International Women’s Day 2026: महिला सुरक्षा, वैश्विक युद्ध और आर्थिक संकट पर जमाअत-ए-इस्लामी हिंद ने सरकार को दिखाया आईना
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मुस्लिम नाउ ब्यूरो, नई दिल्ली
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के मद्देनजर जमाअत-ए-इस्लामी हिंद (JIH) के अध्यक्ष सैयद सआदतुल्लाह हुसैनी ने एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि 8 मार्च का दिन महिलाओं की उपलब्धियों का जश्न मनाने का है। लेकिन हमारे देश में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध एक कड़वी सच्चाई हैं। ये आंकड़े हमें याद दिलाते हैं कि सम्मान और सुरक्षा की लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है।
NCRB के आंकड़े: घर और बाहर असुरक्षित महिलाएं
हुसैनी ने नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के डरावने आंकड़ों का हवाला दिया। साल 2022 में भारत में महिलाओं के खिलाफ अपराध के 4.45 लाख से ज्यादा मामले दर्ज किए गए। इनमें बलात्कार, यौन उत्पीड़न, घरेलू हिंसा और तस्करी जैसे संगीन जुर्म शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि उस वर्ष 31,000 से ज्यादा रेप केस दर्ज हुए। इसका मतलब है कि देश में हर दिन लगभग 85 महिलाओं के साथ बलात्कार हुआ। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि कुल अपराधों में से एक-तिहाई मामले घरेलू हिंसा के थे। यह साबित करता है कि महिलाएं अपने घरों के भीतर भी सुरक्षित नहीं हैं।
इसके अलावा भारत में हर साल लाखों महिलाएं और लड़कियां लापता हो जाती हैं। इनमें से एक बड़ी संख्या का कभी पता नहीं चल पाता। इन लड़कियों को अक्सर मानव तस्करी, जबरन मजदूरी और यौन शोषण के नरक में धकेल दिया जाता है।
नैतिक संकट और कड़े कानूनों की जरूरत
अध्यक्ष ने समाज में व्याप्त नैतिक संकट पर भी बात की। उन्होंने एपस्टीन तस्करी नेटवर्क जैसे मामलों का जिक्र किया। इसमें ताकतवर लोगों ने व्यवस्थित तरीके से नाबालिग लड़कियों का शोषण किया। जमाअत-ए-इस्लामी हिंद का मानना है कि केवल सख्त कानून काफी नहीं हैं। इसके लिए समाज में सम्मान, विनम्रता और जवाबदेही पर आधारित एक मजबूत नैतिक ढांचा तैयार करना होगा।

ईरान-इजराइल संघर्ष: मासूमों की जान और कूटनीतिक विफलता
पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) के हालात पर जमाअत ने गहरी चिंता जताई। सैयद सआदतुल्लाह हुसैनी ने ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजराइल के सैन्य हमलों की निंदा की। उन्होंने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून और राष्ट्रीय संप्रभुता का उल्लंघन बताया।
उन्होंने दक्षिणी ईरान के मिनाब में शाजारेह तैयबेह गर्ल्स स्कूल पर हुए हमले का विशेष जिक्र किया। इस हवाई हमले में लगभग 160 से 170 स्कूली बच्चे मारे गए। इस घटना ने पूरी दुनिया की अंतरात्मा को झकझोर दिया है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस टकराव को बड़े क्षेत्रीय युद्ध में नहीं बदलने देना चाहिए। अगर ऐसा हुआ तो मुस्लिम दुनिया में मतभेद और गहरे हो जाएंगे। उन्होंने बातचीत और कूटनीति के जरिए स्थायी शांति की अपील की।

बजट 2026-27 और गहराता आर्थिक संकट
आर्थिक मोर्चे पर हुसैनी ने केंद्र सरकार के यूनियन बजट पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बजट में सप्लाई पक्ष पर तो ध्यान दिया गया, लेकिन आम आदमी की आय और रोजगार सृजन को नजरअंदाज कर दिया गया। आज आम घरों के लोग रुकी हुई कमाई और बढ़ती महंगाई से परेशान हैं।
पश्चिम एशिया के युद्ध ने भारत की आर्थिक कमजोरियों को भी सामने ला दिया है। भारत अपनी जरूरत का 80% से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है। तेल की कीमतें बढ़ने से सीधे तौर पर भारत का आयात बिल बढ़ेगा और महंगाई चरम पर पहुंच जाएगी। इससे छोटे व्यवसायों और घरेलू बजट पर भारी दबाव पड़ेगा।
गिग इकोनॉमी और युवाओं का शोषण
अध्यक्ष ने श्रम बाजार की स्थिति को बेहद परेशान करने वाला बताया। भारत का एक बड़ा कार्यबल अब ‘गिग इकोनॉमी’ (प्लेटफॉर्म आधारित काम) में लगा है। लाखों युवा बिना किसी नौकरी की सुरक्षा या हेल्थ इंश्योरेंस के काम कर रहे हैं। अध्ययनों के अनुसार एक बड़ा हिस्सा महीने में 15,000 रुपये से भी कम कमाता है। इनके पास न तो पेंशन की सुविधा है और न ही कोई कानूनी सुरक्षा।
अंत में उन्होंने सरकार से मांग की कि वे सामाजिक सुरक्षा और न्याय के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को मजबूत करें।

