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गरीबों की शादी आसान बनाने की मांग, हर पंचायत में बने सार्वजनिक शादी घर: एआईएमएफडी का प्रस्ताव

देश के कई हिस्सों में शादी समारोह अब गरीब और मध्यम वर्ग के लिए बड़ी आर्थिक चुनौती बनते जा रहे हैं। महंगे प्राइवेट बैंक्वेट हॉल और शादी घरों की बढ़ती लागत ने आम परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। खासकर ग्रामीण इलाकों और छोटे शहरों में रहने वाले कमजोर वर्गों के लिए यह समस्या और गंभीर हो गई है। इसी मुद्दे को उठाते हुए All India Minorities Forum for Democracy ने एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखा है।

फोरम ने मांग की है कि हर ग्राम पंचायत, नगर पंचायत और नगर निकाय की सरकारी जमीन पर स्थायी सार्वजनिक विवाह या कम्युनिटी हॉल बनाए जाएं। इससे गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर परिवार कम खर्च में सम्मान के साथ अपने सामाजिक कार्यक्रम कर सकेंगे।

फोरम के सचिव प्रकाशन और प्रचार प्रसार अबुशहमा अंसारी ने इस प्रस्ताव को सार्वजनिक करते हुए कहा कि आज शादी जैसे सामाजिक दायित्व को निभाना गरीब परिवारों के लिए बेहद मुश्किल होता जा रहा है। प्राइवेट शादी हॉल के किराये बहुत अधिक हैं। कई जगहों पर एक दिन के लिए ही हजारों से लेकर लाखों रुपये तक खर्च करना पड़ता है। ऐसे में साधारण परिवारों के सामने बड़ी आर्थिक परेशानी खड़ी हो जाती है।

उन्होंने कहा कि अगर पंचायत और नगर निकाय की जमीन पर सार्वजनिक शादी घर बनाए जाएं तो यह गरीबों के लिए बड़ी राहत साबित होगा। इससे समाज के कमजोर वर्ग भी बिना आर्थिक दबाव के अपने बच्चों की शादी जैसे कार्यक्रम सम्मानपूर्वक कर सकेंगे।

इसी मुद्दे को लेकर फोरम के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अम्मार रिज़वी ने उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री Keshav Prasad Maurya को एक पत्र भेजा है। पत्र में उन्होंने सरकार का ध्यान इस गंभीर सामाजिक समस्या की ओर आकर्षित किया है।

अपने पत्र में डॉ. रिज़वी ने लिखा है कि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में जनसंख्या लगातार बढ़ रही है। दूसरी ओर जमीन की उपलब्धता सीमित होती जा रही है। ऐसे में गरीब और कमजोर वर्ग के लोगों के लिए शादी और अन्य सामाजिक कार्यक्रम आयोजित करना कठिन होता जा रहा है।

उन्होंने सुझाव दिया कि यदि हर पंचायत और नगर निकाय की सरकारी जमीन पर सार्वजनिक विवाह या कम्युनिटी हॉल बना दिए जाएं तो यह जनकल्याण की दिशा में बड़ा कदम होगा। इससे समाज के हर वर्ग को लाभ मिलेगा।

फोरम का कहना है कि यह पहल सरकार की उस नीति को भी मजबूत करेगी जिसमें सभी वर्गों के विकास और विश्वास की बात की जाती है। ऐसे सार्वजनिक हॉल बनने से सामाजिक कार्यक्रमों के लिए लोगों को सस्ती और सुरक्षित जगह मिल सकेगी।

ऑल इंडिया माइनॉरिटीज़ फोरम फॉर डेमोक्रेसी ने जिला प्रशासन और पंचायती राज विभाग के अधिकारियों से भी अपील की है। फोरम ने कहा है कि ग्राम पंचायतों की खाली या अनुपयोगी जमीन की पहचान की जाए। वहां सार्वजनिक शादी घर बनाने की योजना तैयार की जाए।

फोरम ने यह भी सुझाव दिया है कि इसके लिए सरकार अलग बजट की व्यवस्था करे। साथ ही प्रशासनिक स्वीकृति देकर इस योजना को जल्द लागू किया जाए।

सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि अगर यह प्रस्ताव लागू होता है तो इसका सीधा फायदा गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों को मिलेगा। शादी जैसे कार्यक्रम कम खर्च में हो सकेंगे और समाज में अनावश्यक दिखावे की प्रवृत्ति भी कम हो सकती है।

अब नजर इस बात पर है कि सरकार और प्रशासन इस प्रस्ताव पर क्या कदम उठाते हैं। अगर पंचायत स्तर पर सार्वजनिक शादी घर बनने की पहल शुरू होती है तो यह ग्रामीण समाज में एक बड़ा सामाजिक बदलाव ला सकती है।