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ईरान-इजरायल महायुद्ध का छठा दिन: तेहरान पर बमों की बारिश और इजरायल का ‘अंडरग्राउंड’ मिशन; क्या खाड़ी देश बन रहे हैं बलि का बकरा?

मुस्लिम नाउ ब्यूरो, वॉशिंगटन/तेहरान | 6 मार्च, 2026

ईरान और इजरायल के बीच छिड़ा महायुद्ध अब अपने सबसे विनाशकारी मोड़ पर पहुँच गया है। युद्ध के छठे दिन गुरुवार को ईरान ने इजरायल पर आठ चरणों में बैलिस्टिक मिसाइलों की बौछार कर दी। इस हमले ने इजरायल के लाखों नागरिकों को बंकरों में छिपने पर मजबूर कर दिया। दूसरी ओर इजरायली वायुसेना (IAF) ने तेहरान और ईरान के सैन्य ठिकानों पर अब तक का सबसे बड़ा हवाई हमला बोला है।

हालात यह हैं कि इजरायल की गलत नीतियों की वजह से वहां की पूरी कौम पिछले एक हफ्ते से बंकरों में रहने को मजबूर है। इजरायल में रह रहे भारतीय प्रवासियों द्वारा सोशल मीडिया पर साझा किए जा रहे वीडियो बेहद डरावने हैं। इजरायली सरकार ने भले ही मीडिया पर भारी सेंसर लगा रखा है, लेकिन छन-छनकर आ रही तस्वीरें बताती हैं कि हकीकत सरकारी दावों से कहीं अधिक भयंकर है।

ईरान का मिसाइल हमला: दावों और हकीकत की जंग

ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने दावा किया है कि उन्होंने एक-एक टन विस्फोटक ले जाने वाली मिसाइलों से तेल अवीव के ‘दिल’ और बेन गुरियन एयरपोर्ट को निशाना बनाया है। हालांकि इजरायल ने इन दावों को खारिज किया है। इजरायल का कहना है कि अधिकांश मिसाइलें खुले इलाकों में गिरीं या उन्हें हवा में ही नष्ट कर दिया गया।

युद्ध की शुरुआत से अब तक ईरान ने 500 से ज्यादा बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलें दागी हैं। इसके अलावा 2,000 से ज्यादा ड्रोन्स का इस्तेमाल किया जा चुका है। ईरानी न्यूज एजेंसी ‘फार्स’ के मुताबिक इन हमलों का 40 फीसदी हिस्सा इजरायल पर था, जबकि 60 फीसदी हमला क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर किया गया।

जंग का दूसरा चरण: ‘बंकर बस्टर’ और अंडरग्राउंड साइट्स

युद्ध अब एक नए और खतरनाक दौर में प्रवेश कर गया है। खुफिया सूत्रों के हवाले से खबर है कि इजरायल और अमेरिका अब ईरान की उन मिसाइल साइट्स को निशाना बनाने की तैयारी कर रहे हैं जो जमीन के काफी अंदर दफन हैं।

इस काम के लिए अमेरिका के भारी बमवर्षक विमानों (Heavy Bombers) का इस्तेमाल किया जा सकता है। ये विमान ऐसे ‘बंकर-बस्टर’ बम ले जाने में सक्षम हैं जो पहाड़ों और कंक्रीट की गहरी परतों को चीरकर अंदर तबाही मचा सकते हैं। सेटेलाइट तस्वीरों से पता चला है कि खोर्रमबाद और गर्मदरेह के मिसाइल परिसरों और टनल के रास्तों को पहले ही भारी नुकसान पहुँचाया जा चुका है।

तेहरान पर इजरायल का प्रचंड प्रहार

इजरायली वायुसेना ने गुरुवार को पश्चिमी और मध्य ईरान में भारी बमबारी की। करीब 90 लड़ाकू विमानों ने तेहरान के आसमान में उड़ान भरी और लगभग 40 ठिकानों पर 200 से ज्यादा बम बरसाए।

इन हमलों में मुख्य रूप से निम्नलिखित को निशाना बनाया गया:

  • स्पेशल फोर्सेस का मुख्यालय: अल्बोर्ज़ प्रांत में स्थित शासन की विशिष्ट इकाइयों के हेडक्वार्टर को तबाह कर दिया गया।
  • बासिज और आंतरिक सुरक्षा बल: तेहरान के भीतर बासिज अर्धसैनिक बल के ठिकानों और आंतरिक सुरक्षा बलों के मुख्यालयों पर बमबारी की गई।
  • हथियार भंडार: दर्जनों कमांड सेंटर और हथियारों के गोदामों को मलबे में तब्दील कर दिया गया।

तेहरान के गवर्नर मोहम्मद-सादिक मोतमेदियन ने नागरिकों से अपील की है कि वे बाजारों में भगदड़ न मचाएं और जरूरी सामान का स्टॉक न करें। तेहरान के मेट्रो स्टेशनों को अब बंकरों में बदला जा रहा है। सड़कों पर सन्नाटा है और लोग दहशत में हैं।

खाड़ी देशों में ‘कोहराम’: प्रवासी मज़दूरों की मौत

इस युद्ध की सबसे दुखद बात यह है कि इसकी आग अब उन खाड़ी देशों तक फैल गई है जिनका इस सीधे टकराव से लेना-देना नहीं था। ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कतर, सऊदी अरब और बहरीन में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर हमले तेज कर दिए हैं।

यूएई के मुताबिक ईरान ने गुरुवार को उस पर सात बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। अब तक यूएई पर कुल 196 मिसाइलें और 131 ड्रोन दागे जा चुके हैं। इन हमलों में तीन प्रवासी मज़दूरों की मौत हो गई है। मरने वालों में एक पाकिस्तानी, एक नेपाली और एक बांग्लादेशी नागरिक शामिल है। 94 लोग घायल हुए हैं। अबू धाबी में गिरते मलबे से 6 लोग घायल हुए हैं।

कतर की राजधानी दोहा में भी भारी धमाके सुने गए और आसमान में काला धुआं देखा गया। सऊदी अरब ने ईरान पर आरोप लगाया है कि उसने रियाद में अमेरिकी राजनयिक परिसर पर ड्रोन से हमला किया। वहीं बहरीन की एक तेल रिफाइनरी को भी निशाना बनाया गया है।

वैश्विक शक्तियों की बढ़ती सक्रियता

युद्ध को फैलता देख यूरोपीय देश और ब्रिटेन भी हरकत में आ गए हैं। ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने घोषणा की है कि ब्रिटेन अपने चार और टाइफून लड़ाकू विमान कतर भेज रहा है। कई यूरोपीय देशों ने अपनी नौसेना को हिंद महासागर और खाड़ी क्षेत्र में तैनात कर दिया है।

इजरायली वायुसेना को हवा में ईंधन भरने (Aerial Refueling) के लिए अमेरिका से भारी मदद मिल रही है। अब तक 550 से ज्यादा बार विमानों में हवा में ही ईंधन भरा जा चुका है, जिससे इजरायली जेट्स 1,500 किलोमीटर दूर ईरान तक जाकर हमला कर पा रहे हैं।

बढ़ता मानवीय संकट और ट्रंप की नीति पर सवाल

ईरान के ‘शहीद फाउंडेशन’ के अनुसार हमलों में मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,230 हो गई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने बताया कि ईरान में स्वास्थ्य ढांचे पर 13 हमले हुए हैं, जिसमें चार स्वास्थ्य कर्मियों की मौत हो गई है। दुबई में मौजूद आपातकालीन रसद केंद्र (Logistics Hub) को बंद करना पड़ा है।

यहाँ राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। ट्रंप ने दावा किया था कि ईरान की सैन्य शक्ति खत्म हो गई है, लेकिन हकीकत में ईरान अब भी इजरायल और खाड़ी देशों को दहला रहा है। क्या ट्रंप के पास इस तबाही को रोकने का कोई रास्ता है? या फिर वे केवल ‘बंकर बस्टर’ बमों के भरोसे इस पूरे क्षेत्र को श्मशान बनाना चाहते हैं? बिना किसी ठोस शांति योजना के इस युद्ध को खींचना पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा के लिए आत्मघाती साबित हो रहा है।

सऊदी अरब में मौजूद ईरानी राजदूत अलीरेजा इनायती ने साफ कहा है कि अगर तेहरान हमला करेगा तो उसकी जिम्मेदारी भी लेगा। इसका मतलब है कि ईरान पीछे हटने को तैयार नहीं है।

निष्कर्ष: क्या होगा अगला कदम?

युद्ध के छह दिन बीत जाने के बाद भी शांति की कोई किरण नज़र नहीं आ रही है। इजरायल अब अंडरग्राउंड ठिकानों को मिटाने की जिद पर है, तो ईरान खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी हितों को चोट पहुँचा रहा है। इस बीच सबसे ज्यादा नुकसान उन आम लोगों और प्रवासी मज़दूरों का हो रहा है जो रोटी-रोटी की तलाश में वहां बसे थे।

भारत जैसे देशों के लिए यह चिंता का विषय है क्योंकि उसके लाखों नागरिक इस समय युद्ध के मुहाने पर खड़े हैं। क्या विश्व समुदाय इस पागलपन को रोक पाएगा?