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जामिया मिल्लिया इस्लामिया की बड़ी उपलब्धि: ‘असुर जनजाति’ के उत्थान के लिए मिला प्रतिष्ठित नेशनल ICSSR रिसर्च प्रोजेक्ट

नई दिल्ली | 10 मार्च, 2026

शिक्षा और शोध के क्षेत्र में जामिया मिल्लिया इस्लामिया ने एक और स्वर्णिम अध्याय जोड़ दिया है। विश्वविद्यालय के प्रबंधन अध्ययन विभाग (Department of Management Studies) को भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICSSR) द्वारा एक महत्वपूर्ण नेशनल रिसर्च प्रोजेक्ट सौंपा गया है। यह प्रोजेक्ट विशेष रूप से झारखंड की विलुप्तप्राय ‘असुर’ जनजाति के सतत विकास और सशक्तिकरण पर केंद्रित है।

कठिन प्रतिस्पर्धा के बाद मिली सफलता

ICSSR ने भारत के ‘विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों’ (PVTGs) पर बहु-विषयक अध्ययन के लिए अपनी दूसरी कॉल (2025–26) के तहत इस प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है। एक अत्यंत कठिन और प्रतिस्पर्धी राष्ट्रीय मूल्यांकन प्रक्रिया से गुजरने के बाद जामिया के इस प्रस्ताव का चयन किया गया है, जो विभाग की उच्च अकादमिक गुणवत्ता को दर्शाता है।

प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य और विशेषज्ञ टीम

₹16 लाख के बजट वाले इस प्रोजेक्ट का शीर्षक “सस्टेनेबल ट्राइबल डेवलपमेंट के लिए स्वदेशी ज्ञान, वन अधिकार और डिजिटल नवाचार का एकीकरण: झारखंड के असुर समुदाय का एक अध्ययन” है।

इस शोध दल का नेतृत्व प्रबंधन अध्ययन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. तौफीक अहमद सिद्दीकी कर रहे हैं। टीम में विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. मो. ओबैदुल ओला और समाज कार्य विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर रवींद्र रमेश पाटिल प्रमुख अन्वेषक (Investigator) के रूप में शामिल हैं।

मैनेजमेंट रिसर्च का बदलता स्वरूप

यह प्रोजेक्ट इस मायने में खास है कि यह मैनेजमेंट रिसर्च के पारंपरिक दायरे (बिजनेस और कॉर्पोरेट) से बाहर निकलकर सोशल इनोवेशन, पब्लिक पॉलिसी और समावेशी विकास की ओर कदम बढ़ा रहा है। शोध का मुख्य केंद्र निम्नलिखित बिंदुओं पर होगा:

  • स्वदेशी ज्ञान: जनजातियों के पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक विकास से जोड़ना।
  • वन अधिकार: सामुदायिक अधिकारों के माध्यम से रोजी-रोटी की सुरक्षा सुनिश्चित करना।
  • डिजिटल नवाचार: जनजातीय समुदायों में डिजिटल साक्षरता और तकनीक के माध्यम से उद्यमिता को बढ़ावा देना।
  • संस्थागत प्रभावशीलता: सरकारी नीतियों और जमीनी स्तर पर उनके क्रियान्वयन की जांच करना।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने दी बधाई

जामिया बिरादरी और विश्वविद्यालय प्रशासन ने शोध टीम को इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिए बधाई दी है। विश्वविद्यालय को उम्मीद है कि यह शोध न केवल अकादमिक जगत में योगदान देगा, बल्कि भारत की सबसे पिछड़ी जनजातियों के लिए नीति निर्माण में एक मार्गदर्शक की भूमिका भी निभाएगा।


मुख्य हाइलाइट्स (Key Highlights):

  • संस्था: प्रबंधन अध्ययन विभाग, जामिया मिल्लिया इस्लामिया।
  • फंडिंग एजेंसी: ICSSR (इंडियन काउंसिल ऑफ़ सोशल साइंस रिसर्च)।
  • बजट: ₹16 लाख।
  • लक्ष्य समूह: झारखंड की ‘असुर’ जनजाति (PVTG)।
  • प्रमुख क्षेत्र: डिजिटल इनोवेशन, वन अधिकार और स्वदेशी ज्ञान।