बांग्लादेश में नई सरकार का गठन: तारिक रहमान के मंत्रिमंडल में कौन-कौन?
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अब्दुल्ला अल मामून,ढाका/नई दिल्ली
बांग्लादेश की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत होने जा रही है। लगभग दो दशकों के लंबे इंतजार के बाद बांग्लादेश राष्ट्रवादी पार्टी (बीएनपी) पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में लौट रही है और पार्टी अध्यक्ष तारिक रहमान देश के अगले प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं। 13वें संसदीय चुनाव में 200 से अधिक सीटों पर जीत दर्ज कर बीएनपी ने न केवल राजनीतिक वापसी की है, बल्कि एक मजबूत और निर्णायक जनादेश भी हासिल किया है। अब पूरे देश की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि तारिक रहमान का मंत्रिमंडल कैसा होगा और उसमें किन चेहरों को जगह मिलेगी।
वरिष्ठ और नए चेहरों का संतुलन
पार्टी सूत्रों के अनुसार, बनने वाले मंत्रिमंडल में अनुभव और युवा ऊर्जा का संतुलन देखने को मिल सकता है। बीएनपी की स्थायी समिति और विभिन्न स्तरों के नेताओं के साथ हुई चर्चाओं से संकेत मिला है कि 2001 से 2006 तक की पिछली बीएनपी सरकार में शामिल रहे कुछ वरिष्ठ नेता फिर से मंत्री पद की जिम्मेदारी संभाल सकते हैं। साथ ही पहली बार सांसद बने कई युवा और पेशेवर पृष्ठभूमि के नेताओं को भी मौका दिया जा सकता है।
संभावित नामों में पार्टी महासचिव मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर, स्थायी समिति सदस्य सलाहुद्दीन अहमद, मेजर (सेवानिवृत्त) हाफिज उद्दीन अहमद, अमीर खसरू महमूद चौधरी, अब्दुल मोइन खान, गायेश्वर चंद्र रॉय, इकबाल हसन महमूद टुकू और डॉ. अजम जाहिद हुसैन प्रमुख हैं। इसके अलावा नजरुल इस्लाम खान और सेलिमा रहमान को टेक्नोक्रेट कोटे से शामिल किए जाने की चर्चा है।
पार्टी के उपाध्यक्ष अब्दुल अवल मिंटू और संगठन सचिव शमा ओबैद का नाम भी संभावित मंत्रियों की सूची में बताया जा रहा है। नए चेहरों में अधिवक्ता असदुज्जमान असद और बैरिस्टर कैसर कमाल को भी मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है।
इसके अतिरिक्त वरिष्ठ संयुक्त महासचिव रुहुल कबीर रिजवी, संयुक्त महासचिव हबीब उन नबी खान सोहेल और मीडिया सेल के संयोजक मौदूद आलमगीर पावेल को भी तकनीकी कोटे से शामिल किए जाने की संभावना जताई जा रही है।
गठबंधन सहयोगियों को प्रतिनिधित्व?
बीएनपी ने 209 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया है, लेकिन चुनाव में उसके साथ जुड़े गठबंधन सहयोगियों को भी सरकार में प्रतिनिधित्व देने पर विचार हो रहा है। जन एकजुटता आंदोलन के मुख्य समन्वयक जोनायेद साकी और जन अधिकार परिषद के अध्यक्ष नूरुल हक नूर के नाम प्रमुखता से लिए जा रहे हैं।
बांग्लादेश जातीय पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष अंदलीब रहमान पार्थ, हाल ही में बीएनपी में शामिल हुए बॉबी हज्जाज, शहादत हुसैन सलीम और डॉ. रजा किबरिया जैसे नेताओं को भी मंत्री पद मिल सकता है। हालांकि अंतिम निर्णय स्थायी समिति की बैठक के बाद ही होगा।
मंत्रिमंडल का आकार और शपथग्रहण
मंत्रिमंडल का आकार कितना बड़ा होगा, इस पर आज रात होने वाली स्थायी समिति की बैठक में चर्चा होने की संभावना है। सूत्रों के अनुसार, सांसदों का शपथ ग्रहण समारोह राष्ट्रीय संसद भवन के साउथ प्लाजा में सुबह 10 बजे आयोजित होगा, जबकि मंत्रिमंडल के सदस्य शाम 4 बजे शपथ लेंगे।
सरकारी तैयारियाँ तेज
नई सरकार के गठन के मद्देनज़र प्रशासनिक तैयारियाँ भी जोर-शोर से चल रही हैं। ढाका के बेली रोड, गुलशन, धानमंडी और मिंटो रोड क्षेत्रों में लगभग 40 सरकारी आवास तैयार रखे गए हैं। इन आवासों में आवश्यक मरम्मत, पेंटिंग और स्वच्छता कार्य भी शुरू कर दिए गए हैं।
सरकारी वाहन विभाग ने मंत्रियों के लिए 50 आलीशान वाहन तैयार रखे हैं, जिनमें पाँच अतिरिक्त वाहन वीवीआईपी प्रोटोकॉल के तहत रिजर्व रखे गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि अंतिम संख्या शपथ ग्रहण के दिन तय की जाएगी।
प्रधानमंत्री आवास पर विचार
प्रधानमंत्री के निवास के रूप में ‘जमुना’ गेस्ट हाउस को अस्थायी तौर पर विचाराधीन रखा गया है, जहां वर्तमान में अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार डॉ. मुहम्मद यूनुस रहते हैं। हालांकि अंतिम निर्णय तारिक रहमान स्वयं करेंगे।
पहले स्पीकर और डिप्टी स्पीकर के आवासों को मिलाकर स्थायी प्रधानमंत्री निवास बनाने का प्रस्ताव भी आया था, लेकिन इसे लागू करने में कई व्यावहारिक चुनौतियाँ हैं।
नीति और प्राथमिकताएँ
तारिक रहमान पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि उनकी प्राथमिकताएँ आर्थिक सुधार, कानून-व्यवस्था की मजबूती और सुशासन स्थापित करना होंगी। उन्होंने कहा है कि देश गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है और सरकार का मुख्य लक्ष्य अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाना और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाना होगा।
उम्मीदों का दौर
बीएनपी चौथी बार सत्ता में लौट रही है, लेकिन इस बार परिस्थितियाँ अलग हैं। क्षेत्रीय कूटनीति, आर्थिक पुनर्निर्माण और आंतरिक स्थिरता की कसौटी पर यह सरकार कितनी सफल होगी, यह आने वाला समय तय करेगा।
फिलहाल, बांग्लादेश की राजनीति में उत्साह और उम्मीद का माहौल है। जनता की निगाहें अब नए मंत्रिमंडल की घोषणा पर टिकी हैं, जो यह तय करेगा कि आने वाले वर्षों में देश की दिशा और दशा कैसी होगी।

