ओआईसी की देर से जागी संवेदना? गाजा में 73 हजार मौतों की रिपोर्ट के बाद उठे सवाल
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मुस्लिम नाउ ब्यूरो, रियाद / रामल्ला।
मुस्लिम दुनिया की सबसे बड़ी संस्था Organisation of Islamic Cooperation अचानक गाजा के मुद्दे पर सक्रिय दिखाई देने लगी है। संगठन ने इजरायली हमलों में मारे गए फिलिस्तीनियों पर एक विस्तृत रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अक्टूबर 2023 से 2 मार्च 2026 तक गाजा और वेस्ट बैंक में 73 हजार से अधिक फिलिस्तीनी मारे जा चुके हैं और 1.81 लाख से ज्यादा घायल हुए हैं।
लेकिन यह रिपोर्ट ऐसे समय आई है जब मुस्लिम दुनिया के कई हिस्सों में ओआईसी की तीखी आलोचना हो रही है। वजह साफ है। अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान पर सैन्य कार्रवाई और ईरान के सुप्रीम लीडर Ali Khamenei की हत्या के बाद ओआईसी ने उस कार्रवाई की खुलकर निंदा नहीं की। इसके उलट संगठन का रुख कई बार ऐसा लगा जैसे वह खाड़ी देशों पर हुए ईरानी हमलों की आलोचना में ज्यादा व्यस्त है।
इसी कारण अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या गाजा पर यह नई रिपोर्ट वास्तव में फिलिस्तीनियों के लिए है या फिर अपनी छवि सुधारने की कोशिश।
गाजा में मौतों का भयावह आंकड़ा
ओआईसी के मीडिया ऑब्जर्वेटरी ने 24 फरवरी से 2 मार्च 2026 के बीच की घटनाओं का विस्तृत ब्यौरा दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक इस अवधि में गाजा के उत्तर, दक्षिण और मध्य इलाकों पर लगातार बमबारी हुई।
अल बुरैज शरणार्थी शिविर
शुजाइया इलाका
रफह शहर
अल तुफाह इलाका
खान यूनिस
बैत लाहिया
इन सभी क्षेत्रों में इजरायली हमले हुए। सिर्फ एक सप्ताह में 23 लोगों की मौत और 67 लोग घायल हुए। नागरिक सुरक्षा कर्मियों ने मलबे से छह और शव निकाले।
रिपोर्ट बताती है कि 7 अक्टूबर 2023 से अब तक गाजा में 73,012 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। घायल लोगों की संख्या 1,81,324 तक पहुंच गई है।
ओआईसी ने अपनी रिपोर्ट में इजरायल को युद्ध अपराधों का जिम्मेदार बताया है।
बारिश और तबाही के बीच गाजा
रिपोर्ट का एक और दर्दनाक पहलू सामने आता है। गाजा में लगातार बारिश की पांचवीं लहर आई। विस्थापित लोगों के तंबू पानी में डूब गए। हजारों परिवार पहले से ही बेघर हैं। उनके पास सुरक्षित आश्रय नहीं है।
सीमा पार करने वाले सभी प्रमुख रास्ते बंद हैं। भोजन और दवाइयों की भारी कमी है। भूख और बीमारी का खतरा तेजी से बढ़ रहा है।
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख Volker Turk ने चेतावनी दी है कि वेस्ट बैंक और गाजा में इजरायली सैन्य कार्रवाई स्थायी जनसंख्या परिवर्तन का कारण बन सकती है। उनका संकेत जबरन विस्थापन की तरफ था।
अल अक्सा मस्जिद पर रोज़ाना घुसपैठ
वेस्ट बैंक और पूर्वी यरुशलम में हालात लगातार तनावपूर्ण हैं। रिपोर्ट के अनुसार Al-Aqsa Mosque परिसर में कट्टरपंथी बसने वालों की रोज़ाना घुसपैठ हो रही है।
इजरायली सुरक्षा बलों ने अल अक्सा की ओर जाने वाले रास्तों पर चौकियां लगा दी हैं। शुक्रवार, शाम और तरावीह की नमाज के समय बड़ी संख्या में लोगों को प्रवेश से रोका गया।
हेब्रोन में Ibrahimi Mosque को तीन दिनों के लिए पूरी तरह बंद कर दिया गया। नमाजियों और वक्फ कर्मचारियों को भी अंदर जाने की अनुमति नहीं दी गई।
अल अक्सा परिसर में तीन फिलिस्तीनियों को गिरफ्तार किया गया। सात लोगों को छह महीने के लिए मस्जिद में प्रवेश से प्रतिबंधित किया गया। एक व्यक्ति को दो सप्ताह तक पुराने शहर में जाने से रोका गया। दो पत्रकारों को भी हिरासत में लिया गया।
वेस्ट बैंक में छापे और गिरफ्तारियां
रिपोर्ट के मुताबिक वेस्ट बैंक के शहरों और गांवों में इजरायली सेना ने 346 छापे मारे। इन कार्रवाइयों में 254 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इनमें 13 बच्चे भी शामिल हैं।
नाब्लुस के पास अल लुब्बन अश शरकिया गांव में तीन दिनों तक सभी स्कूल और किंडरगार्टन बंद कर दिए गए। कारण था लगातार छापे और घरों की तलाशी।
घर तोड़े गए और जमीनें कब्जाई गईं
ओआईसी के दस्तावेज के अनुसार इजरायली बलों ने तीन घर गिराए। एक दुकान, एक कैफे और एक इमारत को भी ध्वस्त किया गया। एक मुर्गी फार्म को भी नष्ट किया गया।
कई इलाकों में कृषि भूमि बुलडोजर से समतल कर दी गई। तीन घरों को कब्जे में लेकर उन्हें सैन्य चौकी बना दिया गया।
हेब्रोन के पुराने शहर में दुकानों की बिजली काट दी गई। सलफीत क्षेत्र में कई सुविधाएं नष्ट की गईं।
The #OIC Media Observatory on Israeli Crimes Against Palestinians Issues its 118th Report as the Number of Palestinian Martyrs Exceeds 73,012. Read more: https://t.co/PA2dUQpbby #OICObservatory #Palestine #Israel pic.twitter.com/JhIOyWIPGK
— OIC (@OIC_OCI) March 3, 2026
बसने वालों के हमले
सिर्फ एक सप्ताह में बसने वालों की 84 घटनाएं दर्ज की गईं।
25 बार पशुओं को फिलिस्तीनी खेतों में छोड़ दिया गया।
तीन कारें तोड़ी गईं।
मोबाइल फोन और घरों की खिड़कियां तोड़ी गईं।
सोलर पैनल तोड़े गए।
तलफीत गांव को पानी देने वाली पाइपलाइन काट दी गई। एक घर और एक गोदाम जला दिया गया। दो कारों को आग लगा दी गई।
कई जगह चोरी की घटनाएं हुईं। हेब्रोन और नाब्लुस में दर्जनों पशु मारे गए। एक घोड़ा और एक घोड़ी भी चोरी कर ली गई।
नाब्लुस और सलफीत में 90 जैतून के पेड़ों की शाखाएं काट दी गईं।
नई बस्तियों की तैयारी
बसने वालों ने चार नई गतिविधियां शुरू कीं। जेरिको के पास फसायिल गांव में तंबू लगाए गए और मवेशी लाए गए। पानी की लाइन बिछाई गई।
कुसरा इलाके में जमीन समतल की गई। नाब्लुस के जलूद गांव में सड़क और कंक्रीट की दीवार बनाई गई।
जॉर्डन घाटी के उत्तर में जमीन घेरने के लिए लोहे के निशान लगाए गए। यह संकेत है कि जल्द ही वहां कांटेदार तार लगाए जा सकते हैं।
बेदुइन समुदाय पर दबाव
रिपोर्ट में बेदुइन समुदायों पर हमलों का भी जिक्र है। फरवरी से 2 मार्च तक वेस्ट बैंक में 32 सीधे हमले दर्ज किए गए।
37 मामलों में आगजनी, चोरी और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं सामने आईं।
39 परिवारों को अपने घर छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा। कई अन्य परिवारों को भी विस्थापन की धमकी मिली।
चरवाहों पर 14 हमले दर्ज हुए। कई जगह पशुओं को गांवों के खेतों में छोड़ दिया गया।
एक सप्ताह में 1038 अपराध
ओआईसी के ऑब्जर्वेटरी के अनुसार सिर्फ एक सप्ताह में 1038 घटनाएं दर्ज हुईं। इनमें बमबारी, गिरफ्तारियां, छापे, संपत्ति विनाश और बसने वालों के हमले शामिल हैं।
ये घटनाएं गाजा, वेस्ट बैंक और यरुशलम के लगभग हर इलाके को प्रभावित करती हैं।
आलोचना क्यों बढ़ रही है
गाजा की यह रिपोर्ट गंभीर है। आंकड़े भयावह हैं। लेकिन आलोचकों का कहना है कि सवाल समय का है।
जब गाजा में लगातार बमबारी हो रही थी तब ओआईसी की आवाज कमजोर थी। जब ईरान इजरायल के खिलाफ खुलकर बोल रहा था तब कई मुस्लिम देश चुप थे।
अब जब ईरान और अमेरिका के बीच टकराव बढ़ गया है और खाड़ी देशों पर मिसाइल हमले हुए हैं तब अचानक गाजा की पीड़ा पर विस्तृत रिपोर्ट सामने आना लोगों को असहज कर रहा है।
क्या यह देर से आई संवेदना है
मुस्लिम दुनिया में कई विश्लेषक मानते हैं कि ओआईसी की विश्वसनीयता दांव पर है। संस्था का गठन ही फिलिस्तीन के सवाल पर हुआ था। अगर वही मुद्दा पीछे छूट जाए तो संगठन की नैतिक शक्ति कमजोर पड़ती है।
गाजा की यह रिपोर्ट उस दर्दनाक सच्चाई को सामने लाती है जिसे दुनिया लंबे समय से देख रही है। मगर यह भी उतना ही सच है कि फिलिस्तीनियों को सिर्फ रिपोर्ट नहीं चाहिए। उन्हें ठोस राजनीतिक और कूटनीतिक समर्थन चाहिए।
अब देखना यह है कि ओआईसी इस रिपोर्ट के बाद क्या कदम उठाता है। क्या यह सिर्फ दस्तावेज बनकर रह जाएगा या फिर मुस्लिम दुनिया की सामूहिक कार्रवाई की शुरुआत बनेगा। फिलिस्तीन के लोग शायद इसी जवाब का इंतजार कर रहे हैं।

