ईरानी हमले के बाद यूएई की कार्रवाई: 165 बैलिस्टिक मिसाइलें और 541 ड्रोन मार गिराए, तीन विदेशी नागरिकों की मौत
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मुस्लिम नाउ ब्यूरो, दुबई
पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने दावा किया है कि उसने 28 फरवरी से शुरू हुए ईरानी हमले के बाद अब तक 165 बैलिस्टिक मिसाइलों, दो क्रूज़ मिसाइलों और 541 ड्रोन को इंटरसेप्ट किया है। यूएई के रक्षा मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जारी बयान में यह जानकारी दी, जिसे अबू धाबी स्थित भारतीय दूतावास ने भी साझा किया।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, वायु सेना और वायु रक्षा बलों ने बड़े पैमाने पर किए गए हमलों को विफल करने में सफलता पाई है। हालांकि, इन हमलों में तीन विदेशी नागरिकों की मौत और 58 लोगों के घायल होने की पुष्टि भी की गई है।
दूसरे दिन की कार्रवाई: 20 मिसाइलें नष्ट, 311 ड्रोन गिराए
रक्षा मंत्रालय ने हमले के दूसरे दिन की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि सुरक्षा बलों ने 20 बैलिस्टिक मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया, जबकि आठ मिसाइलें समुद्र में गिर गईं। इसके अलावा दो क्रूज़ मिसाइलों और 311 ड्रोन को भी मार गिराया गया।
हालांकि, 21 ड्रोन नागरिक ठिकानों पर गिरने में सफल रहे, जिससे कुछ भौतिक क्षति हुई। मंत्रालय के मुताबिक, कुल 541 ड्रोन में से 506 को इंटरसेप्ट कर नष्ट कर दिया गया, जबकि 35 देश के भीतर गिरे।
कुल आंकड़े: 165 मिसाइलें और 541 ड्रोन निष्क्रिय
यूएई रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि 28 फरवरी से शुरू हुए हमलों के बाद से अब तक 152 बैलिस्टिक मिसाइलों को नष्ट किया गया और 13 समुद्री जलक्षेत्र में गिरीं। कुल मिलाकर 165 बैलिस्टिक मिसाइलों से निपटा गया है।
यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब इज़रायल और अमेरिका ने ईरान के खिलाफ संयुक्त सैन्य अभियान—‘ऑपरेशन रोअरिंग लायन’ और ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’—चलाया है। इन हमलों के बाद क्षेत्रीय तनाव चरम पर है।
तीन विदेशी नागरिकों की मौत, 58 घायल
इन हमलों के दौरान तीन लोगों की मौत हुई, जिनकी राष्ट्रीयता पाकिस्तानी, नेपाली और बांग्लादेशी बताई गई है। इसके अलावा 58 लोग मामूली रूप से घायल हुए, जिनमें विभिन्न देशों के नागरिक शामिल हैं।
अबू धाबी स्थित भारतीय दूतावास ने एक भारतीय नागरिक के घायल होने की पुष्टि करते हुए कहा कि वह खतरे से बाहर है और दूतावास अस्पताल प्रशासन के संपर्क में है। दूतावास ने कहा कि प्रभावित भारतीय नागरिक को हर संभव सहायता प्रदान की जा रही है।
क्षेत्रीय टकराव की पृष्ठभूमि
यह घटनाक्रम उस समय सामने आया है जब United Arab Emirates सहित खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा अलर्ट बढ़ा दिया गया है। इज़रायल और अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए संयुक्त हमलों के बाद तेहरान और अन्य प्रमुख शहरों में विस्फोटों की खबरें आई थीं।
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने दावा किया कि हमलों में Ayatollah Ali Khamenei मारे गए हैं। हालांकि, एक इज़रायली समाचार पत्र ने कहा कि खामेनेई के भाग्य को लेकर अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने बदले की कार्रवाई की चेतावनी देते हुए कहा है कि उसने पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैनिकों की मेजबानी करने वाले 27 ठिकानों और तेल अवीव स्थित इज़रायली प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया।
दुबई, दोहा और बहरीन तक हमलों की गूंज
हमलों की खबरें दुबई, दोहा, बहरीन और कुवैत से भी सामने आईं। ओमान के तट के पास एक तेल टैंकर के हमले की सूचना मिली, जिससे समुद्री सुरक्षा पर सवाल उठे हैं। कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को रद्द या डायवर्ट किया गया, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
यूएई रक्षा मंत्रालय ने दोहराया कि “नागरिकों, निवासियों और आगंतुकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसमें कोई समझौता नहीं किया जाएगा।”
ईरान के भीतर विरोध और समर्थन के अलग-अलग दृश्य
अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान के भीतर भी घटनाक्रम को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखी जा रही हैं। कुछ शहरों में सरकार विरोधी नारों और जश्न के दृश्य सामने आए, जबकि आधिकारिक तौर पर सर्वोच्च नेता के कार्यालय ने 40 दिनों के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की है। देशभर में झंडे आधे झुका दिए गए हैं और सुरक्षा कड़ी कर दी गई है।
उत्तराधिकार पर नजर
खामेनेई के संभावित निधन की खबरों के बीच अब ध्यान उनके उत्तराधिकारी के चयन की प्रक्रिया पर केंद्रित हो गया है। 37 वर्षों तक सत्ता में रहे खामेनेई का कार्यकाल ईरान की राजनीति का एक महत्वपूर्ण अध्याय रहा है।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि उनके निधन की पुष्टि होती है, तो यह ईरान की आंतरिक राजनीति और क्षेत्रीय समीकरणों में बड़ा बदलाव ला सकता है।
वैश्विक असर और आगे की चुनौती
इस पूरे घटनाक्रम ने वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र को झकझोर दिया है। तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर बढ़ती चिंता ने वैश्विक अर्थव्यवस्था पर संभावित असर की आशंका बढ़ा दी है।
यूएई की त्वरित और व्यापक रक्षा प्रतिक्रिया ने यह संकेत दिया है कि खाड़ी देश किसी भी प्रकार की आक्रामकता से निपटने के लिए तैयार हैं। हालांकि, क्षेत्र में बढ़ता तनाव यह सवाल भी खड़ा करता है कि क्या कूटनीति फिर से प्राथमिकता बनेगी या सैन्य टकराव और तेज होगा।
फिलहाल, यूएई ने अपनी रक्षा क्षमता का प्रदर्शन करते हुए यह स्पष्ट कर दिया है कि वह अपने नागरिकों और क्षेत्रीय स्थिरता की रक्षा के लिए हर आवश्यक कदम उठाने को तैयार है। आने वाले दिन पश्चिम एशिया के भविष्य के लिए निर्णायक साबित हो सकते हैं।

