आईएमए के पास 20 एकड़ जमीन ट्रांसफर मामला जांच के घेरे में, मदनी ट्रस्ट से जुड़े सौदे पर सरकार सख्त
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उत्तराखंड सरकार ने मांगी विस्तृत रिपोर्ट, कथित लैंड यूज़ उल्लंघन और सुरक्षा पहलू पर बढ़ी निगरानी; कांग्रेस–बीजेपी आमने-सामने
मुस्लिम नाउ ब्यूरो | नई दिल्ली/देहरादून
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में भारतीय सैन्य अकादमी (IMA) के निकट स्थित करीब 20 एकड़ जमीन के ट्रांसफर और उपयोग को लेकर विवाद गहरा गया है। इस भूमि का संबंध एक इस्लामिक शैक्षिक ट्रस्ट — शेखुल हिंद एजुकेशन चैरिटेबल ट्रस्ट — से बताया जा रहा है, जिसके अध्यक्ष मौलाना महमूद असद मदनी हैं। आरोप है कि यह जमीन मूल उद्देश्य से हटकर छोटे-छोटे रिहायशी प्लॉट्स के रूप में बेची जा रही है। मामले में प्रारंभिक जांच शुरू हो चुकी है और राज्य सरकार ने कड़ी कार्रवाई के संकेत दिए हैं।
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, यह भूमि लगभग दो दशक पहले तत्कालीन कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में एक शैक्षिक संस्थान स्थापित करने के उद्देश्य से आवंटित की गई थी। अब इस जमीन के उपयोग और ट्रांसफर प्रक्रिया को लेकर प्रशासनिक स्तर पर सवाल उठे हैं, खासकर इसलिए क्योंकि यह इलाका आईएमए जैसे संवेदनशील सैन्य प्रशिक्षण संस्थान के नजदीक स्थित है।
प्रारंभिक जांच में क्या सामने आया
विकासनगर के उपजिलाधिकारी (SDM) विनोद कुमार द्वारा की गई प्रारंभिक जांच में संकेत मिला है कि आईएमए के पास ढौलास क्षेत्र में स्थित इस भूखंड को कथित तौर पर आवासीय प्लॉट्स में बांटकर बेचा जा रहा है। रिपोर्ट में यह भी आशंका जताई गई है कि यदि भूमि उपयोग (लैंड यूज़) नियमों का पालन किए बिना ऐसा किया गया है, तो यह न केवल राजस्व नियमों का उल्लंघन हो सकता है, बल्कि सुरक्षा दृष्टि से भी चिंता का विषय बन सकता है।
जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि मूल आवंटन का उद्देश्य शैक्षिक संस्थान की स्थापना था, इसलिए वर्तमान उपयोग और बिक्री की प्रकृति का सत्यापन जरूरी है।
सीएम धामी ने दिए सख्त कार्रवाई के संकेत
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि सरकार इस मामले को गंभीरता से ले रही है और पूरी जांच कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी स्तर पर नियमों का उल्लंघन पाया गया तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि पुराने भूमि आवंटन फैसलों की भी समीक्षा की जा रही है। उनका कहना था कि राज्यहित और सुरक्षा से जुड़े मामलों में किसी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी।
कांग्रेस का पलटवार — “पुराना मामला, बीजेपी भी रही सत्ता में”
विवाद बढ़ने पर कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह मामला वर्ष 2004 का है, जब नारायण दत्त तिवारी राज्य के मुख्यमंत्री थे। रावत ने कहा कि उसके बाद कई बार बीजेपी की सरकार भी राज्य में रही और यदि आवंटन में कोई गड़बड़ी थी तो उसे पहले ही निरस्त किया जा सकता था।
उन्होंने कहा कि पुराने मामलों को राजनीतिक रंग देने के बजाय तथ्यों के आधार पर निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
बीजेपी का आरोप — “खतरनाक मंशा उजागर”
बीजेपी विधायक और प्रदेश प्रवक्ता विनोद चमोली ने इस मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि इससे पूर्ववर्ती सरकारों की नीतियों पर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय जमीन आवंटन के पीछे विशेष उद्देश्य था और अब भूमि माफिया द्वारा अतिक्रमण और व्यावसायिक लाभ के लिए इसका उपयोग किया जा रहा है।
चमोली ने कहा कि बीजेपी के विरोध और जनता के जनादेश के कारण कथित बड़े प्रोजेक्ट आगे नहीं बढ़ सके।
ट्रस्ट का पक्ष आना बाकी
जिस शेखुल हिंद एजुकेशन चैरिटेबल ट्रस्ट का नाम इस मामले में सामने आ रहा है, उसकी ओर से अभी विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। जानकारों का कहना है कि ट्रस्ट का पक्ष और दस्तावेज सामने आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि किसी ट्रस्ट या संस्था को विशेष उद्देश्य के लिए जमीन आवंटित की जाती है, तो उसके उपयोग में बदलाव के लिए सक्षम प्राधिकारी से अनुमति लेना अनिवार्य होता है। बिना अनुमति उपयोग बदलना या व्यावसायिक बिक्री करना नियम विरुद्ध माना जा सकता है।
संवेदनशील शब्दों के इस्तेमाल पर भी बहस
मामले को लेकर कुछ संगठनों और मंचों पर उग्र शब्दावली का उपयोग भी किया जा रहा है, लेकिन प्रशासनिक रिकॉर्ड में फिलहाल इसे भूमि आवंटन और उपयोग नियमों की जांच के रूप में ही देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि जांच पूरी होने से पहले किसी भी सामुदायिक या वैचारिक निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
आगे की संभावित कार्रवाई
सूत्रों के अनुसार जांच के अगले चरण में:
- मूल आवंटन आदेश और शर्तों की समीक्षा
- वर्तमान स्वामित्व और रजिस्ट्री रिकॉर्ड की जांच
- लैंड यूज़ परिवर्तन की वैधता का परीक्षण
- सुरक्षा एजेंसियों से इनपुट
- संबंधित ट्रस्ट और खरीदारों से जवाब तलब
राज्य सरकार ने संकेत दिया है कि रिपोर्ट मिलने के बाद आवश्यक होने पर आवंटन निरस्त करने, बिक्री रोकने या कानूनी कार्रवाई जैसे कदम भी उठाए जा सकते हैं।
निष्कर्ष
आईएमए के निकट भूमि ट्रांसफर का यह मामला अब प्रशासनिक जांच, राजनीतिक आरोप–प्रत्यारोप और कानूनी समीक्षा — तीनों स्तर पर आगे बढ़ रहा है। अंतिम सच्चाई जांच रिपोर्ट और आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर ही सामने आएगी। फिलहाल सरकार ने स्पष्ट किया है कि नियमों और सुरक्षा से जुड़े मामलों में कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

