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रमजान 2026: सऊदी सुप्रीम कोर्ट की चांद देखने की अपील , भारत-पाकिस्तान की नजरें रियाद पर टिकीं

रमजान 2026 की आमद के साथ ही पूरी दुनिया के मुसलमानों की निगाहें सऊदी अरब की ओर टिक गई हैं। सऊदी अरब के सुप्रीम कोर्ट ने किंगडम के नागरिकों और वहां रह रहे मुसलमानों से अपील की है कि वे मंगलवार की शाम रमजान के चांद (हिलाल) को देखने की कोशिश करें और यदि चांद नजर आए तो उसकी सूचना नजदीकी अदालत में दर्ज कराएं। इसी घोषणा के आधार पर पवित्र महीने की शुरुआत का आधिकारिक ऐलान किया जाएगा।

सऊदी प्रेस एजेंसी के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जो भी व्यक्ति नंगी आंखों या दूरबीन के माध्यम से चांद देखे, वह तुरंत नजदीकी अदालत से संपर्क करे या स्थानीय प्रशासनिक केंद्र में जाकर अपनी गवाही दर्ज कराए। अदालत ने यह भी उम्मीद जताई है कि जिन लोगों को चांद देखने का अनुभव है, वे अपने-अपने इलाकों में गठित समितियों के साथ मिलकर इस धार्मिक कर्तव्य को निभाएं, ताकि समूचे मुस्लिम समाज को इसका लाभ मिल सके।

मंगलवार को इस्लामी कैलेंडर के अनुसार शाबान की 29वीं तारीख होगी। यदि मंगलवार की शाम चांद दिखाई देता है तो सऊदी अरब में बुधवार से रमजान की शुरुआत हो जाएगी। लेकिन यदि चांद नजर नहीं आता तो शाबान के 30 दिन पूरे किए जाएंगे और रमजान गुरुवार से शुरू होगा।

भारत में भी सऊदी अरब की घोषणा का विशेष महत्व है। परंपरागत रूप से भारत के अधिकांश सुन्नी मुसलमान सऊदी अरब की चांद देखने की घोषणा का अनुसरण करते हैं। सऊदी अरब में पहला रोजा जिस दिन रखा जाएगा, भारत में उसके अगले दिन से रमजान शुरू होने की संभावना रहती है। हालांकि सऊदी अरब में चांद दिखने की पुष्टि होते ही भारत की कई मस्जिदों में उसी रात से तरावीह की नमाज शुरू हो जाती है। यही कारण है कि सऊदी सुप्रीम कोर्ट के ऐलान के साथ ही भारत के मुसलमानों की नजरें रियाद की ओर टिक जाती हैं।

दूसरी ओर पाकिस्तान में भी रमजान के चांद को लेकर हलचल तेज हो गई है। पाकिस्तान की राष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसी ‘स्पेस एंड अपर एटमॉस्फेयर रिसर्च कमीशन’ (SUPARCO) ने घोषणा की है कि 17 फरवरी को शाम 5 बजकर 1 मिनट (पाकिस्तान मानक समय) पर नए चांद का जन्म होगा। 18 फरवरी की शाम सूर्यास्त के समय चांद की आयु लगभग 25 घंटे 48 मिनट होगी, जो उसे नंगी आंखों से देखने के लिए अनुकूल मानी जा रही है।

SUPARCO ने अपने बयान में कहा है कि खगोलीय मानकों के आधार पर 18 फरवरी 2026 की शाम को नए चांद के दिखाई देने की संभावना काफी प्रबल है। ऐसे में पाकिस्तान में रमजान का पहला रोजा 19 फरवरी को होने की संभावना जताई गई है। हालांकि अंतिम निर्णय पाकिस्तान की केंद्रीय ‘रूएत-ए-हिलाल समिति’ ही करेगी, जो देशभर से प्राप्त विश्वसनीय गवाहियों और प्रत्यक्ष अवलोकन के आधार पर आधिकारिक घोषणा करती है।

पाकिस्तान में हर नए इस्लामी महीने की शुरुआत का ऐलान रूएत-ए-हिलाल समिति द्वारा किया जाता है। यह समिति देश के विभिन्न हिस्सों से प्राप्त चांद दिखने की गवाहियों की जांच करती है और उसके बाद रमजान या ईद की तारीख तय करती है। कई बार खगोलीय अनुमान और प्रत्यक्ष गवाही में अंतर होने के कारण वहां बहस भी होती रही है, लेकिन अंतिम निर्णय समिति का ही मान्य होता है।

रमजान इस्लाम के पांच स्तंभों में से एक है। इस महीने में मुसलमान सूर्योदय से सूर्यास्त तक खाने-पीने और अन्य सांसारिक इच्छाओं से परहेज करते हैं। यह महीना आत्मसंयम, इबादत, कुरआन की तिलावत, दान-पुण्य और आत्मशुद्धि का प्रतीक है। रोजा केवल भूखे-प्यासे रहने का नाम नहीं, बल्कि विचारों और आचरण की पवित्रता का अभ्यास भी है।

रमजान की समाप्ति नए चांद के दिखाई देने के साथ होती है, जिसे ईद-उल-फितर के रूप में मनाया जाता है। यह त्योहार पूरी दुनिया के मुसलमानों के लिए खुशी, भाईचारे और कृतज्ञता का प्रतीक है। ईद से पहले फितरा (दान) अदा किया जाता है ताकि समाज के जरूरतमंद लोग भी त्योहार की खुशियों में शामिल हो सकें।

इस बार रमजान 2026 को लेकर विशेष उत्साह इसलिए भी है क्योंकि कई मुस्लिम देशों में सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों के बीच लोग इस पवित्र महीने को आध्यात्मिक सुकून और सामूहिक एकता के अवसर के रूप में देख रहे हैं। मस्जिदों में तरावीह की नमाज, इफ्तार की महफिलें और सहरी की रौनक पूरे इस्लामी जगत को एक साझा आध्यात्मिक अनुभव में जोड़ देती हैं।

अब सबकी निगाहें मंगलवार की शाम पर टिकी हैं। क्या शाबान 29 की रात चांद दिखाई देगा या एक दिन और इंतजार करना होगा—यह फैसला सऊदी अरब की आधिकारिक घोषणा के साथ स्पष्ट हो जाएगा। लेकिन इतना तय है कि जैसे ही हिलाल की पुष्टि होगी, पूरी दुनिया में इबादत, रहमत और बरकत के महीने रमजान का आगाज हो जाएगा।