Badrul Kubra Peace Prayer : ग्रैंड मुफ्ती शेख अबूबकर अहमद की अगुवाई में हजारों मुसलमानों ने दुनिया में अमन के लिए की दुआ
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मुस्लिम नाउ ब्यूरो, कालीकट
दुनिया के अलग अलग हिस्सों में चल रहे युद्ध और हिंसा के बीच केरल के कालीकट से अमन और इंसानियत का संदेश दिया गया। मार्कज नॉलेज सिटी में स्थित भव्य जामिउल फुतूह मस्जिद में हजारों लोगों ने एक साथ बैठकर दुनिया में शांति के लिए दुआ की।
इस विशेष शांति प्रार्थना सभा का आयोजन बद्रुल कुबरा पीस प्रेयर कांग्रेगेशन के रूप में किया गया। कार्यक्रम की अगुवाई भारत के ग्रैंड मुफ्ती शेख अबूबकर अहमद ने की।
सुबह से ही मस्जिद परिसर में लोगों का आना शुरू हो गया था। केरल के अलग अलग जिलों के अलावा दूसरे राज्यों से भी लोग पहुंचे। सभी के दिलों में एक ही भावना थी। दुनिया में शांति कायम हो। युद्ध और हिंसा से परेशान लोगों को राहत मिले।

कुरआन की तिलावत से हुई शुरुआत
कार्यक्रम की शुरुआत सुबह नौ बजे महलरातुल कुरआन सत्र से हुई। इस दौरान सैकड़ों बार कुरआन शरीफ की तिलावत की गई। इन तिलावतों को खास तौर पर दुनिया में युद्ध से पीड़ित लोगों के लिए समर्पित किया गया।
इसके बाद विशेष दुआ का आयोजन हुआ। इस दुआ की अगुवाई एलंकुर के सैय्यद हैद्रूस मुतुकोया थंगल ने की। हजारों लोग हाथ उठाकर अमन और इंसाफ की दुआ करते नजर आए।
मस्जिद के विशाल प्रांगण में मौजूद लोगों के चेहरों पर गंभीरता और उम्मीद दोनों दिखाई दे रही थी।
ग्रैंड मुफ्ती का शांति संदेश
सभा को संबोधित करते हुए ग्रैंड मुफ्ती शेख अबूबकर अहमद ने इंसानियत और एकता का संदेश दिया।
उन्होंने कहा कि दुनिया को आज सबसे ज्यादा जरूरत शांति और करुणा की है। धर्म का असली संदेश भी यही है कि इंसान इंसान के काम आए।
उन्होंने लोगों से अपील की कि वे नफरत से दूर रहें और समाज में भाईचारे को मजबूत करें। उन्होंने कहा कि दुआ और नेक काम से ही समाज में सकारात्मक बदलाव आता है।
कई धार्मिक और सामाजिक नेताओं की मौजूदगी
कार्यक्रम का उद्घाटन समस्ता केरल जमीयतुल उलेमा के अध्यक्ष ई. सुलेमान मुसलियार ने किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता मार्कज साकाफती सुन्निया के महानिदेशक सी. मोहम्मद फैजी ने की।
इस मौके पर कई धार्मिक विद्वान और समुदाय के प्रमुख लोग मौजूद रहे। उन्होंने भी सभा को संबोधित किया और शांति की जरूरत पर जोर दिया।
आध्यात्मिक सत्रों का आयोजन
प्रार्थना सभा के दौरान कई आध्यात्मिक सत्र भी आयोजित किए गए। इनमें महलरातुल बद्रिया वार्षिक सभा शामिल थी।
इसके अलावा ताजीलुल फुतूह मजलिस का आयोजन हुआ। कसीदतुल हम्जिया की तिलावत भी की गई। बद्र मौलिद और अस्माउल बद्र जैसे कार्यक्रमों ने माहौल को आध्यात्मिक बना दिया।
मश्कुल कुरआन का सत्र भी आयोजित हुआ। साथ ही इस्लामी इतिहास के महत्वपूर्ण अध्याय जंग ए बद्र पर एक विशेष व्याख्यान भी रखा गया।
इस व्याख्यान में बताया गया कि किस तरह जंग ए बद्र इस्लामी इतिहास में सब्र और विश्वास की मिसाल मानी जाती है।

विद्वानों ने भी रखा अपना दृष्टिकोण
सभा में कई प्रसिद्ध इस्लामी विद्वानों ने हिस्सा लिया। इनमें सैय्यद शरफुद्दीन जमालुल्लैली, सैय्यद शिहाबुद्दीन अहदल और सैय्यद शिहाबुद्दीन बुखारी शामिल थे।
इसके अलावा सैय्यद मुल्लाकोया थंगल, सैय्यद शफी बा अलवी, डॉ. मोहम्मद अब्दुल हकीम अजहरी, रहमतुल्लाह सकाफी और जलील सकाफी ने भी अपने विचार रखे।
इन सभी वक्ताओं ने दुनिया में शांति और इंसाफ की जरूरत पर जोर दिया।
जनप्रतिनिधियों की भी मौजूदगी
कार्यक्रम में कई जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहे। इनमें विधायक लिंटो जोसेफ, डीसीसी अध्यक्ष के. प्रवीण कुमार और गुरुवायूर के विधायक एन. के. अकबर शामिल थे।
इन नेताओं ने भी सभा में मौजूद लोगों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि समाज में शांति और सौहार्द बनाए रखना हर नागरिक की जिम्मेदारी है।
सामूहिक दुआ के साथ समापन
कार्यक्रम का समापन सामूहिक दुआ के साथ हुआ। अंतिम दुआ बयार के सैय्यद अब्दुर्रहमान बुखारी ने कराई।
हजारों लोग एक साथ हाथ उठाकर दुनिया में शांति, इंसाफ और इंसानियत की दुआ कर रहे थे। यह दृश्य बेहद भावुक और प्रभावशाली था।
कालीकट की जामिउल फुतूह मस्जिद में हुआ यह आयोजन सिर्फ एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं था। यह दुनिया को दिया गया एक संदेश था।
संदेश यह कि नफरत और हिंसा के दौर में भी इंसानियत और शांति की आवाज कमजोर नहीं हुई है।

