसे रमज़ान से पहले आत्ममंथन, तौबा और तैयारी का अहम अवसर माना जाता है।
उलेमा के अनुसार, इस रात अल्लाह अपने बंदों की सच्ची तौबा क़बूल करता है, गुनाहों को माफ़ करता है और आने वाले साल के लिए रहमतों के दरवाज़े खोलता है। यही वजह है कि मुसलमान इस रात नफ़्ल नमाज़, कुरआन की तिलावत, ज़िक्र और दुआ में मशगूल रहते हैं।

सोशल मीडिया पर रूहानियत की तस्वीरें

शब-ए-बारात के मौके पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर देशभर से तस्वीरों और वीडियो की भरमार रही। कहीं मस्जिदों की जगमगाती रौशनी, कहीं कब्रिस्तानों में दीये, तो कहीं दरगाहों पर उमड़ी भीड़—हर तस्वीर इस पाक रात की रूहानियत बयां कर रही थी। कई लोगों ने एक-दूसरे को “शब-ए-बारात मुबारक” कहकर अमन और भाईचारे का संदेश दिया।

अमन, भाईचारे और इंसानियत की दुआ

इस पाक रात की सबसे बड़ी ख़ासियत यह रही कि दुआओं में सिर्फ़ अपने लिए नहीं, बल्कि पूरी इंसानियत के लिए अमन मांगा गया। मस्जिदों में उठे हाथों में भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए शांति, इंसाफ़ और भाईचारे की दुआ शामिल थी।
शब-ए-बारात की यह रात एक बार फिर याद दिला गई कि मज़हब का असली पैग़ाम नफ़रत नहीं, बल्कि माफी, मोहब्बत और इंसानियत है।

इस तरह, शब-ए-बारात 2026 न सिर्फ़ एक धार्मिक आयोजन के रूप में, बल्कि सामाजिक सौहार्द, आत्मशुद्धि और वैश्विक शांति की दुआ के प्रतीक के तौर पर पूरे देश में मनाई गई—जहां हर दिल से एक ही आवाज़ उठी: अमन रहे, मोहब्बत बढ़े और इंसानियत ज़िंदा रहे।