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ईरान में बड़ा सैन्य फेरबदल: अहमद वाहिदी बने आईआरजीसी के नए कमांडर

तेल अवीव/तेहरान

ईरान में जारी भीषण राष्ट्रीय संकट के बीच इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) के नेतृत्व में बड़ा बदलाव किया गया है। राज्य-नियंत्रित ईरानी मीडिया के अनुसार, जनरल अहमद वाहिदी को आईआरजीसी का नया कमांडर नियुक्त किया गया है। यह नियुक्ति पूर्व कमांडर मोहम्मद फखपौर की हत्या के बाद की गई है।

रिपोर्टों के मुताबिक, हाल ही में हुए अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हवाई हमलों—जिन्हें अमेरिकी पक्ष ने “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” नाम दिया है—में ईरान के कई शीर्ष सैन्य और राजनीतिक नेताओं की मौत हुई। इन हमलों में आईआरजीसी के पूर्व प्रमुख मोहम्मद पाकपुर और ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामनेई के मारे जाने की भी पुष्टि की जा चुकी है। ऐसे संवेदनशील समय में वाहिदी की नियुक्ति को ईरान की सैन्य संरचना को स्थिर करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

कौन हैं अहमद वाहिदी?

अहमद वाहिदी ईरान की सेना में लंबे समय से सक्रिय और प्रभावशाली चेहरा रहे हैं। वे पहले कुद्स फोर्स (Quds Force) के कमांडर रह चुके हैं, जो आईआरजीसी की विदेशी अभियानों की विशेष इकाई मानी जाती है। अक्टूबर 2025 में उन्हें ईरान की सशस्त्र बलों के जनरल स्टाफ का उप-प्रमुख नियुक्त किया गया था।

वाहिदी इससे पहले ईरान के रक्षा मंत्री और गृह मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी कार्य कर चुके हैं। उनकी पहचान एक कट्टर और रणनीतिक सैन्य योजनाकार के रूप में की जाती है।

इंटरपोल की रेड नोटिस

अहमद वाहिदी का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विवादों से भी जुड़ा रहा है। 1994 में अर्जेंटीना की राजधानी ब्यूनस आयर्स में एएमआईए (AMIA) यहूदी सामुदायिक केंद्र पर हुए बम विस्फोट मामले में इंटरपोल ने 2007 में उनके खिलाफ रेड नोटिस जारी की थी।

इस हमले में 85 लोगों की मौत हुई थी और लगभग 300 लोग घायल हुए थे। आरोप है कि एक आत्मघाती हमलावर ने 275 किलो विस्फोटक से भरे ट्रक को इमारत से टकरा दिया था। अर्जेंटीना ने इस हमले के पीछे ईरानी अधिकारियों की भूमिका का आरोप लगाया था, जिसे ईरान लगातार खारिज करता रहा है।

संकट की घड़ी में सख्त संदेश

वाहिदी की नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब ईरान एक साथ कई मोर्चों पर दबाव में है। अमेरिका और इजरायल के हमलों ने ईरान के सैन्य नेतृत्व को बड़ा झटका दिया है। सुप्रीम लीडर और आईआरजीसी प्रमुख की मौत के बाद सत्ता और सैन्य ढांचे को पुनर्गठित करना तेहरान की प्राथमिकता बन गया है।

विश्लेषकों का मानना है कि वाहिदी जैसे सख्त और अनुभवी कमांडर की तैनाती ईरान की ओर से एक स्पष्ट संदेश है कि वह दबाव में झुकने वाला नहीं है। आईआरजीसी ईरान की सबसे शक्तिशाली सैन्य और वैचारिक इकाई है, और उसका नेतृत्व संभालना अत्यंत महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मानी जाती है।

आगे क्या?

मौजूदा हालात में यह नियुक्ति क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा सकती है, क्योंकि वाहिदी का नाम पहले से ही अंतरराष्ट्रीय विवादों में रहा है। पश्चिमी देशों की प्रतिक्रिया पर भी नजर रहेगी।

फिलहाल, ईरान की प्राथमिकता अपने सैन्य नेतृत्व को स्थिर करना और जवाबी रणनीति तैयार करना है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि वाहिदी के नेतृत्व में आईआरजीसी किस दिशा में कदम बढ़ाती है और क्षेत्रीय संघर्ष किस स्तर तक जाता है।