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Samastha Centenary Conference Kerala: मुस्लिम उलेमा ने नफ़रत के ख़िलाफ़ एकजुटता दिखाई

जब उत्तराखंड में ‘मुहम्मद दीपक’ प्रकरण अपने चरम पर था और देश के एक हिस्से में नफ़रत की राजनीति ज़ोर पकड़ रही थी, उसी वक्त केरल की धरती पर भारत के लाखों मुसलमानों ने एक ऐसा दृश्य रचा, जिसने इतिहास के पन्नों में नई इबारत जोड़ दी। अवसर था Samastha Kerala Jamiyyathul Ulama के 100वें स्थापना वर्ष के मौके पर आयोजित शताब्दी यात्रा और अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का।

तिरुवनंतपुरम के ऐतिहासिक पुथारिकंदम मैथनम से लेकर कासरगोड के कुनिया तक फैली यह शताब्दी यात्रा सिर्फ़ एक धार्मिक आयोजन नहीं थी, बल्कि यह भारत के सेक्युलर और संवैधानिक चरित्र के पक्ष में एक सामूहिक जनघोषणा बनकर उभरी। लाखों लोगों की मौजूदगी ने साफ़ संकेत दिया कि भारत को किसी एक पहचान में बांधने का सपना देखने वालों के लिए यह मजमा एक करारा जवाब था।

सेक्युलर राजनीति और उलेमा की एकजुट आवाज़

इस ऐतिहासिक मौके पर केरल और देश के अनेक सेक्युलर नेता मंच पर मौजूद थे। हज़ारों उलेमा ने एक स्वर में यह संकल्प लिया कि नफ़रत और उकसावे का जवाब इस्लामी मूल्यों और भारतीय संविधान के दायरे में रहकर, शांति और समझदारी से दिया जाएगा। यह संदेश साफ़ था—संघर्ष नहीं, संवाद; टकराव नहीं, तर्क।

केरल के मुख्यमंत्री Pinarayi Vijayan ने तिरुवनंतपुरम में शताब्दी यात्रा के स्वागत समारोह का उद्घाटन करते हुए कहा कि समस्था जैसी संस्थाओं ने केरल को सांप्रदायिक ज़हर से बचाए रखने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है। उन्होंने चेताया कि लोकतंत्र तभी मज़बूत रहेगा, जब हर योग्य नागरिक की आवाज़ सुनी जाएगी और किसी को भी हाशिये पर नहीं छोड़ा जाएगा।

मतदाता सूची से लेकर लोकतंत्र तक

सम्मेलन के दौरान समस्था के अध्यक्ष सैयद मुहम्मद जिफरी मुथुकोया थंगल ने केरल में मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) के दौरान 24 लाख से अधिक नाम छूट जाने पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि यदि एक भी योग्य नागरिक मतदाता सूची से बाहर रहता है, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करता है। उन्होंने प्रशासन से जनता की आशंकाओं को दूर करने और पारदर्शिता बरतने की अपील की।

कुनिया बना ‘जनसैलाब’

4 से 8 फरवरी 2026 तक कासरगोड के कुनिया में आयोजित अंतरराष्ट्रीय शताब्दी सम्मेलन के अंतिम दिन का दृश्य अविस्मरणीय रहा। “कुणिया आज क़दर-ए-समुंदर” — यह नारा सिर्फ़ एक भावनात्मक अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि ज़मीनी सच्चाई था। केरल के कोने-कोने से लोग इस आयोजन में पहुंचे। अनुशासन, विचारशीलता और संगठनात्मक क्षमता ने इस सम्मेलन को मिसाल बना दिया।

राजनीतिक और बौद्धिक समर्थन

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता Ramesh Chennithala ने समस्था की भूमिका को केरल की सेक्युलर विरासत का प्रहरी बताया। उन्होंने कहा कि बीते सौ वर्षों में समस्था ने सांप्रदायिकता के मुक़ाबले प्रेम और भाईचारे की जो परंपरा कायम की है, वही उसकी सबसे बड़ी ताक़त है।

अंतरराष्ट्रीय इस्लामी जगत की मौजूदगी

इस शताब्दी सम्मेलन की गूंज भारत से बाहर भी सुनाई दी। मिस्र स्थित प्रतिष्ठित इस्लामी संस्था Al-Azhar के ग्रैंड इमाम के निर्देश पर इस्लामिक रिसर्च अकादमी के महासचिव प्रो. डॉ. Mohamed El-Gendy ने सम्मेलन में शिरकत की। “Ideal Purity Across the Centuries (1926–2026)” थीम के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में मुस्लिम एकता, भाईचारे और समकालीन चुनौतियों से निपटने पर ज़ोर दिया गया।

अल-अज़हर के प्रतिनिधियों ने कहा कि आज के दौर में जब इस्लाम को लेकर ग़लत धारणाएं फैलाई जा रही हैं, तब समस्था जैसे मंच वैश्विक इस्लामी एकजुटता और संतुलित विचारधारा के लिए बेहद ज़रूरी हैं।

शताब्दी यात्रा का ऐतिहासिक सफ़र

समस्था शताब्दी संदेश यात्रा नागरकोइल से शुरू होकर तिरुवनंतपुरम और कोल्लम जिलों से गुज़री। हर जगह इसका भव्य स्वागत हुआ। इस यात्रा का मक़सद सिर्फ़ बीते सौ वर्षों की उपलब्धियों को गिनाना नहीं था, बल्कि शिक्षा, सामाजिक सुधार और आध्यात्मिक मूल्यों के प्रति नई पीढ़ी को जागरूक करना भी था।

राज्य भर में संदेश फैलाने के बाद यह यात्रा दिसंबर के अंत में मंगलुरु में अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंचेगी।

नफ़रत के दौर में उम्मीद की रोशनी

आज जब देश में धार्मिक ध्रुवीकरण और नफ़रत की राजनीति सुर्खियों में है, ऐसे में समस्था का शताब्दी सम्मेलन उम्मीद की एक मज़बूत किरण बनकर सामने आया है। यह आयोजन बताता है कि भारत की विविधता, उसका संविधान और उसकी साझा संस्कृति अभी भी जीवित है—और उसे बचाने के लिए लाखों लोग एकजुट होने को तैयार हैं।

समस्था के सौ साल सिर्फ़ एक संस्था की उम्र नहीं, बल्कि भारत के सेक्युलर ताने-बाने की सौ साल की हिफ़ाज़त की कहानी हैं।