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खाड़ी पर मंडराते युद्ध के बादल: सऊदी और यूएई के रक्षा मंत्रियों की इमरजेंसी कॉल; क्या है ईरान की ‘थैंक यू’ कूटनीति ?

मुस्लिम नाउ ब्यूरो, रियाद/दुबई

मध्य पूर्व में जारी महायुद्ध अब एक ऐसे नाजुक मोड़ पर पहुँच गया है जहाँ कूटनीति और बारूद एक साथ चल रहे हैं। एक तरफ जहां मिसाइलें बरस रही हैं, वहीं दूसरी तरफ बंद कमरों में फोन कॉल और बयानों का दौर भी तेज हो गया है। गुरुवार को सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के रक्षा मंत्रियों के बीच हुई एक उच्च स्तरीय बातचीत ने क्षेत्र की सुरक्षा चिंताओं को फिर से दुनिया के सामने रख दिया है।

सऊदी अरब के रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान ने अपने अमीराती समकक्ष शेख हमदान बिन मोहम्मद अल-मकतूम से फोन पर लंबी चर्चा की। इस बातचीत का मुख्य केंद्र वह ईरानी आक्रामकता थी जो पिछले कुछ दिनों से खाड़ी देशों की शांति को भंग कर रही है।

सऊदी और यूएई की एकजुटता: ‘हम चुप नहीं बैठेंगे’

प्रिंस खालिद बिन सलमान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर इस बातचीत की जानकारी साझा की। दोनों मंत्रियों ने सऊदी अरब, यूएई और अन्य देशों के खिलाफ ईरान के हालिया हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की। इन हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानूनों का खुला उल्लंघन बताया गया। दुबई मीडिया ऑफिस के मुताबिक इन हमलों ने देशों की संप्रभुता और सुरक्षा को सीधे तौर पर चुनौती दी है।

दोनों मंत्रियों ने इस बात पर जोर दिया कि इस तरह की हरकतों के क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर बेहद गंभीर परिणाम होंगे। सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि सऊदी अरब और यूएई ने इस संकट की घड़ी में एक-दूसरे के प्रति पूर्ण एकजुटता दिखाई है। उन्होंने साफ कर दिया कि अपनी रक्षा के लिए और अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए वे कोई भी ज़रूरी कदम उठाने का हक रखते हैं। यह एक तरह की सीधी चेतावनी थी कि अगर हमले नहीं रुके, तो खाड़ी देश भी अपनी सैन्य ताकत का इस्तेमाल कर सकते हैं।

ईरानी राजदूत का हैरान करने वाला ‘थैंक यू’

एक तरफ जहां रक्षा मंत्री कड़े लहजे में बात कर रहे थे, वहीं रियाद में मौजूद ईरान के राजदूत अलीरेजा इनायती ने एक अलग ही कूटनीतिक दांव खेला। उन्होंने सऊदी अरब द्वारा अपनी जमीन, हवा और पानी का इस्तेमाल अमेरिका या इजरायल को न करने देने के वादे की तारीफ की।

इनायती ने एएफपी (AFP) को दिए इंटरव्यू में कहा कि ईरान इस बात की सराहना करता है कि सऊदी अरब अपनी संप्रभुता पर कायम है। उन्होंने बार-बार इस बात को दोहराया कि सऊदी अरब ने यह सुनिश्चित किया है कि उसके क्षेत्र का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ हमलों के लिए नहीं होगा। युद्ध शुरू होने से पहले ही रियाद ने तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयासों का समर्थन किया था। अब ईरान इस तटस्थता को अपनी जीत के रूप में देख रहा है।

हमलों से इनकार: ‘जो हम करते हैं, उसकी जिम्मेदारी लेते हैं’

राजदूत इनायती ने उन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया जिनमें कहा गया था कि ईरान ने रियाद में अमेरिकी दूतावास पर हमला किया है। सऊदी अधिकारियों ने दावा किया था कि दूतावास परिसर में जो आग लगी और नुकसान हुआ, उसके पीछे ईरानी ड्रोन्स थे। लेकिन इनायती ने इसे झूठ करार दिया।

उन्होंने कहा कि अगर तेहरान का ऑपरेशंस कमांड कहीं हमला करता है, तो वह गर्व से उसकी जिम्मेदारी लेता है। उन्होंने यह भी कहा कि रस तनुरा रिफाइनरी, जो मध्य पूर्व की सबसे बड़ी रिफाइनरियों में से एक है, उस पर हुए हमले में भी ईरान का कोई हाथ नहीं है। उनके मुताबिक ये हमले ईरान की छवि खराब करने की साजिश हो सकते हैं।

क्या यह जंग थोपी गई है?

जब इनायती से पूछा गया कि क्या ईरान अपनी रक्षा के नाम पर पूरे क्षेत्र को युद्ध में झोंक रहा है, तो उन्होंने इसे ‘थोपा हुआ युद्ध’ बताया। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्रीय युद्ध नहीं है और न ही यह ईरान का युद्ध है। उनके मुताबिक यह तनाव क्षेत्र पर बाहर से थोपा गया है। लेकिन हकीकत यह है कि शनिवार से शुरू हुए ईरानी हमलों के बाद खाड़ी क्षेत्र में कम से कम 13 लोग मारे जा चुके हैं, जिनमें सात आम नागरिक शामिल हैं।

युद्ध के मैदान की ताजा तस्वीर

मध्य पूर्व में छिड़ी यह जंग अब धीरे-धीरे स्थिर माने जाने वाले खाड़ी देशों को अपनी चपेट में ले रही है। ईरान अपने सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामनेई की हत्या का बदला लेने के लिए इजरायल और क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर लगातार हमले कर रहा है।

सऊदी अरब ने बार-बार ईरान पर बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन दागने का आरोप लगाया है। रियाद ने चेतावनी दी है कि वह जवाबी कार्रवाई करने के लिए पूरी तरह तैयार है। यह स्थिति उस समय और भी जटिल हो जाती है जब ईरान एक तरफ शुक्रिया अदा करता है और दूसरी तरफ उस पर उसी देश के ठिकानों को निशाना बनाने के आरोप लगते हैं।

मुख्य निष्कर्ष और भविष्य की चुनौतियां

  • सऊदी-यूएई गठबंधन: दोनों देशों ने साफ कर दिया है कि वे अपनी रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाएंगे। यह अमेरिका और ईरान दोनों के लिए एक बड़ा संकेत है।
  • ईरान की कूटनीति: ईरान चाहता है कि कम से कम सऊदी अरब इस युद्ध में अमेरिका का साथ न दे। इसीलिए वह ‘Neutrality’ के लिए सऊदी की तारीफ कर रहा है।
  • नागरिकों का डर: 13 लोगों की मौत ने खाड़ी देशों में रह रहे लोगों के बीच खौफ भर दिया है। इसमें भारतीय प्रवासी भी बड़ी संख्या में शामिल हैं।
  • सच्चाई और दावों के बीच जंग: दूतावास और रिफाइनरी पर हमले किसने किए, यह अभी भी एक बड़ा सवाल बना हुआ है। ईरान का इनकार और सऊदी के आरोप क्षेत्र में एक नया तनाव पैदा कर रहे हैं।

अंत में, यह साफ है कि खाड़ी देश बारूद के ढेर पर बैठे हैं। सऊदी और यूएई की सुरक्षा अब केवल उनकी अपनी संप्रभुता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरी दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा और स्थिरता से जुड़ी है। अगर यह ‘कोल्ड वॉर’ एक ‘फुल-स्केल वॉर’ में बदलता है, तो इसकी कीमत पूरी दुनिया को चुकानी पड़ेगी।