खामनेई का नेहरू और भारत की आज़ादी के प्रति सम्मान: पुराने वीडियो वायरल, पर दिल्ली की चुप्पी
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मुस्लिम नाउ ब्यूरो, नई दिल्ली
ईरान के सर्वोच्च नेता Ayatollah Ali Khamenei की इज़रायल-अमेरिका के संयुक्त हवाई हमले में कथित हत्या के बाद वैश्विक राजनीति में हलचल तेज है। जहां पश्चिम एशिया में सैन्य और कूटनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं, वहीं भारत में एक अलग बहस छिड़ गई है—खामनेई के भारत और पंडित जवाहरलाल नेहरू को लेकर दिए गए सकारात्मक बयानों को लेकर।
सोशल मीडिया पर खामनेई के कई पुराने वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिनमें वे भारत की आज़ादी के संघर्ष और देश के प्रथम प्रधानमंत्री Jawaharlal Nehru के विचारों की खुलकर सराहना करते नजर आते हैं। इन वीडियो को बॉलीवुड हस्तियों, पत्रकारों और सोशल एक्टिविस्टों ने भी साझा किया है।
Imam #Khamenei asked people to read a book written by Pandit Jawahar Lal Nehru. Padhe Likhon Ki Baat Hoti Hi Hai. pic.twitter.com/7hQfVaEZrm
— KRK (@kamaalrkhan) March 1, 2026
‘Glimpses of World History’ पढ़ने की अपील
वायरल वीडियो में खामनेई अपने एक भाषण के दौरान लोगों से नेहरू की प्रसिद्ध पुस्तक Glimpses of World History पढ़ने की अपील करते दिखाई देते हैं। उन्होंने कहा था कि इस किताब में नेहरू ने विस्तार से बताया है कि किस तरह ब्रिटिश साम्राज्यवाद भारत में आया और किस प्रकार उपनिवेशवादी शक्तियों ने देश को लूटा।
खामनेई ने अपने संबोधन में पश्चिमी देशों की साम्राज्यवादी नीतियों की आलोचना करते हुए नेहरू को एक ऐसे नेता के रूप में प्रस्तुत किया था, जिन्होंने इतिहास को औपनिवेशिक नजरिए से परे जाकर समझाने की कोशिश की।
जब Khamenei ने एक स्पीच के दौरान लोगों से पंडित नेहरू की किताब Glimpses of World History का जिक्र कर उसे पढ़ने की अपील की थी।
— Govind Pratap Singh | GPS (@govindprataps12) March 1, 2026
Khamenei का कहना था- पंडित नेहरू ने किताब में तफ़सील से लिखा है कि कैसे अंग्रेज़ भारत आए और क्या करतूतें कीं।
सुनिए 👇🏼#WorldWar3 #Iran #Khamenei pic.twitter.com/pZa6McYFT4
सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़
इस वीडियो को शेयर करते हुए कई यूजर्स ने टिप्पणी की कि खामनेई ने नेहरू के बौद्धिक योगदान को वैश्विक मंच से स्वीकार किया था। एक पोस्ट में लिखा गया कि “जब खामनेई ने स्पीच में पंडित नेहरू की किताब का जिक्र कर उसे पढ़ने की अपील की थी।”
कुछ यूजर्स ने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नेहरू को जिस तरह सम्मान मिला, वह भारत की बौद्धिक विरासत का प्रमाण है। वहीं कुछ लोगों ने इसे मौजूदा राजनीतिक विमर्श से जोड़ते हुए केंद्र सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाए।
In one of his speeches, Ali #Khamenei urged everyone to read the book "Glimpses of World History" by Nehru
— Nehr_who? (@Nher_who) March 1, 2026
He praised Nehru for explaining the Imperialist policy of Western countries and how they colonized India & looted them
While the world acknowledges Nehru our PM mocks him pic.twitter.com/aHMM7ScNRN
ईरान-भारत संबंधों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत और ईरान के बीच संबंध सदियों पुराने रहे हैं—चाहे वह सांस्कृतिक आदान-प्रदान हो, ऊर्जा सहयोग या रणनीतिक साझेदारी। दोनों देशों ने गुटनिरपेक्ष आंदोलन के दौर से लेकर हाल के वर्षों तक कई वैश्विक मंचों पर साझा हितों को आगे बढ़ाया है।
विश्लेषकों का कहना है कि खामनेई का भारत के स्वतंत्रता संग्राम और नेहरू के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण इस ऐतिहासिक रिश्ते की झलक दिखाता है। हालांकि, कश्मीर जैसे मुद्दों पर उनके बयानों की भारत में आलोचना भी होती रही है।
हत्या के बाद भारत सरकार की चुप्पी
खामनेई और उनके परिजनों की कथित हत्या के बाद अब तक भारत सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। इस चुप्पी को लेकर सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।
कुछ विश्लेषकों का मानना है कि वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में भारत अपनी कूटनीतिक प्राथमिकताओं को संतुलित रखने की कोशिश कर रहा है। अमेरिका और इज़रायल के साथ रणनीतिक संबंधों को देखते हुए नई दिल्ली का रुख सावधानीपूर्ण हो सकता है।
पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव
खामनेई की मौत की खबर ऐसे समय आई है जब इज़रायल और अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए संयुक्त हमलों के बाद क्षेत्र में तनाव चरम पर है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने हमलों को “न्याय” बताते हुए आगे भी सैन्य कार्रवाई जारी रखने की बात कही है।
वहीं ईरान में 40 दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की गई है और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। उत्तराधिकार की प्रक्रिया और संभावित सत्ता परिवर्तन पर पूरी दुनिया की नजर है।
नेहरू का वैश्विक प्रभाव और आज का संदर्भ
जवाहरलाल नेहरू की किताब Glimpses of World History को विश्व इतिहास की लोकप्रिय पुस्तकों में गिना जाता है। यह पत्रों के रूप में लिखी गई पुस्तक औपनिवेशिक इतिहास की वैकल्पिक व्याख्या प्रस्तुत करती है। खामनेई द्वारा इस पुस्तक का उल्लेख यह दर्शाता है कि नेहरू का प्रभाव केवल भारत तक सीमित नहीं रहा।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय नेताओं द्वारा भारत के स्वतंत्रता संग्राम और नेहरू की सराहना भारत की सॉफ्ट पावर का हिस्सा रही है।
क्या बदलेगा भारत का रुख?
मौजूदा घटनाक्रम में यह सवाल अहम है कि क्या भारत औपचारिक प्रतिक्रिया देगा या रणनीतिक चुप्पी बनाए रखेगा। भारत के लिए पश्चिम एशिया न केवल ऊर्जा सुरक्षा बल्कि प्रवासी भारतीयों के हितों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत संतुलन की नीति पर कायम रहते हुए क्षेत्रीय स्थिरता की अपील कर सकता है, लेकिन सीधे तौर पर किसी पक्ष का समर्थन करने से बच सकता है।
निष्कर्ष
आयतुल्ला अली खामनेई के भारत और नेहरू को लेकर दिए गए सकारात्मक बयान आज फिर चर्चा में हैं। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो न केवल एक ऐतिहासिक संदर्भ को सामने लाते हैं, बल्कि मौजूदा कूटनीतिक समीकरणों पर भी सवाल खड़े करते हैं।
खामनेई की मौत के बाद पश्चिम एशिया में उभरते घटनाक्रम और भारत की संभावित भूमिका आने वाले दिनों में स्पष्ट होगी। फिलहाल, इतिहास के ये पुराने वीडियो यह याद दिला रहे हैं कि वैश्विक राजनीति में विचारों और व्यक्तित्वों की गूंज सीमाओं से परे जाती है।

