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AIMIM को झटका: सैयद अहमद पाशा क़ादरी का इंतक़ाल, हैदराबाद की सियासत का अहम अध्याय समाप्त

तेलंगाना और हैदराबाद की राजनीति में एक लंबा, सशक्त और प्रभावशाली अध्याय आज हमेशा के लिए बंद हो गया। सैयद अहमद पाशा क़ादरी, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुसलिमीन (AIMIM) के महासचिव, पूर्व विधायक और पार्टी के स्तंभ माने जाने वाले वरिष्ठ नेता का मंगलवार को 72 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उन्होंने हैदराबाद के कंचनबाग स्थित ओवैसी अस्पताल में अंतिम सांस ली।

परिवार और पार्टी सूत्रों के अनुसार, सैयद अहमद पाशा क़ादरी पिछले दो वर्षों से किडनी संबंधी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे और नियमित उपचार चल रहा था। 30 नवंबर 2025 को तबीयत अचानक बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। लंबी चिकित्सकीय देखरेख के बावजूद, मंगलवार को उनका इंतक़ाल हो गया।

AIMIM और ओवैसी परिवार के भरोसेमंद सिपहसालार

सैयद अहमद पाशा क़ादरी को AIMIM के संस्थापक नेताओं में गिने जाने वाले मरहूम सुल्तान सलाहुद्दीन ओवैसी का सबसे भरोसेमंद साथी और करीबी मित्र माना जाता था। पार्टी संगठन को ज़मीनी स्तर पर मज़बूत करने, पुराने शहर (ओल्ड सिटी) के मुद्दों को विधानसभा और सरकार तक पहुँचाने तथा कार्यकर्ताओं के बीच सेतु की भूमिका निभाने में उनका योगदान ऐतिहासिक रहा।

2008 से अपने निधन तक वह AIMIM के महासचिव पद पर रहे और पार्टी के संगठनात्मक ढांचे को सुदृढ़ बनाए रखने में केंद्रीय भूमिका निभाई।

नगर निगम से विधानसभा तक का राजनीतिक सफ़र

क़ादरी साहब का राजनीतिक जीवन संघर्ष, निरंतरता और जनसेवा का उदाहरण रहा। उन्होंने 1986 से 1991 तक ग्रेटर हैदराबाद म्युनिसिपल कॉरपोरेशन (GHMC) के पार्षद के रूप में सेवा दी। इसके बाद उन्होंने विधानसभा की राजनीति में प्रवेश किया और 2004 में चारमीनार विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए।

चारमीनार सीट से उन्होंने लगातार तीन बार—2004, 2009 और 2014—विधानसभा चुनाव जीतकर AIMIM की पकड़ को और मज़बूत किया। 2018 में उन्होंने याकूतपुरा विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा और वहां से भी जीत दर्ज की। इस तरह वह चार लगातार कार्यकाल तक विधायक रहे—जो उनकी लोकप्रियता और संगठनात्मक ताक़त का प्रमाण है।

2023 के तेलंगाना विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने स्वेच्छा से चुनावी राजनीति से कदम पीछे खींच लिया था, जिसे राजनीतिक शालीनता और नई पीढ़ी को अवसर देने के रूप में देखा गया।

सादगी, मुस्कान और ज़मीनी जुड़ाव

राजनीतिक विरोधियों तक का कहना है कि सैयद अहमद पाशा क़ादरी एक शालीन, सौम्य और मुस्कुराते चेहरे वाले नेता थे। वे बिना शोर-शराबे के काम करने में विश्वास रखते थे। ओल्ड सिटी के विरासत प्रोजेक्ट्स, नागरिक सुविधाओं, अल्पसंख्यक अधिकारों और स्थानीय समस्याओं पर उनकी पकड़ मज़बूत थी।

पूर्व नगर प्रशासन मंत्री के रूप में के. टी. रामाराव ने उनके साथ काम करने के अनुभव को याद करते हुए उन्हें “हमेशा मुस्कान के साथ रहने वाला, शालीन जनप्रतिनिधि” बताया।

अंतिम विदाई और जनसैलाब

सैयद अहमद पाशा क़ादरी की नमाज़-ए-जनाज़ा बुधवार को दोपहर 1:20 बजे मस्जिद-ए-वज़ीर अली, चंदूलाल बरादरी में अदा की जाएगी। इसके बाद उन्हें नूरखान बाज़ार स्थित मस्जिद-ए-हज़रत सैयद मोहीउद्दीन पाशा के कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, अंतिम विदाई में AIMIM कार्यकर्ताओं, स्थानीय नागरिकों और राजनीतिक हस्तियों की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है।

शोक संदेशों का तांता

उनके निधन पर तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी, बीआरएस नेता हरीश राव और के.टी. रामाराव सहित कई दलों के नेताओं ने शोक व्यक्त किया। हरीश राव ने कहा कि “एक समर्पित विधायक के रूप में उनकी सेवाएं हमेशा याद रखी जाएंगी।”

एक युग का अंत

सैयद अहमद पाशा क़ादरी सिर्फ एक राजनेता नहीं थे, बल्कि AIMIM की वैचारिक और संगठनात्मक रीढ़ का अहम हिस्सा थे। उनका जाना न केवल पार्टी के लिए, बल्कि हैदराबाद की राजनीति के लिए भी एक अपूरणीय क्षति है।
उनकी सादगी, प्रतिबद्धता और ज़मीनी राजनीति की विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक बनी रहेगी।